Tuesday, October 7, 2025

आरएचआई मैग्नीसीटा के शेयरों में 15% से अधिक की तेजी आई, जो पिछले 5 वर्षों में इसका सबसे अच्छा दिन रहा।RHI Magnesita shares surge over 15%, post best day in over 5 years.

RHI Magnesita के शेयरों में मंगलवार, 7 अक्टूबर 2025 को 15% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली, जो कंपनी के अब तक के सबसे अच्छे दिन में से एक है। यह बड़ी तेजी कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, विकास की उम्मीदों और बाजार में उसकी विश्वसनीयता का संकेत है। अब तक का रिकॉर्ड तोड़ने वाले इस दिन के कारणों में कंपनी का अच्छा व्यापार प्रदर्शन और निवेशकों का विश्वास शामिल है।कंपनी का परिचय और व्यापारRHI Magnesita एक प्रमुख रिफ्रैक्टरी सामग्री बनाने वाली कंपनी है। यह मुख्य रूप से स्टील, सीमेंट, गैर-खाद्य धातु, कांच और ऊर्जा क्षेत्रों को रिफ्रैक्टरी उत्पाद प्रदान करती है। कंपनी का मुख्य कार्य उच्च तापमान पर टिकने वाले उत्पाद बनाना है, जो 1200 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर तापमान का सामना कर सकते हैं। भारत में भी इसकी तीन अत्याधुनिक उत्पादन सुविधा मौजूद हैं, जो देश एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ग्राहकों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। कंपनी का मुख्यालय गुरुग्राम में है और यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है, जहां यह FTSE 250 सूचकांक का हिस्सा है। 

बाजार में तेजी का कारणपिछले कुछ महीनों में, RHI Magnesita के शेयरों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। हाल ही में कंपनी ने अपने वित्तीय परिणाम भी बेहतर दिए हैं, जिसमें आय में वृद्धि और घाटे में कमी शामिल है। 2025 में कंपनी का नेट नुकसान घटकर 44 करोड़ रुपये रहा है, जो पहले की तुलना में अच्छा संकेत है। इसके अलावा, कंपनी के प्रबंधन ने विस्तार और उत्पादन बढ़ाने के संकेत दिए हैं, जो निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहा है।निवेशकों की प्रतिक्रियामंगलवार के दिन कंपनी के शेयर 12.8% बढ़कर 496.45 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि पिछले दिन का बंद मूल्य 440.15 रुपये था। इस दिन का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 10,252 करोड़ रुपये रहा। निवेशकों की उम्मीदें कंपनी के मजबूत भविष्य की ओर संकेत कर रही हैं और साथ ही बाजार में इसके उत्पादन एवं व्यापार क्षमता का भरोसा भी जता रही हैं। 
निष्कर्षयह निवेशकों के लिए अच्छा संकेत है कि RHI Magnesita ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत की है और भविष्य में विस्तारित विकास की संभावना दिख रही है। बाजार में इसकी उच्चतम कीमत और मजबूत कंपनी की नींव दिखाते हैं कि इसकी बढ़ोतरी लंबे समय के लिए स्थिर रह सकती है। इसकी व्यापार रणनीतियों और वैश्विक विस्तार से यह कंपनी इंटरनेशनल मार्केट में भी अपनी पकड़ मजबूत करेगी, जो निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।




Monday, October 6, 2025

"जैन रिसोर्स रिक्लिंग तेज़ी से विकास की राह पर अग्रसर है"Jain Resource Recycling charts aggressive growth path.Jain Resource Recycling IPO

जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग का मानना है कि रिसाइक्लिंग अब एक विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन गई है, क्योंकि पर्यावरण को बचाने और टिकाऊ विकास के लिए पुराने धातुओं और सामग्रियों का पुनः उपयोग करना बेहद जरूरी हो गया है।कंपनी की पृष्ठभूमिजैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग देश की अग्रणी नॉन-फेरस मेटल (जैसे कॉपर, लेड, एल्यूमिनियम) रीसाइक्लिंग कंपनी है। इसकी शुरुआत 2022 में हुई थी और इसके पास चेन्नई में तीन बड़े प्लांट हैं, जहां पुराना मेटल स्क्रैप प्रोसेस करके उपयोगी धातु में बदला जाता है। यह कंपनी ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और अन्य उद्योगों को सामग्री सप्लाई करती है। इसके ग्राहक भारत के अलावा जापान, चीन, कोरिया जैसे देशों में भी हैं।कंपनी का प्रदर्शनवित्त वर्ष 2025 में, कंपनी ने 7,162 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया, जो पिछले साल की तुलना में 60% ज्यादा है। कंपनी का प्रॉफिट 223 करोड़ रुपये रहा, जो 36% की वृद्धि थी।आक्रामक विकास योजनायह कंपनी अपनी वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए नए उत्पाद जैसे कॉपर कैथोड, वायर रॉड और बसबार की प्रोडक्शन शुरू कर रही है। सोलर पैनल, गाड़ियों के टायर और कॉपर-एल्यूमिनियम रेडिएटर के खास रीसाइक्लिंग क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है, ताकि टिकाऊ विकास और बढ़ती मांग का पूरा फायदा उठा सके।आईपीओ और निवेशहाल ही में कंपनी का आईपीओ आया, जिसका साइज 1,250 करोड़ रुपये था। आईपीओ के पैसों से कंपनी अपनी उधारी कम करने और विस्तार के लिए नए प्लांट लगाने की योजना बना रही है। इसका शेयर बाजार में लिस्ट हुआ और प्राइस ने अच्छी ग्रोथ दिखाई।निष्कर्षजैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग की योजना है कि रिसाइक्लिंग को मजबूरी मानकर, वह नए क्षेत्रों में प्रवेश करे और देश-विदेश में कारोबार बढ़ाए। इसी वजह से कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल और उत्पादों में विविधता लाई है ताकि टिकाऊ और आक्रामक विकास संभव बन सके

#Nykaa ने दूसरी तिमाही में लगभग 30% की सकल व्यापारिक मूल्य (GMV) वृद्धि दर्ज की है, जो ब्यूटी और फैशन क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रेरित है।#Nykaa projects Q2 GMV growth close to 30%, driven by strong performance in beauty and fashion verticals.

नायका (Nykaa) ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (Q2) में लगभग 30% ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से कंपनी के ब्यूटी और फैशन व्यवसायों की तेज प्रगति से आई है। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट रेवेन्यू भी इस तिमाही में पिछले साल की तुलना में 20-25% यानी मिड-ट्वेंटीज की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो इस बार त्योहारी सीज़न की जल्दी शुरुआत के कारण है।ब्यूटी सेक्टर में नायका ने लगातार 10 से अधिक तिमाहियों तक मजबूत विकास दिखाया है, जिसमें नेट सेल्स वैल्यू (NSV) और नेट रेवेन्यू दोनों बढ़ रहे हैं। कंपनी के अपने ब्रांड और अधिग्रहित ब्रांड जैसे डॉट एंड की, कयी ब्यूटी, और नायका कॉस्मेटिक्स काफी तेजी से बढ़ रहे हैं।फैशन सेक्टर ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां NSV ग्रोथ 25-28% के बीच और नेट रेवेन्यू ग्रोथ 20-22% के बीच रहने का अनुमान है। फैशन सेगमेंट में वृद्धि खासतौर पर ब्रांड असॉर्टमेंट बढ़ने और ग्राहक संख्या में तेजी से इज़ाफे के कारण हुई है।काल्पनिक और वास्तविक मामलों में अभी यह आंकड़े ऑडिट के अधीन हैं, लेकिन कंपनी की जो रिपोर्ट आई है, वह निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं और इससे नायका के शेयरों में भी बढ़त देखी गई है।इस तिमाही की सफलता नायका के बिजनेस मॉडल और दोनों प्रमुख वर्टिकल (ब्यूटी और फैशन) के स्थिर और निरंतर विकास को दर्शाती है। यह नायका के ऑनलाइन ब्यूटी और फैशन प्लेटफॉर्म के लिए बेहद अच्छा परिणाम माना जा रहा है।

Sunday, October 5, 2025

पूनावाला फिनकॉर्प की AUM में सालाना 67.7% और तिमाही आधार पर 15.4% की उछाल आया, जो सितंबर 2025 तक 47,625 करोड़ तक पहुंच गई। Poonawalla Fincorp's AUM surged 67.7% YoY, 15.4% QoQ to 47,625 crore by Sept 2025. The firm maintains 6,200 crore liquidity, focusing on risk management and sustainable growth.

पूनावाला फिनकॉर्प लिमिटेड, भारत की तेजी से बढ़ती गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी), ने हाल ही में अपनी संपत्ति प्रबंधन (AUM) में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। सितंबर 2025 तक कंपनी की AUM 47,625 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में (YoY) 67.7% और पिछली तिमाही की तुलना में (QoQ) 15.4% की तेज उछाल दर्शाती है। यह वृद्धि कंपनी की मजबूत बाजार रणनीति और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण का प्रमाण है, जो वित्तीय समावेशन और सतत विकास को बढ़ावा दे रही है।AUM में इस उल्लेखनीय वृद्धि के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं। कंपनी ने मुख्य रूप से खुदरा ऋण क्षेत्र में विस्तार किया है, जिसमें व्यक्तिगत ऋण, वाहन ऋण और छोटे व्यवसाय ऋण शामिल हैं। कोविड-19 के बाद की आर्थिक सुधार प्रक्रिया में मध्यम वर्ग की बढ़ती वित्तीय जरूरतों ने इस विकास को गति प्रदान की। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऋण वितरण को सरल बनाना और त्वरित अनुमोदन प्रक्रिया ने ग्राहक आधार को व्यापक रूप से विस्तारित किया। पूनावाला फिनकॉर्प ने विभिन्न राज्यों में अपनी शाखाओं का नेटवर्क मजबूत किया, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पहुंच बढ़ी।कंपनी की वित्तीय मजबूती को दर्शाते हुए, यह 6,200 करोड़ रुपये की मजबूत तरलता बनाए रख रही है। यह तरलता बफर न केवल संभावित बाजार उतार-चढ़ावों से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि नए अवसरों में निवेश के लिए तैयार रहने में भी सहायक है। पूनावाला फिनकॉर्प ने जोखिम प्रबंधन को अपनी प्राथमिकता बनाया है। उन्नत डेटा एनालिटिक्स और एआई-आधारित क्रेडिट मूल्यांकन प्रणाली के माध्यम से, कंपनी डिफॉल्ट दरों को न्यूनतम रखने में सफल रही है। हाल के वर्षों में, इसकी गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) अनुपात उद्योग औसत से काफी नीचे रहा, जो निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है।सतत विकास पर फोकस करते हुए, पूनावाला फिनकॉर्प पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) मानकों का पालन कर रही है। कंपनी ने हरित ऋण योजनाओं को बढ़ावा दिया, जैसे कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में योगदान देता है। इसके साथ ही, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों ग्राहकों को जागरूक किया जा रहा है। भविष्य की योजनाओं में, कंपनी AUM को 2026 तक 60,000 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखे हुए है, जिसमें टेक्नोलॉजी एकीकरण और साझेदारियों पर जोर दिया जाएगा।यह प्रदर्शन न केवल पूनावाला फिनकॉर्प की आंतरिक क्षमताओं को रेखांकित करता है, बल्कि भारतीय एनबीएफसी क्षेत्र की समग्र मजबूती को भी प्रतिबिंबित करता है। निवेशकों और विश्लेषकों के बीच उत्साह बढ़ रहा है, क्योंकि कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, जोखिम प्रबंधन की निरंतर निगरानी आवश्यक रहेगी। कुल मिलाकर, पूनावाला फिनकॉर्प का यह सफर सतत और जिम्मेदार विकास का प्रतीक है, जो भारत की वित्तीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

Saturday, October 4, 2025

संदूर मैंगनीज एंड आयरन ओर्स ने शेयरों में वॉल्यूम बढ़ोतरी से संबंधित कोई अनधिकृत जानकारी न होने की स्पष्टता दी है।कंपनी का कहना है कि वॉल्यूम में वृद्धि बाजार-चालित है और एसईबीआई विनियमों का पालन करती है।#Sandur Manganese & Iron Ores clarifies no undisclosed info related to volume surge in shares.The company states the volume increase is market-driven and complies with SEBI regulations.

भारतीय शेयर बाजार में संदूर मैंगनीज एंड आयरन ओर्स लिमिटेड नाम की कंपनी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। यह कंपनी मुख्य रूप से मैंगनीज और आयरन के अयस्कों का खनन और उत्पादन करती है। कर्नाटक राज्य में स्थित यह कंपनी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड है। हाल ही में इसके शेयरों में ट्रेडिंग वॉल्यूम में अचानक बहुत तेजी आई। मतलब, शेयरों की खरीद-बिक्री की मात्रा सामान्य से कई गुना बढ़ गई। ऐसे में निवेशकों में उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर इसके पीछे क्या कारण है। क्या कोई नई खबर या डील है?कंपनी ने जल्दी ही एक स्पष्टिकरण जारी किया। इसमें कहा गया है कि शेयरों में इस वॉल्यूम बढ़ोतरी से जुड़ी कोई अनकही या छिपी हुई जानकारी नहीं है। कंपनी के बोर्ड और मैनेजमेंट ने पुष्टि की कि उनके पास कोई ऐसी सामग्री घटना या सूचना नहीं है जो बाजार को प्रभावित करे। सब कुछ सामान्य है। वॉल्यूम में यह उछाल पूरी तरह बाजार की मांग और निवेशकों की रुचि से प्रेरित है। कोई कंपनी की ओर से कोई नया ऐलान या योजना नहीं है जो इसके पीछे हो।यह स्पष्टिकरण सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के नियमों का पालन करते हुए जारी किया गया। सेबी के नियम कहते हैं कि अगर किसी कंपनी के शेयरों में असामान्य गतिविधि दिखे, तो उसे तुरंत स्पष्ट करना पड़ता है। इससे निवेशकों को भ्रम न हो और बाजार में पारदर्शिता बनी रहे। अगर कोई छिपी जानकारी हो, तो वह अनुचित व्यापार को बढ़ावा दे सकती है, जो सेबी की सख्ती से प्रतिबंधित है।कंपनी ने निवेशकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। बाजार में कभी-कभी अफवाहें फैल जाती हैं, जो शेयर मूल्य को ऊपर-नीचे कर देती हैं। लेकिन यहां सब कुछ कानूनी और पारदर्शी है। संदूर कंपनी लंबे समय से मजबूत प्रदर्शन कर रही है। यह मैंगनीज अयस्क का बड़ा उत्पादक है, जो स्टील उद्योग के लिए जरूरी है। हाल के वर्षों में वैश्विक मांग बढ़ने से इसकी आय में वृद्धि हुई है।इस घटना से सीख मिलती है कि शेयर बाजार में निवेश करते समय सावधानी बरतें। हमेशा कंपनी की आधिकारिक घोषणाओं पर ध्यान दें। सेबी जैसे नियामक संस्थान बाजार को सुरक्षित रखने के लिए काम करते हैं। कुल मिलाकर, यह एक सामान्य बाजार उतार-चढ़ाव था, जिसमें कोई बड़ा रहस्य नहीं। निवेशक अब शांत होकर कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन पर नजर रख सकते हैं। 

हुरॉन होल्डिंग्स ने #Aegis लॉजिस्टिक्स के 10,000 शेयर हासिल किए, जिससे इसकी हिस्सेदारी 31.67% तक बढ़ गई। प्रमोटर समूह की होल्डिंग 58.1% पर है।Huron Holdings acquired 10,000 shares of #Aegis Logistics, raising its stake to 31.67%.Promoter group holding at 58.1%.

एगिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड भारत की एक प्रमुख कंपनी है। यह तेल, गैस और रसायनों की लॉजिस्टिक्स सेवाएं देती है। कंपनी का मुख्य काम तरल पदार्थों के भंडारण और हैंडलिंग का है। यह भारत में एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के बड़े आयातकों और हैंडलरों में से एक है। कंपनी की स्थापना 1956 में हुई थी। इसमें करीब 1043 कर्मचारी काम करते हैं। एगिस लॉजिस्टिक्स बीएसई और एनएसई पर लिस्टेड है। यह तेल और गैस रिफाइनिंग व मार्केटिंग क्षेत्र में काम करती है। कंपनी के पास बल्क लिक्विड हैंडलिंग टर्मिनल्स का नेटवर्क है। यह रसायनों, तेल और गैस के क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और टर्मिनलिंग सेवाएं प्रदान करती है। 

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हुरॉन होल्डिंग्स लिमिटेड एक होल्डिंग कंपनी है। यह मॉरीशस से संचालित होती है। कंपनी का मुख्य काम कंपनियों का प्रबंधन और निवेश है। यह एगिस लॉजिस्टिक्स के प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा है। हुरॉन होल्डिंग्स का एगिस में महत्वपूर्ण प्रभाव है। यह अन्य कंपनियों जैसे ट्रांस एशिया पेट्रोलियम इंक और एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के साथ मिलकर काम करती है। ये सभी प्रमोटर ग्रुप में शामिल हैं। हुरॉन होल्डिंग्स का मुख्यालय मॉरीशस में है और यह निवेश संबंधी निर्णय लेती है। 

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अब मुख्य खबर पर आते हैं। 26 सितंबर 2025 को हुरॉन होल्डिंग्स ने एगिस लॉजिस्टिक्स के 10,000 शेयर खरीदे। यह खरीद प्रमोटर्स के बीच इंटर-से ट्रांसफर के रूप में हुई, जो ऑफ-मार्केट थी। मतलब, यह शेयर बाजार के बाहर प्रमोटर ग्रुप के सदस्यों के बीच ट्रांसफर किया गया। शेयरों की कीमत 758.90 रुपये प्रति शेयर थी। कुल मूल्य 75.89 लाख रुपये था। यह कुल शेयर कैपिटल का 0.0028% है। 

इस खरीद से पहले हुरॉन होल्डिंग्स के पास 11,11,60,570 शेयर थे, जो 31.6697% हिस्सेदारी थी। एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के पास 10,000 शेयर थे। कुल प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग 20,39,24,675 शेयर (58.0982%) थी। खरीद के बाद हुरॉन की हिस्सेदारी बढ़कर 11,11,70,570 शेयर (31.6725%) हो गई। एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर की हिस्सेदारी 0% हो गई। लेकिन कुल प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग वही 58.0982% रही, क्योंकि यह ग्रुप के अंदर ही ट्रांसफर था। 

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यह ट्रांसफर एसईबीआई (सब्स्टैंशियल एक्विजिशन ऑफ शेयर्स एंड टेकओवर्स) रेगुलेशंस, 2011 के तहत हुआ। इससे कंपनी में प्रमोटर्स का विश्वास दिखता है। चूंकि हिस्सेदारी ग्रुप के अंदर ही घूमी है, इसलिए कंपनी की कुल प्रमोटर होल्डिंग में कोई बदलाव नहीं आया। यह स्थिरता का संकेत है। निवेशकों के लिए यह सकारात्मक हो सकता है, क्योंकि मजबूत प्रमोटर होल्डिंग कंपनी को मजबूत बनाती है। जून 2025 में प्रमोटर होल्डिंग 58.10% थी, जो अब भी लगभग वही है। 

एगिस लॉजिस्टिक्स का शेयर बाजार में अच्छा प्रदर्शन रहा है। कंपनी ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ रही है। ऐसे ट्रांसफर से कंपनी की संरचना मजबूत होती है। अगर आप निवेशक हैं, तो हमेशा सलाहकार से बात करें। यह जानकारी सार्वजनिक घोषणाओं पर आधारित है। कुल मिलाकर, यह एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण ट्रांसफर है जो प्रमोटर ग्रुप की एकजुटता दिखाता है.

Thursday, October 2, 2025

#नेटफ्लिक्स - इनसाइडर बिक्री: स्पेंसर न्यूमैन ने नेटफ्लिक्स इंक (NFLX) के 2,600 शेयर बेचे#Netflix - Insider Sell: Spencer Neumann Sells 2,600 Shares of Netflix Inc (NFLX)

नेटफ्लिक्स इंक (NFLX), दुनिया की अग्रणी स्ट्रीमिंग सेवा कंपनी, हाल ही में दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर, कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) स्पेंसर न्यूमैन ने 2,600 शेयर बेचे हैं, जो निवेशकों के बीच चिंता पैदा कर रहा है। दूसरी ओर, टेस्ला और एक्स (पूर्व ट्विटर) के सीईओ एलन मस्क ने नेटफ्लिक्स के कंटेंट को "वोक एजेंडा" बताते हुए सब्सक्रिप्शन रद्द करने का अभियान चला रखा है। यह विवाद नेटफ्लिक्स के शेयरों पर भारी दबाव डाल रहा है, जो हाल के दिनों में करीब 40% गिर चुके हैं। आइए, इन घटनाओं की विस्तृत पड़ताल करें।सबसे पहले, स्पेंसर न्यूमैन की इनसाइडर बिक्री पर नजर डालें। 1 अक्टूबर 2025 को, न्यूमैन ने नेटफ्लिक्स के 2,600 शेयर औसतन 1,207.76 डॉलर प्रति शेयर की दर से बेचे, जिससे उन्हें लगभग 3.14 मिलियन डॉलर की आय हुई। यह लेन-देन अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) फाइलिंग में दर्ज है। बिक्री के बाद, न्यूमैन के पास कंपनी के 3,691 शेयर शेष रह गए। यह कोई पहली घटना नहीं है; पिछले एक साल में न्यूमैन ने कुल 33,295 शेयर बेचे हैं, बिना कोई खरीदारी किए। नेटफ्लिक्स में कुल 98 इनसाइडर बिक्री हुई हैं, लेकिन एक भी खरीदारी नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी बिक्री अक्सर व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतों या टैक्स प्लानिंग के कारण होती है, न कि कंपनी के भविष्य पर संदेह के। फिर भी, निवेशक इसे नकारात्मक संकेत मानते हैं, खासकर जब नेटफ्लिक्स का मार्केट कैपिटलाइजेशन 515 बिलियन डॉलर से घटकर हाल में 300 बिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है।अब, एलन मस्क के साथ विवाद पर आते हैं। 1 अक्टूबर 2025 को, मस्क ने अपने 226 मिलियन फॉलोअर्स को नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन रद्द करने की अपील की। कारण? नेटफ्लिक्स का एनिमेटेड शो "डेड एंड: पैरानॉर्मल पार्क" (2022 में रिलीज, 2023 में कैंसल), जिसमें मुख्य किरदार बार्नी एक ट्रांसजेंडर टीनएजर है। मस्क ने इसे "बच्चों के लिए ट्रांसजेंडर प्रोपेगैंडा" करार दिया और कहा, "अपने बच्चों की सेहत के लिए नेटफ्लिक्स कैंसल करो।" उन्होंने 26 से अधिक पोस्ट्स में इस अभियान को बढ़ावा दिया, जिसमें Libs of TikTok जैसे कंजर्वेटिव अकाउंट्स की क्लिप्स शेयर कीं। विवाद तब भड़का जब शो के क्रिएटर हमिश स्टील के पुराने पोस्ट्स उजागर हुए, जिसमें उन्होंने कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट चार्ली किर्क की हत्या पर कथित टिप्पणी की थी। स्टील ने इसे झूठा बताया, लेकिन मस्क ने नेटफ्लिक्स को "वोक बायस" और LGBTQ+ कंटेंट को बढ़ावा देने का दोषी ठहराया।इस अभियान का असर तत्काल दिखा। 1 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स का शेयर 1,170.90 डॉलर पर बंद हुआ (2.34% गिरावट), 2 अक्टूबर को 1,162.53 डॉलर (0.72% और नीचे), और 3 अक्टूबर को मात्र 706.80 डॉलर (39.20% की भारी गिरावट)। कुल मिलाकर, 1 अक्टूबर से 197 बिलियन डॉलर का मार्केट कैप लॉस हुआ। एक्स पर #CancelNetflix ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स बच्चों को "ग्रूमिंग" से बचाने की बात कर रहे हैं। हालांकि, एनालिस्ट्स का कहना है कि यह अल्पकालिक है; नेटफ्लिक्स के 190 देशों में 2.7 बिलियन सब्सक्राइबर्स हैं, और शेयर पहले ही महंगे थे।नेटफ्लिक्स ने अब तक चुप्पी साध रखी है, लेकिन CEO टेड सरांडोस ने पहले डेव चैपेल के ट्रांस-विरोधी जोक्स का बचाव किया था। मस्क का यह हमला उनकी "फ्री स्पीच" वाली छवि से मेल खाता है, लेकिन आलोचक इसे कल्चर वॉर का हथियार मानते हैं। क्या यह नेटफ्लिक्स के लिए अंत है? शायद नहीं, लेकिन इनसाइडर बिक्री और बॉयकॉट ने कंपनी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। नेटफ्लिक्स को अपनी कंटेंट स्ट्रैटेजी पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है, जबकि मस्क की ताकत सोशल मीडिया की राजनीति को उजागर करती है। कुल मिलाकर, यह टेक और एंटरटेनमेंट जगत का नया बैटलग्राउंड बन गया है। 

नेटवेब टेक्नोलॉजीज के शेयर 13% उछलकर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचे, 6 महीने में 170% की तेजी! यहाँ कारण बताया गया है।#NetwebTechnologies shares surge 13% to record high, rally 170% in 6 months! Here's why?


नेटवेब टेक्नोलॉजीज इंडिया लिमिटेड, एक प्रमुख हाई-एंड कंप्यूटिंग सॉल्यूशंस प्रदाता, के शेयरों ने हाल ही में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 1 अक्टूबर 2025 को, कंपनी के शेयर एनएसई पर 13% की तेजी के साथ रिकॉर्ड 4,108 रुपये के स्तर पर पहुंच गए। यह उछाल पिछले एक महीने में 80% और छह महीनों में पूरे 170% की रैली का हिस्सा है। छोटे कैप स्टॉक के रूप में, नेटवेब का यह प्रदर्शन निवेशकों के बीच उत्साह पैदा कर रहा है, खासकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई के बढ़ते बाजार के बीच।इस तेजी के पीछे कई मजबूत कारण हैं। सबसे पहले, भारत की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में संरचनात्मक बदलाव। सरकार की डेटा लोकलाइजेशन नीतियां और एआई अपनाने की दिशा में कदम छोटे व्यवसायों को बड़ा अवसर दे रही हैं। वेंचुरा सिक्योरिटीज के अनुसार, भारत का कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार FY28 तक तेजी से बढ़ेगा। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर अकेले 29.5% की CAGR से बढ़कर 8,700 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। प्राइवेट क्लाउड और हाइपरकन्वर्ज्ड इंफ्रास्ट्रक्चर (HCI) 28.5% CAGR पर 14,100 करोड़ रुपये का होगा, जबकि हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) 8.2% बढ़कर 2,430 करोड़ रुपये का। नेटवेब जैसी कंपनियां इस विकास से सीधे लाभान्वित हो रही हैं।दूसरा प्रमुख कारक है कंपनी के हालिया बड़े ऑर्डर। 21 सितंबर 2025 को, नेटवेब ने 450 करोड़ रुपये का ऑर्डर हासिल किया, जिसमें इसके टायरॉन GPU-एक्सेलरेटेड सिस्टम्स का उपयोग एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तैनात करने के लिए होगा। यह ऑर्डर FY25-26 तक पूरा होगा। इससे पहले, सितंबर की शुरुआत में कंपनी ने इंडिया एआई मिशन के तहत 1,734 करोड़ रुपये का अनुबंध जीता, जिसमें एनवीडिया-पावर्ड सर्वर सप्लाई शामिल है। ये ऑर्डर नेटवेब की टायरॉन कैमरारो एआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरे होंगे, जो बड़े पैमाने पर जेनरेटिव एआई, फाउंडेशनल मॉडल ट्रेनिंग और एक्सास्केल कंप्यूटिंग के लिए डिजाइन किया गया है। ये सौदे कंपनी की राजस्व और लाभ को बढ़ावा देंगे।तीसरा, मजबूत वित्तीय परिणाम। Q1 FY26 (जून 2025) में, नेटवेब का ऑपरेटिंग इनकम 101.7% YoY बढ़कर 301.21 करोड़ रुपये हो गया, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 100% से अधिक उछलकर 30.5 करोड़ रुपये पर पहुंचा। यह वृद्धि एआई तकनीकों की मजबूत मांग और अनुशासित निष्पादन पर आधारित है। कंपनी नेट कैश पोजिशन में 47.5 करोड़ रुपये के साथ है, जो वित्तीय स्थिरता दर्शाता है। वेंचुरा के अनुमान से, नेटवेब का राजस्व 36.7% CAGR पर FY28 तक 2,938 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिसमें एआई सिस्टम्स, एंटरप्राइज वर्कस्टेशन और क्लाउड सेवाओं की मांग प्रमुख होगी।इसके अलावा, तकनीकी संकेतक भी तेजी का समर्थन कर रहे हैं। शेयरों ने हाल के दिनों में भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम देखे हैं, जिसमें 7.51 मिलियन इक्विटी शेयर (कुल इक्विटी का 13.25%) बदले गए। RSI 81.7 पर है, जो ओवरबॉट स्थिति दर्शाता है, लेकिन ADX 43 पर मजबूत ट्रेंड दिखा रहा है। ब्रेकआउट के बाद, 3,000 रुपये का स्तर अब सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है।कंपनी की पृष्ठभूमि भी प्रभावशाली है। 1999 में स्थापित नेटवेब भारत का प्रमुख HCS प्रदाता है, जो सर्वर, वर्कस्टेशन, स्टोरेज, क्लाउड, HPC, एआई और बिग डेटा सॉल्यूशंस प्रदान करता है। इसके सुपरकंप्यूटर वैश्विक टॉप 500 रैंकिंग में 15 बार शामिल हो चुके हैं। प्रमोटर होल्डिंग 71% है, जो विश्वास बढ़ाता है।हालांकि, तेज रैली के बीच लाभ बुकिंग का जोखिम है, खासकर ओवरबॉट संकेतकों के कारण। फिर भी, लंबी अवधि में एआई और डिजिटल विकास की लहर नेटवेब को मजबूत बनाए रखेगी। निवेशक सतर्क रहें और फंडामेंटल्स पर नजर रखें।

Tuesday, September 30, 2025

टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन स्टॉक स्प्लिट (1:10)Tata Investment Corp Stock Split #TataInvestment

टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन स्टॉक स्प्लिट: सरल हिंदी में पूरी जानकारीटाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन एक बड़ी कंपनी है। यह टाटा ग्रुप की हिस्सा है। यह कंपनी निवेश करती है। मतलब, यह अन्य कंपनियों के शेयर खरीदती है और पैसे कमाती है। अब इस कंपनी ने स्टॉक स्प्लिट की घोषणा की है। स्टॉक स्प्लिट क्या होता है? सरल शब्दों में, स्टॉक स्प्लिट में एक शेयर को कई छोटे शेयरों में बांट दिया जाता है। इससे शेयर की कीमत कम हो जाती है। लेकिन कंपनी की कुल वैल्यू वही रहती है। यह निवेशकों के लिए अच्छा होता है क्योंकि ज्यादा लोग शेयर खरीद सकते हैं।इस स्प्लिट का अनुपात 1:10 है। मतलब, अगर आपके पास एक शेयर है जिसकी फेस वैल्यू 10 रुपये है, तो वह 10 शेयरों में बदल जाएगा। हर नए शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपया होगी। यह कंपनी का पहला स्टॉक स्प्लिट है। घोषणा 22 सितंबर 2025 को हुई। कंपनी ने पोस्टल बैलट से शेयरधारकों की मंजूरी ली। रिकॉर्ड डेट 14 अक्टूबर 2025 है। मतलब, अगर आप 14 अक्टूबर तक शेयरधारक हैं, तो आपको स्प्लिट का फायदा मिलेगा। स्प्लिट के बाद आपके शेयरों की संख्या 10 गुना बढ़ जाएगी। लेकिन हर शेयर की कीमत 10 गुना कम हो जाएगी। कुल मिलाकर, आपके निवेश की वैल्यू वही रहेगी।क्यों किया स्प्लिट? कंपनी चाहती है कि उसके शेयर ज्यादा लोगों तक पहुंचें। पहले शेयर की कीमत बहुत ऊंची थी, जैसे 10,000 रुपये से ज्यादा। स्प्लिट से कीमत कम होगी, तो छोटे निवेशक आसानी से खरीद सकेंगे। इससे शेयर बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी। मतलब, शेयर खरीदना-बेचना आसान होगा। घोषणा के बाद शेयर की कीमत में तेज उछाल आया। एक दिन में 15% से ज्यादा बढ़ी। 52 हफ्तों का नया हाई बना। हाल में शेयर 10,000 रुपये तक पहुंचा। 5 दिनों में 19% से ज्यादा बढ़ा। निवेशकों में उत्साह है।यह स्प्लिट टाटा कैपिटल के आईपीओ से जुड़ा है। टाटा कैपिटल एक और टाटा कंपनी है। उसका आईपीओ 6 अक्टूबर को लॉन्च हो रहा है। आईपीओ की कीमत 310 से 325 रुपये प्रति शेयर है। कुल 15,512 करोड़ रुपये का आईपीओ है। टाटा इन्वेस्टमेंट के पास टाटा कैपिटल के शेयर हैं। आईपीओ से कंपनी को फायदा होगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।निवेशकों के लिए क्या मतलब? अगर आप शेयरधारक हैं, तो स्प्लिट से आपके शेयर बढ़ेंगे। लेकिन बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। स्प्लिट से कंपनी की वैल्यू नहीं बढ़ती, सिर्फ शेयरों की संख्या। अगर कंपनी अच्छा प्रदर्शन करे, तो कीमत बढ़ सकती है। लेकिन जोखिम भी है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता है। निवेश से पहले सलाह लें।कुल मिलाकर, यह स्प्लिट टाटा ग्रुप की ताकत दिखाता है। कंपनी मजबूत है। भविष्य अच्छा लग रहा है। अगर आप निवेश करना चाहें, तो रिसर्च करें। रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर खरीदें। लेकिन याद रखें, निवेश में जोखिम है|

Monday, September 29, 2025

दवा निर्माता वॉकहार्ट में उछाल, क्योंकि व्हाइट हाउस ने व्यापार समझौतों वाले देशों से दवा आयात को छूट दी।Drug maker #Wockhardt rallies as White House exempts pharma imports from nations with trade pacts.

फार्मा कंपनी वॉकहार्ट के शेयर 29 सितंबर 2025 को 15 प्रतिशत तक उछल गए, जिससे इसके दाम 1,536 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंच गए और कंपनी का मार्केट कैप 24,400 करोड़ रुपये हो गया। इस तेजी का सबसे बड़ा कारण व्हाइट हाउस (अमेरिकी सरकार) की नई घोषणा है, जिसमें अमेरिका ने उन देशों से दवा आयात को छूट दी है जिनके साथ उसके व्यापार समझौते हैं। पहले अमेरिका ने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की बात कही थी, जिससे शेयरों में भारी गिरावट आई थी। बाद में जब यह छूट दी गई, तो अचानक वॉकहार्ट सहित कई फार्मा कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आई।वॉकहार्ट से जुड़ी मुख्य बातेंवॉकहार्ट के शेयर 15% चढ़े और 1,536 रुपये के ऊपरी स्तर तक पहुंच गए।कंपनी का मार्केट कैप 24,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।इस बढ़ोतरी की वजह अमेरिकन टैरिफ में छूट है, जिससे दवाओं का निर्यात आसान हुआ है।बाजार पर प्रभाववॉकहार्ट ने शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर की रिकवरी का नेतृत्व किया।बजाज हेल्थकेयर, सुप्रिया लाइफसाइंस, सन फार्मा, ल्यूपिन, सिप्ला और बायोकॉन जैसी अन्य कंपनियों के शेयर भी 1-3% तक चढ़े।निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 1% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।निवेशकों और विशेषज्ञों की रायविशेषज्ञों ने कहा है कि यह वृद्धि अस्थायी भी हो सकती है, लेकिन फिलहाल बाजार में सकारात्मकता है क्योंकि भारतीय कंपनियों का फोकस जेनेरिक दवाओं पर है, और वे व्यापार समझौतों द्वारा सुरक्षा प्राप्त कर रही हैं।अमेरिकी छूट के बाद भारतीय फार्मा कंपनियों को अपनी दवाओं के निर्यात में आसानी मिलेगी, जिससे इनकी कमाई बढ़ सकती है।शेयर की मौजूदा स्थिति29 सितंबर 2025 तक वॉकहार्ट शेयर की कीमत ₹1,564 थी और कंपनी की मार्केट कैप ₹25,420 करोड़ तक जा चुकी है।कंपनी का स्टॉक पी/ई और पी/बी रेशियो सामान्य स्तर पर है।

Sunday, September 28, 2025

इटर्नल लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण ₹3.26 ट्रिलियन तक उछला, जिसने HAL, टाइटन और डीमार्ट को पीछे छोड़ दिया। इटर्नल के शेयर मूल्य में उछाल ने इसकी वैल्यूएशन को बढ़ावा दिया।Eternal Ltd's market cap surged to ₹3.26 trn, surpassing HAL, Titan, DMart.The rally in Eternal's stock price boosted its valuation.


इटरनल लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण ₹3.26 ट्रिलियन तक उछल गया, जो हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), टाइटन कंपनी और एवेन्यू सुपरमार्ट्स (DMart) को पीछे छोड़ते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस तेज रैली ने कंपनी की वैल्यूएशन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया, जो भारत के स्टॉक मार्केट में डिजिटल अर्थव्यवस्था के उदय को दर्शाता है। इटरनल, जो पहले जोमैटो के नाम से जाना जाता था, अब जोमैटो और ब्लिंकिट ब्रांड्स का मालिक है। यह खबर 18 सितंबर 2025 को सामने आई, जब कंपनी का शेयर मूल्य में उछाल आया।कंपनी का मार्केट कैप गुरुवार को ₹3,26,000 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले दिनों से लगभग 1.28% की वृद्धि का परिणाम था। इसने न केवल DMart (₹3,09,758 करोड़) और टाइटन (₹3,11,693 करोड़) को ओवरटेक किया, बल्कि HAL (₹3,24,847 करोड़), अदानी पोर्ट्स (₹3,05,087 करोड़), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (₹2,99,591 करोड़) और ONGC (₹2,96,454 करोड़) जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया। इटरनल अब टॉप 100 कंपनियों में 22वें स्थान पर काबिज है, जो निफ्टी 50 के टॉप 25 क्लब में उसकी एंट्री को मजबूत बनाता है। यह रैली निवेशकों के बीच कंपनी की ग्रोथ पोटेंशियल पर बढ़ते विश्वास को प्रतिबिंबित करती है।इटरनल की सफलता का मूल कारण इसकी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और क्विक कॉमर्स सेक्टर में विस्तार है। FY26 की पहली तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू 70% YoY बढ़कर ₹7,167 करोड़ हो गई, जबकि ब्लिंकिट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 140% उछलकर ₹11,800 करोड़ पहुंच गया। यह पहली बार था जब ब्लिंकिट का NOV जोमैटो के फूड डिलीवरी बिजनेस से आगे निकला। सालाना आधार पर, कंपनी के B2C बिजनेस का कुल NOV लगभग $10 बिलियन के करीब है, जिसमें ब्लिंकिट का योगदान आधा है। कंपनी ब्लिंकिट के डार्क स्टोर नेटवर्क को 1,544 से दोगुना करके 3,000 तक ले जाने की योजना बना रही है, जो क्विक कॉमर्स मार्केट में उसकी पकड़ मजबूत करेगा।शेयर मूल्य की बात करें तो, इटरनल का स्टॉक 52-सप्ताह के निचले स्तर से 70% ऊपर चढ़ चुका है। वर्तमान में यह ₹325 प्रति शेयर पर ट्रेडिंग कर रहा है, जो पिछले छह महीनों में 61% और तीन महीनों में 29% की वृद्धि दर्शाता है। YTD में स्टॉक 21.54% ऊपर है। यह रैली Q1 रिजल्ट्स के बाद तेज हुई, जहां नेट प्रॉफिट 90% गिरकर ₹299 करोड़ रह गया, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ ने निवेशकों को आकर्षित किया। इटरनल ने FY25 में ₹20,243 करोड़ की रेवेन्यू हासिल की, जो FY24 के ₹12,114 करोड़ से दोगुनी है। नेट प्रॉफिट FY21 के -₹816 करोड़ से सुधारकर FY25 में सकारात्मक हो गया।यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था में टेक-ड्रिवन बिजनेस के महत्व को रेखांकित करता है। इटरनल ने टाटा मोटर्स (₹2.64 लाख करोड़), विप्रो (₹2.66 लाख करोड़), JSW स्टील (₹2.72 लाख करोड़) जैसे पारंपरिक दिग्गजों को पीछे छोड़ा है। हालांकि, HAL और NTPC जैसे PSUs अभी थोड़े आगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लिंकिट की ग्रोथ और फूड डिलीवरी में स्थिरता से इटरनल का मार्केट कैप जल्द ₹4 ट्रिलियन को पार कर सकता है। लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे कॉम्पिटिशन से इंस्टामार्ट और स्विगी, और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव।कुल मिलाकर, इटरनल की यह उपलब्धि स्टार्टअप से यूनिकॉर्न की यात्रा का प्रतीक है। IPO 2021 में लिस्टिंग के बाद से यह निरंतर उम्मीदों से आगे निकल रही है। निवेशक अब HAL और बजाज फिनसर्व को ओवरटेक करने की उम्मीद कर रहे हैं। यह रैली न केवल कंपनी के शेयरधारकों को ₹38,000 करोड़ का फायदा देगी, बल्कि डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूत करेगया.

लॉरस लैब्स के सीईओ ने नए अमेरिकी टैरिफ के ब्रांडेड दवाओं पर प्रभाव को कम महत्व दिया, क्योंकि अमेरिकी बाजार में उनकी सीमित उपस्थिति है।Laurus Labs CEO downplays impact of new US tariffs on branded drugs, citing limited exposure to the US market.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया घोषणा ने वैश्विक फार्मा उद्योग में हलचल मचा दी है। 25 सितंबर 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड या पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल उत्पादों के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जब तक कि कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का निर्माण न शुरू कर दें। "ब्रेकिंग ग्राउंड" या "अंडर कंस्ट्रक्शन" वाली कंपनियां इससे मुक्त रहेंगी। यह कदम अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नौकरियां बढ़ाने का प्रयास है, लेकिन भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।भारतीय फार्मा शेयरों पर इसका तत्काल असर पड़ा। 26 सितंबर को निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.5 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 2.14 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, बायोकॉन, नाटको फार्मा और लॉरस लैब्स जैसे शेयरों में 3-8 प्रतिशत की गिरावट आई। लॉरस लैब्स का शेयर इंट्राडे 8.2 प्रतिशत गिरकर 823.1 रुपये पर पहुंच गया, जो 30-दिन के औसत वॉल्यूम का तीन गुना ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्शाता है। अन्य कंपनियां जैसे जायडस लाइफ, ग्लेनमार्क और आईपीसीए लैब्स भी 2-4 प्रतिशत नीचे रहीं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बाजार पर निर्भरता वाली कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, जहां भारत से सालाना 3.6 अरब डॉलर का फार्मा निर्यात होता है।इस बीच, लॉरस लैब्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रभाव को न्यूनतम बताते हुए निवेशकों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि कंपनी का अमेरिकी बाजार में सीमित एक्सपोजर है, खासकर ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाओं के मामले में। लॉरस लैब्स की कुल राजस्व का लगभग 40 प्रतिशत एंटीरेट्रोवायरल (एआरवी) दवाओं से आता है, जो एचआईवी उपचार के लिए जेनेरिक हैं और टैरिफ से अछूती रहेंगी। कंपनी का फोकस जेनेरिक्स, एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) और सीडीएमओ (कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन) पर है, जहां अमेरिकी निर्यात कुल का मात्र 20-25 प्रतिशत है। "हमारे पास पेटेंटेड ड्रग्स का कोई बड़ा हिस्सा नहीं है, इसलिए यह टैरिफ हमारे संचालन को प्रभावित नहीं करेगा," अधिकारी ने कहा। इसके अलावा, कंपनी यूरोप और अन्य बाजारों पर निर्भर है, जो इस नीति से सुरक्षित हैं।विश्लेषकों ने भी लॉरस पर सकारात्मक राय दी है। ब्लूमबर्ग डेटा के अनुसार, 16 विश्लेषकों में से सात 'बाय', तीन 'होल्ड' और छह 'सेल' रेटिंग दे चुके हैं, जबकि औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस 5 प्रतिशत ऊपर का संकेत देता है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की मैत्री शेठ ने कहा, "टैरिफ मुख्य रूप से ब्रांडेड दवाओं पर लक्षित है, लेकिन कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स पर अस्पष्टता बनी हुई है। फिर भी, अमेरिका में प्लांट निर्माण वाली कंपनियां इससे बच सकती हैं।" लॉरस ने हाल ही में अमेरिकी विस्तार की योजना बनाई है, जो भविष्य में राहत देगी।कुल मिलाकर, ट्रंप का यह फैसला छोटे स्तर पर असर डालेगा, लेकिन जेनेरिक-केंद्रित भारतीय कंपनियां जैसे लॉरस लैब्स मजबूत स्थिति में हैं। कंपनी का फोकस नवाचार और विविधीकरण पर है, जो लंबे समय में लाभकारी साबित होगा। निवेशक सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं—यह अस्थायी उतार-चढ़ाव है। 

Saturday, September 27, 2025

शेयर बाजार हाइलाइट्स: सेंसेक्स छठे दिन गिरा, 733 अंक नीचे बंद; निफ्टी 24,700 से नीचेStock Market Highlights: Sensex falls for 6th day, settles 733 pts lower; Nifty below 24,700

भारतीय शेयर बाजार आज फिर लाल निशान पर बंद हुआ। 26 सितंबर 2025 को बीएसई सेंसेक्स 733.22 अंक गिरकर 80,426.46 पर आ गया। यह लगातार छठा दिन था जब सेंसेक्स नीचे बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 50 भी 236.15 अंक कम होकर 24,654.70 पर बंद हुआ, जो 24,700 से नीचे है। बाजार में भारी बिकवाली हुई और कुल मार्केट वैल्यू में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।गिरावट के मुख्य कारणइस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया फैसला था। उन्होंने 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड या पेटेंट वाली दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। अगर कोई कंपनी अमेरिका में दवा का प्लांट बनाएगी, तो टैरिफ नहीं लगेगा। लेकिन अभी भारत की फार्मा कंपनियां परेशान हैं। इसके अलावा, भारी ट्रकों पर 25 प्रतिशत और किचन कैबिनेट जैसे सामान पर 50 प्रतिशत ड्यूटी लगाई गई। ये कदम भारत के निर्यात को नुकसान पहुंचा सकते हैं।दूसरा कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली था। एफआईआई (फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स) ने पिछले कुछ दिनों में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अमेरिकी बाजार में भी उतार-चढ़ाव और एच-1बी वीजा पर चिंता ने भारतीय आईटी कंपनियों को प्रभावित किया। एक्सेंचर जैसी ग्लोबल आईटी कंपनी के कमजोर नतीजों ने भी बाजार को डराया।तीसरा, घरेलू स्तर पर कमजोर कमाई के आंकड़े आए। कई कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से कम रहे। बैंकिंग, आईटी और फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।सेक्टरों की स्थितिसभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा गिरा, करीब 2-3 प्रतिशत। आईटी भी 1-2 प्रतिशत नीचे रहा। बैंक, मेटल, कंज्यूमर गुड्स, टेलीकॉम और पीएसयू बैंक सेक्टर भी 1-2 प्रतिशत कम हुए। केवल कुछ स्टॉक जैसे एलएंडटी, टाटा मोटर्स, ईचर मोटर्स, रिलायंस और आईटीसी हरे रहे।प्रमुख गेनर्स और लूजर्सनिफ्टी पर सबसे ज्यादा गिरने वाले स्टॉक थे: महिंद्रा एंड महिंद्रा (4 प्रतिशत नीचे), एटर्नल (3 प्रतिशत), इंडसइंड बैंक, सन फार्मा, टाटा स्टील। ये स्टॉक टैरिफ और कमजोर डिमांड से प्रभावित हुए। दूसरी तरफ, गेनर्स में एलएंडटी (कुछ ऊपर), टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईटीसी शामिल थे। सेंसेक्स के टॉप लूजर्स में एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, बजाज फिनसर्व, बीईएल, टाइटन, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल, एनटीपीसी, कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और पावरग्रिड थे।बाजार की शुरुआत और दिन भर का रुखबाजार की शुरुआत कमजोर रही। सेंसेक्स 81,159.68 से शुरू होकर 80,956.01 पर खुला और दिन में 80,332 तक गिरा। निफ्टी 24,832.30 से शुरू होकर 24,655 पर बंद हुआ। एशियाई बाजारों में भी गिरावट थी, जो भारतीय बाजार को प्रभावित कर रही थी।आगे क्या?विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ का असर सीमित हो सकता है, क्योंकि जेनेरिक दवाओं पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन आईटी और फार्मा पर दबाव रहेगा। निवेशक अमेरिकी फेड रिजर्व की मीटिंग और भारत-अमेरिका ट्रेड टॉक्स पर नजर रखें। छोटे निवेशक घबराएं नहीं, लंबे समय के लिए अच्छे स्टॉक चुनें। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन सतर्क रहें।

Thursday, September 25, 2025

अमेरिका ने सौर आयात पर कथित शुल्क चोरी के लिए #वारी एनर्जीज़ की जांच शुरू की।एंटी-डंपिंग जांच के बीच #वारी पर अंतरिम उपाय लागू किए गए।US probes Waaree Energies for alleged duty evasion on solar imports.Interim measures imposed on Waaree amid anti-dumping investigations.

अमेरिका ने वारी एनर्जीज़ पर सौर आयात में कथित शुल्क चोरी के आरोपों की जांच शुरू की है। एंटी-डंपिंग जांच के बीच कंपनी पर अंतरिम उपाय लागू किए गए हैं। यह मामला अमेरिकी सौर उद्योग की चिंताओं को उजागर करता है, जहां घरेलू निर्माता विदेशी आयात को अपनी बाजार हिस्सेदारी छीनने का दोषी ठहराते हैं।विस्तार से, अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) ने वारी एनर्जीज़ लिमिटेड और इसके अमेरिकी उपक्रम वारी सोलर अमेरिकास इंक. पर जांच का शुभारंभ किया है। आरोप है कि कंपनी ने चीन और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (जैसे इंडोनेशिया, लाओस) से आयातित सौर सेल्स और मॉड्यूल्स पर लगे एंटी-डंपिंग तथा काउंटरवेलिंग ड्यूटीज (एडी/सीवीडी) से बचने के लिए उत्पादों को गलत लेबलिंग किया। विशेष रूप से, चीनी मूल के सौर सेल्स को 'मेड इन इंडिया' बताकर अमेरिका में आयात किया गया, जिससे टैरिफ से बचा जा सका। सीबीपी ने एक मेमो में 'उचित संदेह' का हवाला देते हुए अंतरिम उपाय लागू किए हैं, जो आयातित माल की जांच, जब्ती या बंधक बनाने जैसे कदम शामिल कर सकते हैं।यह जांच अमेरिकन अलायंस फॉर सोलर मैन्युफैक्चरिंग ट्रेड कमिटी (एएएसएमटीसी) की शिकायत पर आधारित है, जिसमें फर्स्ट सोलर, हान्वा क्यू सेल्स यूएसए और मिशन सोलर एनर्जी जैसे घरेलू उत्पादक शामिल हैं। कमिटी के वकील टिम ब्राइटबिल ने कहा, "भारतीय सौर उत्पाद बाजार में सबसे सस्ते रहे हैं, क्योंकि वे चीनी सेल्स का उपयोग कर ड्यूटी चुकाए बिना बेचे जा रहे थे।" एएएसएमटीसी ने इस साल की शुरुआत में ही वाणिज्य विभाग से भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात पर एडी/सीवीडी टैरिफ लगाने की मांग की थी। अगस्त 2025 में यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन (आईटीसी) ने प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया कि इन देशों के आयात से अमेरिकी क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टेइक (सीएसपीवी) सेल्स और मॉड्यूल्स उद्योग को 'मटेरियल इंजरी' हो रही है। वाणिज्य विभाग ने डंपिंग मार्जिन 123% और सब्सिडी रेट 2% का अनुमान लगाया है। अंतिम निर्णय 2026 की दूसरी तिमाही तक अपेक्षित है।वारी एनर्जीज़, भारत की सबसे बड़ी सौर पैनल निर्माता कंपनी, ने 2024 में आईपीओ के बाद शेयर मूल्य दोगुना से अधिक बढ़ा लिया था। कंपनी अमेरिकी बाजार में मजबूत उपस्थिति रखती है और 2025 के अंत तक अपनी यूएस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 3.2 गीगावाट तक दोगुना करने की योजना बना रही है। हालांकि, जांच की खबर से 26 सितंबर 2025 को इसके शेयर 5% गिरकर 3,276 रुपये पर बंद हुए। कंपनी ने टिप्पणी करने से इंकार किया, लेकिन जुलाई 2025 में कहा था कि एंटी-डंपिंग जांच उसके यूएस निर्यात को प्रभावित नहीं करेगी।यह घटना वैश्विक सौर व्यापार में तनाव को दर्शाती है। अमेरिका ने वर्षों से चीन पर भारी टैरिफ लगाए हैं (271% तक), जो दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए रूट डायवर्ट हो रहे हैं। भारत जैसे देशों पर अब फोकस है, जहां सरकार सौर विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है। एडी/सीवीडी जांच से भारतीय निर्यातक प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन वारी जैसी कंपनियां स्थानीय उत्पादन बढ़ाकर जोखिम कम कर रही हैं। कुल मिलाकर, यह अमेरिकी सौर उद्योग की सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जो डेटा सेंटर, रीशोरिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन से प्रेरित मांग को संतुलित करने का प्रयास है।

Wednesday, September 24, 2025

प्रोसस रैपिडो/#Rapido में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जिससे उसकी हिस्सेदारी 15% हो जाएगी, स्विगी/#Swiggy के 12% हिस्सेदारी से बाहर निकलने के बाद।#Prosus to invest Rs 3,000 Cr in #Rapido, increasing stake to 15%, post #Swiggy's 12% stake exit

प्रोसस, एक बड़ा निवेशक समूह, रैपिडो में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। रैपिडो एक ऑनलाइन टैक्सी और बाइक सेवा कंपनी है। इस निवेश के बाद प्रोसस की रैपिडो में हिस्सेदारी 15% हो जाएगी। पहले, स्विगी, जो एक फूड डिलीवरी कंपनी है, के पास रैपिडो में 12% हिस्सेदारी थी, लेकिन अब स्विगी ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी है। यह निवेश रैपिडो को और मजबूत करेगा, जिससे कंपनी अपनी सेवाओं को बेहतर कर सकेगी, जैसे कि अधिक शहरों में विस्तार, बेहतर तकनीक और ग्राहकों के लिए नई सुविधाएँ। प्रोसस का यह कदम दिखाता है कि वह रैपिडो के भविष्य में बहुत विश्वास रखता है। यह निवेश भारत के ऑनलाइन परिवहन क्षेत्र के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।

Tuesday, September 23, 2025

#Swiggy रैपिडो में अपनी हिस्सेदारी 2,400 करोड़ में दो अलग-अलग सौदों के माध्यम से बेचने की योजना बना रही है।#Swiggy to Sell Rapido Stake.#Swiggy plans to divest its Rapido stake for 2,400 crore through two separate deals.

स्विगी रैपिडो में अपनी पूरी हिस्सेदारी 2,400 करोड़ रुपये में बेचने की योजना बना रही हैफूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी लिमिटेड ने अपनी बाइक टैक्सी कंपनी रैपिडो (रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) में 12% हिस्सेदारी को दो अलग-अलग सौदों के माध्यम से बेचने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने 23 सितंबर 2025 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह सौदा कुल 2,399 करोड़ रुपये का है, जो रैपिडो की वैल्यूएशन को 20,330 करोड़ रुपये (लगभग 2.3 अरब डॉलर) तक पहुंचा देता है। यह वैल्यूएशन 2024 के उसके आखिरी फंडिंग राउंड के 1.1 अरब डॉलर से दोगुनी से अधिक है।पहला सौदा प्रोसस ग्रुप की डच सब्सिडियरी एमआईएच इन्वेस्टमेंट्स वन बीवी के साथ है, जो स्विगी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर (23.31% हिस्सा) हैं। स्विगी 10 इक्विटी शेयर और 1,63,990 सीरीज डी अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रेफरेंस शेयर (सीसीपीएस) को 1,968 करोड़ रुपये में बेचेगी। यह एक संबंधित पक्ष का लेन-देन है। दूसरा सौदा वेस्टब्रिज कैपिटल एलएलसी के सेटू एआईएफ ट्रस्ट (एसईबीआई-पंजीकृत फंड) के साथ है, जिसमें 35,958 सीरीज डी सीसीपीएस को 431.5 करोड़ रुपये में हस्तांतरित किया जाएगा।यह कदम रैपिडो के फूड डिलीवरी सेगमेंट में प्रवेश के कारण उठाया गया है, जो स्विगी के कोर बिजनेस के लिए संघर्ष पैदा कर रहा था। रैपिडो ने हाल ही में 'ओनली' ऐप लॉन्च किया है, जो बैंगलोर में सक्रिय है और जीरो-कमीशन मॉडल पर काम करता है। यह जोमैटो-स्विगी डुओपॉली को चुनौती दे रहा है। जुलाई 2025 में स्विगी ने कहा था कि वह रैपिडो निवेश का पुनर्मूल्यांकन कर रही है, क्योंकि रैपिडो के फूड डिलीवरी प्लान से टकराव हो सकता है।स्विगी ने 2022 में रैपिडो के 180 मिलियन डॉलर फंडिंग राउंड का नेतृत्व किया था, जिसमें उसने लगभग 120 मिलियन डॉलर निवेश किया। अब यह सौदा 2.5 गुना रिटर्न देगा, जो तीन साल से कम समय में मिला। स्विगी के सीईओ हर्षा माजेटी ने कहा, "यह टकराव हमें अलग होने के लिए मजबूर कर रहा है।"यह फंडिंग स्विगी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्विक कॉमर्स में ब्लिंकिट, जेप्टो और रैपिडो से तीव्र प्रतिस्पर्धा है। जून 2025 तिमाही में स्विगी का नुकसान 611 करोड़ से बढ़कर 1,197 करोड़ रुपये हो गया, हालांकि राजस्व 54% बढ़कर 4,961 करोड़ रुपये पहुंचा। नकदी भंडार 5,354 करोड़ रुपये था, जो अब 2,400 करोड़ बढ़कर 7,754 करोड़ हो जाएगा। इसके अलावा, स्विगी ने इंस्टामार्ट को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी में स्थानांतरित करने की भी मंजूरी दी, जो ग्रोथ के लिए रिस्ट्रक्चरिंग है।यह सौदा स्विगी को फोकस्ड रिसोर्सेस और मजबूत बैलेंस शीट देगा, जबकि रैपिडो अपनी मॉबिलिटी और डिलीवरी महत्वाकांक्षाओं पर जोर दे सकेगा।

Monday, September 22, 2025

#Infosys ने हानेसब्रांड्स के साथ 10 साल का आईटी अनुबंध किया, जिसमें एआई-संचालित दक्षता और आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है।#Infosys Secures 10-Year Deal.#Infosys signs a 10-year IT deal with HanesBrands, emphasizing Al-driven efficiency and modernization.

#Infosys/इंफोसिस, एक प्रमुख भारतीय आईटी कंपनी, ने हानेसब्रांड्स के साथ 10 साल का एक बड़ा अनुबंध किया है। हानेसब्रांड्स एक प्रसिद्ध अमेरिकी कंपनी है, जो कपड़े और अंडरगारमेंट्स बनाती है। इस सौदे का मुख्य उद्देश्य हानेसब्रांड्स के व्यवसाय को तकनीक के माध्यम से और अधिक कुशल और आधुनिक बनाना है। इस अनुबंध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो काम को तेज, स्मार्ट और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।इस सौदे के तहत, इंफोसिस हानेसब्रांड्स को तकनीकी समाधान प्रदान करेगा, जैसे डेटा प्रबंधन, प्रक्रिया स्वचालन और डिजिटल सेवाएं। यह कंपनी को अपने ग्राहकों के लिए बेहतर उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने में मदद करेगा। एआई तकनीक का उपयोग करके, इंफोसिस हानेसब्रांड्स के कामकाज को और सरल बनाएगा, जिससे समय और लागत की बचत होगी। साथ ही, यह उनके व्यवसाय को और अधिक नवीन और प्रतिस्पर्धी बनाएगा।यह अनुबंध इंफोसिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह दर्शाता है कि कंपनी वैश्विक स्तर पर कितनी विश्वसनीय है। हानेसब्रांड्स जैसे बड़े ब्रांड के साथ काम करने से इंफोसिस की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी। यह सौदा दोनों कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि यह तकनीकी नवाचार और व्यवसाय वृद्धि को बढ़ावा देगा।इसके अलावा, यह सौदा भारत की आईटी इंडस्ट्री के लिए भी गर्व की बात है। इंफोसिस जैसे भारतीय ब्रांड वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर दुनिया भर में तकनीकी क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं। अगले 10 सालों में, यह अनुबंध हानेसब्रांड्स को डिजिटल युग में आगे बढ़ने में मदद करेगा और इंफोसिस को अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को और साबित करने का मौका देगा।

Sunday, September 21, 2025

#Swiggy के शेयरों में शुक्रवार को उछाल, मजबूत क्विक-कॉमर्स प्रदर्शन के कारण।#Swiggy Shares Surge on Friday, Driven by Strong Quick-Commerce Performance.

शुक्रवार को स्विगी लिमिटेड के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई, जो कंपनी के क्विक-कॉमर्स सेगमेंट की मजबूत वृद्धि से प्रेरित थी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर शेयरों में करीब 12 प्रतिशत की छलांग लगी, जिससे कंपनी का मूल्यांकन और मजबूत हुआ। यह उछाल क्वार्टरली रिजल्ट्स के सकारात्मक संकेतों और इंस्टामार्ट जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की 'विस्फोटक वृद्धि' पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।स्विगी, जो भारत की तेजी से बढ़ती फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स मार्केट में प्रमुख खिलाड़ी है, ने हाल के महीनों में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। क्विक-कॉमर्स सेक्टर, जहां 10 मिनट के अंदर सामान डिलीवरी होती है, ने राष्ट्रीय स्तर पर सालाना बिक्री 60 अरब डॉलर को पार कर लिया है। स्विगी का इंस्टामार्ट इस सेगमेंट में लगभग 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखता है, जो प्रतिद्वंद्वी जोमैटो के ब्लिंकिट (40 प्रतिशत) से थोड़ा पीछे है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, स्विगी के क्विक-कॉमर्स ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (जीओवी) में दोगुनी वृद्धि हुई है, जबकि कुल नुकसान 2024 में 30 प्रतिशत घटकर 182 मिलियन डॉलर रह गया।यह प्रदर्शन कंपनी की रणनीतिक पहलों का नतीजा है। स्विगी ने पिछले क्वार्टर में 316 नए डार्क स्टोर्स जोड़े, जो पिछले आठ क्वार्टर्स से अधिक है। इनमें से 33 प्रतिशत 80 नए शहरों में स्थापित किए गए, जो मेट्रो और टियर-1 शहरों के अलावा छोटे बाजारों में विस्तार दर्शाता है। सीईओ श्रीहर्षा मजेटी ने कहा कि कंपनी 'सुपर एजाइल' बनी हुई है, खासकर रैपिडो जैसे नए प्रवेशियों के बीच। इसके अलावा, विज्ञापन राजस्व में 220 प्रतिशत की उछाल ने लाभप्रदता की राह प्रशस्त की है, जहां ब्रांड्स इन प्लेटफॉर्म्स पर इंपल्स बायर्स को टारगेट कर रहे हैं।हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। एंटीट्रस्ट जांच और प्रीडेटरी प्राइसिंग के आरोपों के बीच, स्विगी को जोमैटो (अब ईटरनल) से कड़ी टक्कर मिल रही है। ईटरनल के क्यू1 रिजल्ट्स ने पूरे सेक्टर को बूस्ट दिया, जहां रेवेन्यू 70 प्रतिशत बढ़ा। फिर भी, निवेशक आशावादी हैं, क्योंकि स्विगी का मूल्यांकन जोमैटो से कम है और क्यू4 एफवाई25 रिजल्ट्स में और सुधार की उम्मीद है।कुल मिलाकर, यह सर्ज क्विक-कॉमर्स की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल शॉपर्स की लहर को रेखांकित करता है। भारत में सुविधा की मांग छोटे शहरों तक फैल रही है, जो स्विगी जैसे प्लेयर्स के लिए अवसर पैदा कर रही है। लंबी अवधि में, बेहतर एक्जीक्यूशन से तेज वृद्धि और लाभप्रदता संभव है, लेकिन बाजार अस्थिरता और प्रतिस्पर्धा पर नजर रखनी होगी।

Saturday, September 20, 2025

युवा गतिशील: कैसे #NaMoYuvaRun75 नशा-मुक्त भारत की ओर दौड़ रहा है / Youth on the Move: How #NaMoYuvaRun75 is Racing Towards a Drug-Free India


भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के अवसर पर शुरू हुए 'नमो युवा रन 75' अभियान ने पूरे देश को एक नई ऊर्जा से भर दिया है। यह मात्र एक मैराथन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है, जो युवाओं को फिटनेस, नशा मुक्ति और आत्मनिर्भर भारत के संदेश के साथ जोड़ रही है। 21 सितंबर 2025 को देशभर के 75 स्थानों पर एक साथ आयोजित इस दौड़ ने लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। श्रीनगर की वादियों से लेकर उज्जैन की पावन धरती तक, हर कोने से उत्साह की लहरें उठीं।यह अभियान सेवा पखवाड़ा का हिस्सा है, जो पीएम मोदी के जन्मदिन से अगले 15 दिनों तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य 'नशा मुक्त भारत' (नशा मुक्त भारत) का सपना साकार करना है। नशे की लत ने लाखों युवाओं की जिंदगियां बर्बाद की हैं, लेकिन #NaMoYuvaRun75 युवाओं को 'नो टू ड्रग्स, यस टू फिटनेस' का मंत्र दे रहा है। दौड़ के दौरान प्रतिभागी 'फिट इंडिया' और 'स्वच्छ भारत' के नारों के साथ दौड़े, जो स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हैं। भाजपा युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) द्वारा संचालित यह कार्यक्रम पीएम की दृष्टि का प्रतीक है, जो युवाओं को सेवा, एकता और राष्ट्र निर्माण की ओर प्रेरित करता है।देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित इस इवेंट ने अभूतपूर्व भागीदारी दर्ज की। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर की सड़कें युवाओं के जोश से गूंज उठीं, जहां हजारों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में दौड़ को हरी झंडी दिखाई, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्थानीय नेता सक्रिय रहे। गुजरात में डीडी न्यूज के अनुसार, बड़ी संख्या में युवाओं ने व्यसन मुक्ति के संदेश के साथ दौड़ लगाई। यह दौड़ 5 किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर तक की थी, जिसमें महिलाएं, छात्र और सामान्य नागरिक शामिल हुए। सोशल मीडिया पर #NaMoYuvaRun75 ट्रेंड कर रहा है, जहां युवा अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं।इस अभियान का प्रभाव दीर्घकालिक है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, बल्कि मानसिक मजबूती भी प्रदान करता है। पीएम मोदी ने अतीत में कहा था कि युवा भारत के भविष्य हैं, और यह रन उसी दर्शन का जीवंत उदाहरण है। नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के साथ-साथ, यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा को भी जोड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन नशे की समस्या को 20-30 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।अंत में, #NaMoYuvaRun75 साबित करता है कि युवा शक्ति के साथ भारत नशा-मुक्त, स्वस्थ और मजबूत बनेगा। पीएम मोदी का यह विजन हर कदम पर प्रगति का प्रतीक है। जय हिंद! जय भारत!

ट्रम्प ने एच-1बी वीजा के लिए $100,000 वार्षिक शुल्क लगाने वाला कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किय / Trump Signs Executive Order Imposing $100,000 Annual H-1B Visa Fee


19 सितंबर, 2025 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश (एक्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए प्रतिवर्ष 100,000 डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) का नया शुल्क लगाया गया है। यह कदम अमेरिकी आप्रवासन नीति में एक बड़ा बदलाव है, जो मुख्य रूप से उच्च कुशल विदेशी श्रमिकों को लक्षित करता है। एच-1बी वीजा कार्यक्रम, जो विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों जैसे आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और शिक्षा में विदेशी पेशेवरों को तीन से छह वर्ष के लिए अमेरिका लाने की अनुमति देता है, अब कंपनियों के लिए काफी महंगा हो गया है। इस आदेश का उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों की रक्षा करना और वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकना बताया जा रहा है।एच-1बी वीजा कार्यक्रम की पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है। यह कार्यक्रम 1990 के आप्रवासन अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था, जो अमेरिकी कंपनियों को ऐसे विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त करने की अनुमति देता है जिन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न हो। प्रति वर्ष 85,000 वीजा जारी किए जाते हैं—65,000 सामान्य और 20,000 अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए। लॉटरी सिस्टम के माध्यम से चयन होता है, और वर्तमान में आवेदन शुल्क कुछ हजार डॉलर तक सीमित है। लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कार्यक्रम अमेरिकी श्रमिकों के लिए खतरा बन गया है। व्हाइट हाउस के फैक्ट शीट के अनुसार, 2025 के वित्तीय वर्ष में एक कंपनी को 5,189 एच-1बी वीजा स्वीकृत हुए, जबकि उसी दौरान 16,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की गई। इसी तरह, दूसरी कंपनी ने 1,698 वीजा प्राप्त किए लेकिन 2,400 अमेरिकी नौकरियों समाप्त कीं। ट्रंप ने कहा, "यह कार्यक्रम अमेरिकी श्रमिकों को विस्थापित कर रहा है, और हम इसे रोकेंगे।"इस आदेश के तहत, कंपनियों को प्रत्येक एच-1बी वीजा के लिए वार्षिक 100,000 डॉलर का शुल्क देना होगा, जो वीजा की अवधि (तीन वर्ष) में कुल 300,000 डॉलर तक पहुंच सकता है। वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने संवाददाताओं को बताया कि यह शुल्क "वीजा दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी खजाने में 100 अरब डॉलर से अधिक राजस्व जुटाने" के लिए है। ट्रंप ने दावा किया कि इस राशि से करों में कटौती और कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। साथ ही, उन्होंने एक और आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत "ट्रंप गोल्ड कार्ड" नामक नया वीजा कार्यक्रम शुरू किया गया। इसमें धनी विदेशी व्यक्ति 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.4 करोड़ रुपये) देकर अमेरिकी वीजा प्राप्त कर सकते हैं, जबकि नियोक्ता 2 मिलियन डॉलर देकर प्रायोजन कर सकते हैं। एक "प्लेटिनम कार्ड" की भी योजना है, जो 5 मिलियन डॉलर में 270 दिनों की अमेरिकी यात्रा की अनुमति देगा, बिना अमेरिकी आय पर कर के।यह कदम अमेरिकी टेक उद्योग के लिए बड़ा झटका है, जो एच-1बी पर भारी निर्भर है। 2025 की पहली छमाही में अमेज़न को 12,000 से अधिक, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा को 5,000 से अधिक वीजा स्वीकृत हुए। लगभग दो-तिहाई एच-1बी नौकरियां कंप्यूटर से संबंधित हैं, और भारत व चीन से आने वाले पेशेवरों की संख्या सबसे अधिक है। भारतीय मूल की टेक कंपनियां कुल वीजों का एक-पांचवां हिस्सा प्राप्त करती हैं। द हिंदू के अनुसार, यह भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करेगा, जो पहले से ही ग्रीन कार्ड के लिए दशकों इंतजार कर रहे हैं। कंपनियां अब शुल्क वहन करने में असमर्थ हो सकती हैं, जिससे वीजा नवीकरण प्रभावित होगा।प्रतिक्रियाएं तीखी हैं। टेक लॉबी और आप्रवासन विशेषज्ञों ने प्रशासन की वैधानिक शक्तियों पर सवाल उठाए हैं। वर्तमान कानून केवल प्रोसेसिंग लागत वसूलने की अनुमति देता है, न कि इतना अधिक शुल्क। गार्जियन और रॉयटर्स के अनुसार, यह अमेरिकी नवाचार को नुकसान पहुंचा सकता है। ट्रंप समर्थक इसे "अमेरिका फर्स्ट" नीति का हिस्सा मानते हैं, जो मजदूरी दबाने और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करता है। कानूनी चुनौतियां अपेक्षित हैं, लेकिन ट्रंप ने कहा, "टेक कंपनियां खुश होंगी।"कुल मिलाकर, यह आदेश आप्रवासन बहस को नई ऊंचाई देगा। वैश्विक प्रतिभा प्रवाह बाधित हो सकता है, जबकि धनी निवेशकों के लिए रास्ता आसान।