अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया घोषणा ने वैश्विक फार्मा उद्योग में हलचल मचा दी है। 25 सितंबर 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड या पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल उत्पादों के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जब तक कि कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का निर्माण न शुरू कर दें। "ब्रेकिंग ग्राउंड" या "अंडर कंस्ट्रक्शन" वाली कंपनियां इससे मुक्त रहेंगी। यह कदम अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नौकरियां बढ़ाने का प्रयास है, लेकिन भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।भारतीय फार्मा शेयरों पर इसका तत्काल असर पड़ा। 26 सितंबर को निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.5 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 2.14 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, बायोकॉन, नाटको फार्मा और लॉरस लैब्स जैसे शेयरों में 3-8 प्रतिशत की गिरावट आई। लॉरस लैब्स का शेयर इंट्राडे 8.2 प्रतिशत गिरकर 823.1 रुपये पर पहुंच गया, जो 30-दिन के औसत वॉल्यूम का तीन गुना ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्शाता है। अन्य कंपनियां जैसे जायडस लाइफ, ग्लेनमार्क और आईपीसीए लैब्स भी 2-4 प्रतिशत नीचे रहीं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बाजार पर निर्भरता वाली कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, जहां भारत से सालाना 3.6 अरब डॉलर का फार्मा निर्यात होता है।इस बीच, लॉरस लैब्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रभाव को न्यूनतम बताते हुए निवेशकों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि कंपनी का अमेरिकी बाजार में सीमित एक्सपोजर है, खासकर ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाओं के मामले में। लॉरस लैब्स की कुल राजस्व का लगभग 40 प्रतिशत एंटीरेट्रोवायरल (एआरवी) दवाओं से आता है, जो एचआईवी उपचार के लिए जेनेरिक हैं और टैरिफ से अछूती रहेंगी। कंपनी का फोकस जेनेरिक्स, एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) और सीडीएमओ (कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन) पर है, जहां अमेरिकी निर्यात कुल का मात्र 20-25 प्रतिशत है। "हमारे पास पेटेंटेड ड्रग्स का कोई बड़ा हिस्सा नहीं है, इसलिए यह टैरिफ हमारे संचालन को प्रभावित नहीं करेगा," अधिकारी ने कहा। इसके अलावा, कंपनी यूरोप और अन्य बाजारों पर निर्भर है, जो इस नीति से सुरक्षित हैं।विश्लेषकों ने भी लॉरस पर सकारात्मक राय दी है। ब्लूमबर्ग डेटा के अनुसार, 16 विश्लेषकों में से सात 'बाय', तीन 'होल्ड' और छह 'सेल' रेटिंग दे चुके हैं, जबकि औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस 5 प्रतिशत ऊपर का संकेत देता है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की मैत्री शेठ ने कहा, "टैरिफ मुख्य रूप से ब्रांडेड दवाओं पर लक्षित है, लेकिन कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स पर अस्पष्टता बनी हुई है। फिर भी, अमेरिका में प्लांट निर्माण वाली कंपनियां इससे बच सकती हैं।" लॉरस ने हाल ही में अमेरिकी विस्तार की योजना बनाई है, जो भविष्य में राहत देगी।कुल मिलाकर, ट्रंप का यह फैसला छोटे स्तर पर असर डालेगा, लेकिन जेनेरिक-केंद्रित भारतीय कंपनियां जैसे लॉरस लैब्स मजबूत स्थिति में हैं। कंपनी का फोकस नवाचार और विविधीकरण पर है, जो लंबे समय में लाभकारी साबित होगा। निवेशक सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं—यह अस्थायी उतार-चढ़ाव है।
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