भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 7.8% की दर से बढ़ा, जो सभी अनुमानों को पार कर गया। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, वास्तविक जीडीपी 47.89 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 44.42 लाख करोड़ रुपये थी। नाममात्र जीडीपी 8.8% की वृद्धि के साथ 86.05 लाख करोड़ रुपये रही। सेवा क्षेत्र में 9.3% की मजबूत वृद्धि, विनिर्माण (7.7%) और निर्माण (7.6%) ने इस विकास को बढ़ावा दिया। हालांकि, खनन (-3.1%) और बिजली, गैस, जल आपूर्ति (0.5%) में कमजोर प्रदर्शन रहा। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) 9.7% बढ़ा, जबकि निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) 7.0% रहा।
इतिहास: भारत की जीडीपी वृद्धि ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। 2023-24 में 9.2% की वृद्धि के बाद, 2024-25 में यह 6.5% रही। मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत सुधारों और निवेश ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाया।
वर्तमान: Q1 FY 2025-26 की 7.8% वृद्धि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक लचीलापन को दर्शाती है। सेवा क्षेत्र और निवेश (जीएफसीएफ 7.8%) ने प्रमुख योगदान दिया। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ जैसे वैश्विक जोखिम चुनौतियां पेश कर सकते हैं।
भविष्य: भारतीय रिजर्व बैंक ने 2025-26 के लिए 6.5% वृद्धि का अनुमान लगाया है, जिसमें Q2 में 6.7%, Q3 में 6.6% और Q4 में 6.3% शामिल है। आईएमएफ के अनुसार, भारत 2025 के अंत तक चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़ सकता है। नीतिगत सुधार, बुनियादी ढांचा निवेश और निजी खपत से विकास को बढ़ावा मिलेगा।