पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ ने राज्य के लगभग 1900 गाँवों को प्रभावित किया है और 43 से अधिक लोगों की जान चली गई है। इस आपदा में लगभग 4 लाख एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसान और ग्रामीण जनता काफी प्रभावित हुई है। भारी बारिश, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से आया अतिरिक्त पानी, और विभिन्न बाँधों से पानी छोड़े जाने के कारण, पंजाब में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जो कई दशकों में सबसे खराब है।
सेना की राहत और बचाव कार्य
भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन राहत’ नामक अभियान के तहत राहत और पुनर्स्थापना कार्य तेज़ कर दिए हैं। सेना की पश्चिमी कमान ने अब तक 82 HADR मिशन किए हैं, जिसमें 59 आर्मी कॉलम और 17 इंजीनियर टास्क फोर्स तैनात की गई हैं। सेना के जवानों ने 6,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है और 13,000 से अधिक लोगों को चिकित्सा सहायता दी है। हेलीकॉप्टरों का उपयोग करते हुए, ज़रूरी दवाइयां, पानी, और 48 टन राशन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचाया गया है।
राहत कार्यों का विस्तृत विवरण
सेना प्रशासन ने स्थानीय संगठनों जैसे NDRF और SDRF के साथ मिलकर लोगों के लिए भोजन, पानी, और मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाई। सैनिकों ने रात-दिन काम करके बाँधों को मजबूत किया, टूटे पुलों की मरम्मत की, और प्रमुख सड़कों की बहाली की। प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था को बहाल करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई।
चुनौतियाँ और सरकार का सहयोग
कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका पर बुरी तरह असर पड़ा है। राज्य सरकार ने केंद्र से तुरंत राहत और वित्तीय सहायता की माँग की है। जिले के प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार जागरूक कर रहे हैं। एपेक्स प्रशासन बाढ़ नियंत्रण और जल स्तर निगरानी केंद्र बनाए गए हैं, ताकि बाढ़ की स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
इस बाढ़ और राहत कार्यों में सेना की तत्परता, संगठन और समर्पण ने हज़ारों लोगों की जान बचाने और हालात सामान्य करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है