अमेरिका ने वारी एनर्जीज़ पर सौर आयात में कथित शुल्क चोरी के आरोपों की जांच शुरू की है। एंटी-डंपिंग जांच के बीच कंपनी पर अंतरिम उपाय लागू किए गए हैं। यह मामला अमेरिकी सौर उद्योग की चिंताओं को उजागर करता है, जहां घरेलू निर्माता विदेशी आयात को अपनी बाजार हिस्सेदारी छीनने का दोषी ठहराते हैं।विस्तार से, अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) ने वारी एनर्जीज़ लिमिटेड और इसके अमेरिकी उपक्रम वारी सोलर अमेरिकास इंक. पर जांच का शुभारंभ किया है। आरोप है कि कंपनी ने चीन और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (जैसे इंडोनेशिया, लाओस) से आयातित सौर सेल्स और मॉड्यूल्स पर लगे एंटी-डंपिंग तथा काउंटरवेलिंग ड्यूटीज (एडी/सीवीडी) से बचने के लिए उत्पादों को गलत लेबलिंग किया। विशेष रूप से, चीनी मूल के सौर सेल्स को 'मेड इन इंडिया' बताकर अमेरिका में आयात किया गया, जिससे टैरिफ से बचा जा सका। सीबीपी ने एक मेमो में 'उचित संदेह' का हवाला देते हुए अंतरिम उपाय लागू किए हैं, जो आयातित माल की जांच, जब्ती या बंधक बनाने जैसे कदम शामिल कर सकते हैं।यह जांच अमेरिकन अलायंस फॉर सोलर मैन्युफैक्चरिंग ट्रेड कमिटी (एएएसएमटीसी) की शिकायत पर आधारित है, जिसमें फर्स्ट सोलर, हान्वा क्यू सेल्स यूएसए और मिशन सोलर एनर्जी जैसे घरेलू उत्पादक शामिल हैं। कमिटी के वकील टिम ब्राइटबिल ने कहा, "भारतीय सौर उत्पाद बाजार में सबसे सस्ते रहे हैं, क्योंकि वे चीनी सेल्स का उपयोग कर ड्यूटी चुकाए बिना बेचे जा रहे थे।" एएएसएमटीसी ने इस साल की शुरुआत में ही वाणिज्य विभाग से भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात पर एडी/सीवीडी टैरिफ लगाने की मांग की थी। अगस्त 2025 में यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन (आईटीसी) ने प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया कि इन देशों के आयात से अमेरिकी क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टेइक (सीएसपीवी) सेल्स और मॉड्यूल्स उद्योग को 'मटेरियल इंजरी' हो रही है। वाणिज्य विभाग ने डंपिंग मार्जिन 123% और सब्सिडी रेट 2% का अनुमान लगाया है। अंतिम निर्णय 2026 की दूसरी तिमाही तक अपेक्षित है।वारी एनर्जीज़, भारत की सबसे बड़ी सौर पैनल निर्माता कंपनी, ने 2024 में आईपीओ के बाद शेयर मूल्य दोगुना से अधिक बढ़ा लिया था। कंपनी अमेरिकी बाजार में मजबूत उपस्थिति रखती है और 2025 के अंत तक अपनी यूएस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 3.2 गीगावाट तक दोगुना करने की योजना बना रही है। हालांकि, जांच की खबर से 26 सितंबर 2025 को इसके शेयर 5% गिरकर 3,276 रुपये पर बंद हुए। कंपनी ने टिप्पणी करने से इंकार किया, लेकिन जुलाई 2025 में कहा था कि एंटी-डंपिंग जांच उसके यूएस निर्यात को प्रभावित नहीं करेगी।यह घटना वैश्विक सौर व्यापार में तनाव को दर्शाती है। अमेरिका ने वर्षों से चीन पर भारी टैरिफ लगाए हैं (271% तक), जो दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए रूट डायवर्ट हो रहे हैं। भारत जैसे देशों पर अब फोकस है, जहां सरकार सौर विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है। एडी/सीवीडी जांच से भारतीय निर्यातक प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन वारी जैसी कंपनियां स्थानीय उत्पादन बढ़ाकर जोखिम कम कर रही हैं। कुल मिलाकर, यह अमेरिकी सौर उद्योग की सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जो डेटा सेंटर, रीशोरिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन से प्रेरित मांग को संतुलित करने का प्रयास है।
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