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Friday, September 12, 2025

कैश बनाम फ्यूचर्स बनाम ऑप्शंस / Cash vs Futures vs Options


वित्तीय बाजारों में निवेश के तीन प्रमुख तरीके हैं: कैश मार्केट (नकद बाजार), फ्यूचर्स (भविष्य अनुबंध) और ऑप्शंस (विकल्प अनुबंध)। ये सभी अंतर्निहित संपत्तियों जैसे स्टॉक, कमोडिटी, करेंसी या इंडेक्स पर आधारित होते हैं, लेकिन इनकी संरचना, जोखिम, लाभ और उपयोग अलग-अलग हैं। कैश मार्केट सबसे सरल और पारंपरिक है, जहां तत्काल खरीद-बिक्री होती है। वहीं, फ्यूचर्स और ऑप्शंस डेरिवेटिव उत्पाद हैं, जो भविष्य की कीमतों पर सट्टा लगाने या जोखिम हेज करने के लिए उपयोगी हैं।कैश मार्केट में निवेशक सीधे संपत्ति खरीदते हैं और तुरंत स्वामित्व प्राप्त करते हैं। यह लंबी अवधि के निवेश के लिए आदर्श है, लेकिन पूंजी की आवश्यकता अधिक होती है। फ्यूचर्स अनुबंध में दोनों पक्ष बाध्य होते हैं कि वे भविष्य की निश्चित तारीख पर निश्चित मूल्य पर संपत्ति खरीदें या बेचें। यह लीवरेज प्रदान करता है, यानी कम पूंजी से बड़ा व्यापार, लेकिन जोखिम भी अधिक है। ऑप्शंस में खरीदार को केवल अधिकार मिलता है (बाध्यता नहीं), इसलिए जोखिम सीमित रहता है, लेकिन प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है।भारतीय बाजार में, एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) और बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) पर ये सभी ट्रेड होते हैं। 2025 तक, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ा है, खासकर रिटेल निवेशकों में। यह लेख सरल भाषा में इनकी तुलना, कार्यप्रणाली, लाभ-जोखिम और उदाहरण देगा, ताकि शुरुआती निवेशक आसानी से समझ सकें। निवेश से पहले हमेशा जोखिम मूल्यांकन करें और सलाह लें। 

कैश मार्केट: मूल बातें (लगभग 400 शब्द)कैश मार्केट, जिसे स्पॉट मार्केट या नकद बाजार भी कहते हैं, वह स्थान है जहां संपत्ति की खरीद-बिक्री तत्काल होती है। यहां कोई भविष्य का अनुबंध नहीं होता; सौदा होने पर ही भुगतान और हस्तांतरण होता है। भारत में, स्टॉक मार्केट का कैश सेगमेंट मुख्य रूप से इक्विटी शेयरों के लिए है, लेकिन कमोडिटी या करेंसी में भी लागू होता है।कार्यप्रणाली: जब आप एक स्टॉक खरीदते हैं, तो ट्रेड डे के बाद T+1 (अगले दिन) सेटलमेंट होता है। उदाहरण के लिए, यदि आप रिलायंस शेयर ₹2500 में खरीदते हैं, तो आपको पूरी राशि (₹2500 x लॉट साइज) चुकानी पड़ती है। कोई मार्जिन नहीं, पूर्ण भुगतान। ट्रेडिंग घंटे सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 तक। लाभ-हानि बाजार मूल्य के उतार-चढ़ाव पर निर्भर।लाभ:तत्काल स्वामित्व: आप संपत्ति के मालिक बन जाते हैं, डिविडेंड या वोटिंग राइट्स मिलते हैं।
कम जटिलता: कोई समाप्ति तिथि या लीवरेज नहीं, इसलिए शुरुआती के लिए आसान।
लंबी अवधि निवेश: कंपाउंडिंग का फायदा, जैसे म्यूचुअल फंड या डायरेक्ट स्टॉक होल्डिंग।
कम ब्रोकरेज: फ्यूचर्स/ऑप्शंस की तुलना में कम शुल्क।

जोखिम:पूंजी की अधिक आवश्यकता: छोटे निवेशक बड़े लॉट नहीं खरीद पाते।
बाजार उतार-चढ़ाव: शेयर गिरने पर नुकसान, लेकिन ऊपर जाने पर लाभ।
लिक्विडिटी रिस्क: कुछ स्टॉक कम ट्रेड होते हैं।

उदाहरण: मान लीजिए आप टाटा मोटर्स का शेयर ₹500 में 100 यूनिट खरीदते हैं (कुल ₹50,000)। यदि कीमत ₹600 हो जाती है, तो बेचकर ₹10,000 लाभ। यदि गिरकर ₹400, तो ₹10,000 नुकसान। कोई अतिरिक्त दायित्व नहीं।कैश मार्केट स्थिर निवेश के लिए बेस्ट है, लेकिन स्पेकुलेशन के लिए सीमित। 2025 में, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे ग्रो या जेरोधा ने इसे आसान बनाया है। 

फ्यूचर्स: मूल बातें (लगभग 500 शब्द)फ्यूचर्स एक डेरिवेटिव अनुबंध है, जो दो पक्षों के बीच समझौता है कि वे भविष्य की निश्चित तारीख (समाप्ति) पर निश्चित मूल्य (फ्यूचर्स प्राइस) पर संपत्ति खरीदेंगे या बेचेंगे। यह अनिवार्य है; दोनों पक्ष बाध्य हैं। भारत में, फ्यूचर्स स्टॉक, इंडेक्स (निफ्टी, बैंक निफ्टी), कमोडिटी (सोना, तेल) पर उपलब्ध हैं। लॉट साइज फिक्स्ड होता है, जैसे निफ्टी फ्यूचर्स में 25 यूनिट।कार्यप्रणाली: ट्रेडिंग कैश की तरह होती है, लेकिन सेटलमेंट मासिक (अंतिम गुरुवार)। मार्क-टू-मार्केट (MTM) डेली होता है, यानी रोजाना लाभ-हानि अकाउंट में एडजस्ट। मार्जिन केवल 10-20% लगता है (लीवरेज), लेकिन एक्सपोजर मार्जिन भी। यदि नुकसान, अतिरिक्त मार्जिन जमा करें, वरना पोजीशन स्क्वेयर ऑफ।लाभ:लीवरेज: कम पूंजी से बड़ा एक्सपोजर, जैसे ₹1 लाख मार्जिन से ₹10 लाख का ट्रेड।
हेजिंग: किसान फसल कीमत लॉक कर सकते हैं, या निवेशक पोर्टफोलियो प्रोटेक्ट।
सट्टेबाजी: बाजार दिशा पर दांव, उच्च रिटर्न संभावना।
लिक्विडिटी: उच्च वॉल्यूम, आसान एंट्री-एक्जिट।

जोखिम:असीमित नुकसान: बाजार उल्टा गया तो बड़ा लॉस, जैसे लीवरेज से 10 गुना नुकसान।
मार्जिन कॉल: अचानक मार्जिन बढ़ सकता है।
समाप्ति जोखिम: एक्सपायरी पर फोर्स्ड सेटलमेंट।
वोलैटिलिटी: 2025 में, महंगाई ने फ्यूचर्स को प्रभावित किया। 

उदाहरण: निफ्टी फ्यूचर्स ₹20,000 पर लॉट (25 यूनिट) खरीदते हैं, मार्जिन ₹50,000। यदि एक्सपायरी पर ₹20,500, तो लाभ ₹12,500 (500 x 25)। यदि ₹19,500, तो ₹12,500 नुकसान। हेजिंग में, यदि आपके पास निफ्टी स्टॉक हैं, फ्यूचर्स बेचकर गिरावट से बचाव।फ्यूचर्स अनुभवी ट्रेडर्स के लिए, उच्च रिस्क-रिवार्ड। SEBI नियमों से सुरक्षित, लेकिन 90% रिटेल ट्रेडर्स घाटा उठाते हैं। 

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ऑप्शंस: मूल बातें (लगभग 500 शब्द)ऑप्शंस भी डेरिवेटिव है, लेकिन खरीदार को केवल अधिकार मिलता है (बाध्यता नहीं) कि वह भविष्य में निश्चित मूल्य (स्ट्राइक प्राइस) पर संपत्ति खरीदे (कॉल ऑप्शन) या बेचे (पुट ऑप्शन)। विक्रेता को प्रीमियम मिलता है, लेकिन बाध्य होता है। प्रकार: यूरोपियन (केवल एक्सपायरी पर एक्सरसाइज) और अमेरिकन (कभी भी)। भारत में इंडेक्स ऑप्शंस यूरोपियन हैं।कार्यप्रणाली: प्रीमियम (ऑप्शन वैल्यू) चुकाकर खरीदें। ITM (इन द मनी), ATM (अट द मनी), OTM (आउट ऑफ द मनी) के आधार पर प्रीमियम बदलता। एक्सपायरी पर, यदि फायदेमंद तो एक्सरसाइज, वरना व्यर्थ। ग्रीक्स (डेल्टा, गामा, थीटा) मूल्य प्रभावित करते।लाभ:सीमित जोखिम: खरीदार का अधिकतम नुकसान प्रीमियम तक।
लचीलापन: हेजिंग, इनकम जेनरेशन (प्रीमियम सेलिंग) या लीवरेज।
उच्च लाभ: कम पूंजी से बड़ा रिटर्न, जैसे OTM कॉल में।
रणनीतियां: स्ट्रैडल, स्ट्रैंगल, बुल स्प्रेड आदि।

जोखिम:समय क्षय: एक्सपायरी नजदीक प्रीमियम घटता (थीटा)।
विक्रेता का असीमित जोखिम: कॉल बेचने पर ऊपर जाने पर बड़ा लॉस।
वोलैटिलिटी: IV (इम्प्लाइड वोलेटिलिटी) प्रभावित।
कॉम्प्लेक्सिटी: ग्रीक्स समझना जरूरी।

उदाहरण: निफ्टी ₹20,000 पर, ₹20,100 स्ट्राइक कॉल ऑप्शन ₹50 प्रीमियम पर खरीदें (कुल ₹1250, लॉट 25)। यदि एक्सपायरी पर ₹20,500, लाभ ₹10,000 (400 x 25 - प्रीमियम)। यदि ₹19,500, नुकसान केवल प्रीमियम ₹1250। पुट में, गिरावट पर लाभ।ऑप्शंस रचनात्मक ट्रेडर्स के लिए, लेकिन 80% ऑप्शंस एक्सपायरी पर व्यर्थ होते हैं। 

4 sources

मुख्य अंतरों की तुलना (लगभग 200 शब्द)नीचे टेबल में सरल तुलना:विशेषता
कैश मार्केट
फ्यूचर्स
ऑप्शंस
परिभाषा
तत्काल खरीद-बिक्री।
भविष्य अनुबंध, बाध्यकारी।
अधिकार, गैर-बाध्यकारी।
निपटान
T+1 तत्काल।
मासिक एक्सपायरी, MTM।
एक्सपायरी या पहले।
पूंजी
पूर्ण भुगतान।
मार्जिन (10-20%)।
प्रीमियम (खरीदार), मार्जिन (विक्रेता)।
जोखिम
बाजार मूल्य तक सीमित।
असीमित।
खरीदार: प्रीमियम तक; विक्रेता: असीमित।
लाभ
स्वामित्व, डिविडेंड।
लीवरेज, हेजिंग।
लचीलापन, सीमित जोखिम।
उपयोग
लॉन्ग-टर्म निवेश।
सट्टा/हेज।
रणनीतियां।