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Saturday, September 13, 2025

पीएम का पूर्वोत्तर दौरा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है / PM's Northeast Tour Marks Historic Milestone for Region


पीएम का पूर्वोत्तर दौरा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 13 से 15 सितंबर 2025 तक चला पूर्वोत्तर भारत का दो दिवसीय दौरा न केवल विकास की नई ऊंचाइयों का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्र के लंबे समय से चली आ रही अलगाव की भावना को भी समाप्त करने का माध्यम सिद्ध हुआ। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने मिजोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुल 71,850 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। यह दौरा पूर्वोत्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ, जहां कनेक्टिविटी, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक एकीकरण पर विशेष जोर दिया गया। पीएम मोदी ने अपने भाषणों में बार-बार जोर दिया कि पूर्वोत्तर अब 'फ्रंटियर' नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा का 'ग्रोथ इंजन' बन चुका है। इस दौरे ने न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में क्रांति लाई, बल्कि राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक सद्भाव को भी मजबूत किया। आइए, इस दौरे की पूरी जानकारी विस्तार से समझें।दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमिप्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'विकसित भारत 2047' के विजन का हिस्सा था। पूर्वोत्तर भारत, जो लंबे समय से भौगोलिक अलगाव, उग्रवाद और अविकास की समस्या से जूझ रहा था, अब केंद्र सरकार की प्राथमिकता बन चुका है। 2014 से अब तक मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर में 12 से अधिक शांति समझौते किए हैं, जिनमें बोरो (2020), ब्रू-रेआंग (2020), कार्बी आंगलॉन्ग (2021), त्रिपुरा मोथा (2024) और उल्फा (2023) शामिल हैं। इन समझौतों ने क्षेत्र में शांति की नींव रखी है।इस दौरे से पहले, पूर्वोत्तर में रेलवे बजट को पांच गुना बढ़ाया गया है। 2014-2025 तक कुल 62,477 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही 10,440 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा, "पूर्वोत्तर के लोग स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में हमेशा आगे रहे हैं। आज हम उन्हें मुख्यधारा में ला रहे हैं।" यह दौरा मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के बाद पीएम का पहला दौरा था, जो क्षेत्र में विश्वास बहाली का संकेत था। कुल मिलाकर, यह दौरा पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया का गेटवे बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था।मिजोरम में ऐतिहासिक रेलवे उद्घाटन: कनेक्टिविटी की नई क्रांतिदौरे का पहला पड़ाव मिजोरम की राजधानी आइजोल था, जहां 13 सितंबर को पीएम मोदी ने 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया। यह मिजोरम की आजादी के बाद पहली प्रमुख रेल कनेक्टिविटी थी, जो राज्य को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। बैराबी (असम के हैलाकांडी जिले के पास) से सैरांग (आइजोल के पास) तक बनी यह लाइन एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो पहाड़ी इलाकों की चुनौतियों को पार करती हुई बनी है। इस परियोजना की लागत 8,071 करोड़ रुपये आई, और यह पूर्वोत्तर में आइजोल को गुवाहाटी, अगरतला और ईटानगर के बाद चौथा रेल-जुड़ा राजधानी शहर बनाती है।पीएम मोदी ने आइजोल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "यह रेल लाइन मिजोरम को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। इससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।" उन्होंने तीन नई एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई: आइजोल-दिल्ली राजधानी, आइजोल-गुवाहाटी और आइजोल-कोलकाता। इसके अलावा, 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की अन्य परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (मिजोरम को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने वाला) और सैरांग-ह्मावंगबुचुआ रेल लाइन शामिल हैं। स्थानीय निवासियों और छात्रों ने इसकी सराहना की, कहा कि इससे कनेक्टिविटी में सुधार होगा और आर्थिक अवसर बढ़ेंगे।मिजोरम में 87% आबादी ईसाई और 93-94% आदिवासी है। पीएम मोदी ने यहां भाजपा की 'एंटी-माइनॉरिटी' वाली छवि को तोड़ा, जब उन्होंने मिजो समाज के बलिदान, सेवा, साहस और करुणा के मूल्यों की प्रशंसा की। नेशनल बांस मिशन से हजारों नौकरियां पैदा हुईं, पीएम-किसान योजना से 1.2 लाख किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिल रहे हैं, और आयुष्मान भारत से 2.5 लाख लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा मिली। यह दौरा पूर्वोत्तर के अलगाव को समाप्त करने का प्रतीक था।मणिपुर में शांति और विकास का संदेश: 2023 हिंसा के बाद पहला दौरामिजोरम से सीधे मणिपुर पहुंचे पीएम मोदी ने इंफाल के ऐतिहासिक कांगला किले में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यहां उन्होंने 1,200 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया, और कुल 8,500 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात दी। मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 2023 में भड़की हिंसा के बाद फरवरी 2024 से राष्ट्रपति शासन है। यह पीएम का पहला दौरा था, जो सुरक्षा और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था।पीएम ने कहा, "मैं आपके साथ खड़ा हूं, नई सुबह दूर नहीं।" उन्होंने पूर्वोत्तर में ग्रामीण सड़कों, हाईवे, मोबाइल कनेक्टिविटी, बिजली, पाइप्ड वाटर और एलपीजी कनेक्शन के विस्तार का जिक्र किया। मणिपुर को रेल, सड़क और हवाई अड्डा परियोजनाओं से जोड़ा जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी, और बड़ी संख्या में लोग सभा में पहुंचे। हालांकि, कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए, लेकिन पीएम ने शांति और विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति से पूर्वोत्तर को नुकसान हुआ, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे विकास का इंजन बना दिया। यह दौरा मणिपुर में विश्वास बहाली का प्रयास था, जहां 250 से अधिक मौतें और 60,000 विस्थापन हो चुके हैं।असम और अन्य राज्यों में विकास की बाढ़: 71,850 करोड़ की सौगातदौरे का अगला चरण असम था, जहां पीएम मोदी ने भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया। असम को रिफाइनरी, सड़कें और पर्यटन परियोजनाएं मिलीं। कुल मिलाकर, पांच राज्यों में 71,850 करोड़ की परियोजनाएं लॉन्च हुईं, जिनमें पूर्वोत्तर विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NEIDS) और पीएम-डेवाइन (प्रधानमंत्री विकास पहल फॉर नॉर्थ ईस्ट) शामिल हैं। ये योजनाएं सामाजिक विकास, युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका सृजन पर केंद्रित हैं।पश्चिम बंगाल और बिहार में भी कार्यक्रम हुए, जहां बिहार को सबसे बड़ा पावर प्लांट मिला। पीएम ने कहा, "पूर्वोत्तर अब ASEAN का गेटवे बनेगा।" रेलवे में नई ट्रेनें, हाईवे और एयरपोर्ट्स से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। सियांग अपर मल्टी-पर्पस प्रोजेक्ट और सेला टनल जैसी परियोजनाएं क्षेत्र को मजबूत करेंगी।ऐतिहासिक महत्व और प्रभाव: पूर्वोत्तर का नया युगयह दौरा पूर्वोत्तर के लिए ऐतिहासिक था क्योंकि मोदी सरकार ने 11 वर्षों में पूर्वोत्तर के दौरे मनमोहन सिंह के 10 वर्षों के 8 दौरे की तुलना में 76 दौरे किए। मणिपुर में मोदी के 8 दौरे हुए, जबकि सिंह के 3। पूर्वोत्तर अब GDP में 2.3% योगदान दे रहा है, लेकिन क्षमता बहुत अधिक है। इस दौरे ने उग्रवाद कम किया, पर्यटन बढ़ाया और आर्थिक एकीकरण को मजबूत किया।हालांकि, कुछ आलोचनाएं हैं कि यह 'टोकनिज्म' है, लेकिन स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। नेपाल की घटनाओं से प्रभावित क्षेत्र में स्थिरता लाने का प्रयास भी था। कुल मिलाकर, यह दौरा पूर्वोत्तर को मुख्यधारा में लाने का मील का पत्थर साबित हुआ।निष्कर्ष: विकास की नई सुबहपीएम मोदी का पूर्वोत्तर दौरा न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का उत्सव था, बल्कि एकता और प्रगति का संदेश भी। इससे क्षेत्र में रोजगार, पर्यटन और व्यापार को बल मिलेगा। जैसा कि पीएम ने कहा, "जो पहले उपेक्षित थे, वे अब आगे हैं।" यह दौरा भारत की विकास यात्रा में एक चमकदार अध्याय जोड़ता है, जो पूर्वोत्तर को वैश्विक पटल पर चमकाने का वादा करता है।