ज़ेरोधा, भारत का सबसे बड़ा ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म, अपनी उन्नत तकनीक के लिए जाना जाता है, लेकिन समय-समय पर तकनीकी समस्याएँ इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए चुनौतियाँ पैदा करती हैं। ये समस्याएँ, जैसे ऑर्डर प्लेसमेंट में देरी, डेटा फीड रुकना, या लॉगिन विफलता, ट्रेडिंग रणनीतियों को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
इंट्राडे ट्रेडिंग में समय और सटीकता महत्वपूर्ण हैं। जब ज़ेरोधा का काइट प्लेटफॉर्म रुकता है या कीमतें अपडेट नहीं होतीं, ट्रेडर्स स्टॉप-लॉस या टारगेट ऑर्डर समय पर निष्पादित नहीं कर पाते, जिससे बड़े नुकसान हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, 2021 में एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण ट्रेडर्स को लाखों का नुकसान हुआ, क्योंकि स्टॉक की कीमतें तेजी से बदल गईं, लेकिन ऑर्डर प्रोसेस नहीं हुए।
तकनीकी विश्लेषण पर निर्भर ट्रेडर्स, जो RSI, MACD, या बोलिंगर बैंड जैसे इंडिकेटर्स का उपयोग करते हैं, डेटा फीड बाधित होने पर सही निर्णय नहीं ले पाते। यह विशेष रूप से अस्थिर बाजारों में जोखिम बढ़ाता है, जहाँ ज़ेरोधा मार्जिन बढ़ा देता है, जिससे ट्रेडिंग रणनीतियाँ और जटिल हो जाती हैं।
ऐसी समस्याएँ ट्रेडर्स के आत्मविश्वास को कम करती हैं, जिससे वे अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने या अन्य प्लेटफॉर्म्स की ओर जाने को मजबूर होते हैं। ज़ेरोधा ने इन मुद्दों के लिए पारदर्शी प्रकटीकरण और रूट कॉज़ एनालिसिस (RCA) प्रकाशित किए हैं, लेकिन बार-बार होने वाली गड़बड़ियाँ मध्यम वर्ग के ट्रेडर्स को निराश करती हैं, जो छोटे पूंजी के साथ त्वरित मुनाफे पर निर्भर रहते हैं।
ज़ेरोधा को ऐसी समस्याओं को कम करने के लिए सिस्टम स्थिरता पर और निवेश करना चाहिए ताकि ट्रेडर्स अपनी रणनीतियों को बिना रुकावट लागू कर सकें। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे वैकल्पिक ब्रोकरेज या बैकअप योजनाएँ तैयार रखें।