टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन स्टॉक स्प्लिट: सरल हिंदी में पूरी जानकारीटाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन एक बड़ी कंपनी है। यह टाटा ग्रुप की हिस्सा है। यह कंपनी निवेश करती है। मतलब, यह अन्य कंपनियों के शेयर खरीदती है और पैसे कमाती है। अब इस कंपनी ने स्टॉक स्प्लिट की घोषणा की है। स्टॉक स्प्लिट क्या होता है? सरल शब्दों में, स्टॉक स्प्लिट में एक शेयर को कई छोटे शेयरों में बांट दिया जाता है। इससे शेयर की कीमत कम हो जाती है। लेकिन कंपनी की कुल वैल्यू वही रहती है। यह निवेशकों के लिए अच्छा होता है क्योंकि ज्यादा लोग शेयर खरीद सकते हैं।इस स्प्लिट का अनुपात 1:10 है। मतलब, अगर आपके पास एक शेयर है जिसकी फेस वैल्यू 10 रुपये है, तो वह 10 शेयरों में बदल जाएगा। हर नए शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपया होगी। यह कंपनी का पहला स्टॉक स्प्लिट है। घोषणा 22 सितंबर 2025 को हुई। कंपनी ने पोस्टल बैलट से शेयरधारकों की मंजूरी ली। रिकॉर्ड डेट 14 अक्टूबर 2025 है। मतलब, अगर आप 14 अक्टूबर तक शेयरधारक हैं, तो आपको स्प्लिट का फायदा मिलेगा। स्प्लिट के बाद आपके शेयरों की संख्या 10 गुना बढ़ जाएगी। लेकिन हर शेयर की कीमत 10 गुना कम हो जाएगी। कुल मिलाकर, आपके निवेश की वैल्यू वही रहेगी।क्यों किया स्प्लिट? कंपनी चाहती है कि उसके शेयर ज्यादा लोगों तक पहुंचें। पहले शेयर की कीमत बहुत ऊंची थी, जैसे 10,000 रुपये से ज्यादा। स्प्लिट से कीमत कम होगी, तो छोटे निवेशक आसानी से खरीद सकेंगे। इससे शेयर बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी। मतलब, शेयर खरीदना-बेचना आसान होगा। घोषणा के बाद शेयर की कीमत में तेज उछाल आया। एक दिन में 15% से ज्यादा बढ़ी। 52 हफ्तों का नया हाई बना। हाल में शेयर 10,000 रुपये तक पहुंचा। 5 दिनों में 19% से ज्यादा बढ़ा। निवेशकों में उत्साह है।यह स्प्लिट टाटा कैपिटल के आईपीओ से जुड़ा है। टाटा कैपिटल एक और टाटा कंपनी है। उसका आईपीओ 6 अक्टूबर को लॉन्च हो रहा है। आईपीओ की कीमत 310 से 325 रुपये प्रति शेयर है। कुल 15,512 करोड़ रुपये का आईपीओ है। टाटा इन्वेस्टमेंट के पास टाटा कैपिटल के शेयर हैं। आईपीओ से कंपनी को फायदा होगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।निवेशकों के लिए क्या मतलब? अगर आप शेयरधारक हैं, तो स्प्लिट से आपके शेयर बढ़ेंगे। लेकिन बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। स्प्लिट से कंपनी की वैल्यू नहीं बढ़ती, सिर्फ शेयरों की संख्या। अगर कंपनी अच्छा प्रदर्शन करे, तो कीमत बढ़ सकती है। लेकिन जोखिम भी है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता है। निवेश से पहले सलाह लें।कुल मिलाकर, यह स्प्लिट टाटा ग्रुप की ताकत दिखाता है। कंपनी मजबूत है। भविष्य अच्छा लग रहा है। अगर आप निवेश करना चाहें, तो रिसर्च करें। रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर खरीदें। लेकिन याद रखें, निवेश में जोखिम है|
Tuesday, September 30, 2025
Monday, September 29, 2025
दवा निर्माता वॉकहार्ट में उछाल, क्योंकि व्हाइट हाउस ने व्यापार समझौतों वाले देशों से दवा आयात को छूट दी।Drug maker #Wockhardt rallies as White House exempts pharma imports from nations with trade pacts.
फार्मा कंपनी वॉकहार्ट के शेयर 29 सितंबर 2025 को 15 प्रतिशत तक उछल गए, जिससे इसके दाम 1,536 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंच गए और कंपनी का मार्केट कैप 24,400 करोड़ रुपये हो गया। इस तेजी का सबसे बड़ा कारण व्हाइट हाउस (अमेरिकी सरकार) की नई घोषणा है, जिसमें अमेरिका ने उन देशों से दवा आयात को छूट दी है जिनके साथ उसके व्यापार समझौते हैं। पहले अमेरिका ने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की बात कही थी, जिससे शेयरों में भारी गिरावट आई थी। बाद में जब यह छूट दी गई, तो अचानक वॉकहार्ट सहित कई फार्मा कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आई।वॉकहार्ट से जुड़ी मुख्य बातेंवॉकहार्ट के शेयर 15% चढ़े और 1,536 रुपये के ऊपरी स्तर तक पहुंच गए।कंपनी का मार्केट कैप 24,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।इस बढ़ोतरी की वजह अमेरिकन टैरिफ में छूट है, जिससे दवाओं का निर्यात आसान हुआ है।बाजार पर प्रभाववॉकहार्ट ने शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर की रिकवरी का नेतृत्व किया।बजाज हेल्थकेयर, सुप्रिया लाइफसाइंस, सन फार्मा, ल्यूपिन, सिप्ला और बायोकॉन जैसी अन्य कंपनियों के शेयर भी 1-3% तक चढ़े।निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 1% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।निवेशकों और विशेषज्ञों की रायविशेषज्ञों ने कहा है कि यह वृद्धि अस्थायी भी हो सकती है, लेकिन फिलहाल बाजार में सकारात्मकता है क्योंकि भारतीय कंपनियों का फोकस जेनेरिक दवाओं पर है, और वे व्यापार समझौतों द्वारा सुरक्षा प्राप्त कर रही हैं।अमेरिकी छूट के बाद भारतीय फार्मा कंपनियों को अपनी दवाओं के निर्यात में आसानी मिलेगी, जिससे इनकी कमाई बढ़ सकती है।शेयर की मौजूदा स्थिति29 सितंबर 2025 तक वॉकहार्ट शेयर की कीमत ₹1,564 थी और कंपनी की मार्केट कैप ₹25,420 करोड़ तक जा चुकी है।कंपनी का स्टॉक पी/ई और पी/बी रेशियो सामान्य स्तर पर है।
Sunday, September 28, 2025
इटर्नल लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण ₹3.26 ट्रिलियन तक उछला, जिसने HAL, टाइटन और डीमार्ट को पीछे छोड़ दिया। इटर्नल के शेयर मूल्य में उछाल ने इसकी वैल्यूएशन को बढ़ावा दिया।Eternal Ltd's market cap surged to ₹3.26 trn, surpassing HAL, Titan, DMart.The rally in Eternal's stock price boosted its valuation.
इटरनल लिमिटेड का बाजार पूंजीकरण ₹3.26 ट्रिलियन तक उछल गया, जो हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), टाइटन कंपनी और एवेन्यू सुपरमार्ट्स (DMart) को पीछे छोड़ते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस तेज रैली ने कंपनी की वैल्यूएशन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया, जो भारत के स्टॉक मार्केट में डिजिटल अर्थव्यवस्था के उदय को दर्शाता है। इटरनल, जो पहले जोमैटो के नाम से जाना जाता था, अब जोमैटो और ब्लिंकिट ब्रांड्स का मालिक है। यह खबर 18 सितंबर 2025 को सामने आई, जब कंपनी का शेयर मूल्य में उछाल आया।कंपनी का मार्केट कैप गुरुवार को ₹3,26,000 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले दिनों से लगभग 1.28% की वृद्धि का परिणाम था। इसने न केवल DMart (₹3,09,758 करोड़) और टाइटन (₹3,11,693 करोड़) को ओवरटेक किया, बल्कि HAL (₹3,24,847 करोड़), अदानी पोर्ट्स (₹3,05,087 करोड़), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (₹2,99,591 करोड़) और ONGC (₹2,96,454 करोड़) जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया। इटरनल अब टॉप 100 कंपनियों में 22वें स्थान पर काबिज है, जो निफ्टी 50 के टॉप 25 क्लब में उसकी एंट्री को मजबूत बनाता है। यह रैली निवेशकों के बीच कंपनी की ग्रोथ पोटेंशियल पर बढ़ते विश्वास को प्रतिबिंबित करती है।इटरनल की सफलता का मूल कारण इसकी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और क्विक कॉमर्स सेक्टर में विस्तार है। FY26 की पहली तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू 70% YoY बढ़कर ₹7,167 करोड़ हो गई, जबकि ब्लिंकिट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 140% उछलकर ₹11,800 करोड़ पहुंच गया। यह पहली बार था जब ब्लिंकिट का NOV जोमैटो के फूड डिलीवरी बिजनेस से आगे निकला। सालाना आधार पर, कंपनी के B2C बिजनेस का कुल NOV लगभग $10 बिलियन के करीब है, जिसमें ब्लिंकिट का योगदान आधा है। कंपनी ब्लिंकिट के डार्क स्टोर नेटवर्क को 1,544 से दोगुना करके 3,000 तक ले जाने की योजना बना रही है, जो क्विक कॉमर्स मार्केट में उसकी पकड़ मजबूत करेगा।शेयर मूल्य की बात करें तो, इटरनल का स्टॉक 52-सप्ताह के निचले स्तर से 70% ऊपर चढ़ चुका है। वर्तमान में यह ₹325 प्रति शेयर पर ट्रेडिंग कर रहा है, जो पिछले छह महीनों में 61% और तीन महीनों में 29% की वृद्धि दर्शाता है। YTD में स्टॉक 21.54% ऊपर है। यह रैली Q1 रिजल्ट्स के बाद तेज हुई, जहां नेट प्रॉफिट 90% गिरकर ₹299 करोड़ रह गया, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ ने निवेशकों को आकर्षित किया। इटरनल ने FY25 में ₹20,243 करोड़ की रेवेन्यू हासिल की, जो FY24 के ₹12,114 करोड़ से दोगुनी है। नेट प्रॉफिट FY21 के -₹816 करोड़ से सुधारकर FY25 में सकारात्मक हो गया।यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था में टेक-ड्रिवन बिजनेस के महत्व को रेखांकित करता है। इटरनल ने टाटा मोटर्स (₹2.64 लाख करोड़), विप्रो (₹2.66 लाख करोड़), JSW स्टील (₹2.72 लाख करोड़) जैसे पारंपरिक दिग्गजों को पीछे छोड़ा है। हालांकि, HAL और NTPC जैसे PSUs अभी थोड़े आगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लिंकिट की ग्रोथ और फूड डिलीवरी में स्थिरता से इटरनल का मार्केट कैप जल्द ₹4 ट्रिलियन को पार कर सकता है। लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे कॉम्पिटिशन से इंस्टामार्ट और स्विगी, और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव।कुल मिलाकर, इटरनल की यह उपलब्धि स्टार्टअप से यूनिकॉर्न की यात्रा का प्रतीक है। IPO 2021 में लिस्टिंग के बाद से यह निरंतर उम्मीदों से आगे निकल रही है। निवेशक अब HAL और बजाज फिनसर्व को ओवरटेक करने की उम्मीद कर रहे हैं। यह रैली न केवल कंपनी के शेयरधारकों को ₹38,000 करोड़ का फायदा देगी, बल्कि डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूत करेगया.
लॉरस लैब्स के सीईओ ने नए अमेरिकी टैरिफ के ब्रांडेड दवाओं पर प्रभाव को कम महत्व दिया, क्योंकि अमेरिकी बाजार में उनकी सीमित उपस्थिति है।Laurus Labs CEO downplays impact of new US tariffs on branded drugs, citing limited exposure to the US market.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया घोषणा ने वैश्विक फार्मा उद्योग में हलचल मचा दी है। 25 सितंबर 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड या पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल उत्पादों के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जब तक कि कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का निर्माण न शुरू कर दें। "ब्रेकिंग ग्राउंड" या "अंडर कंस्ट्रक्शन" वाली कंपनियां इससे मुक्त रहेंगी। यह कदम अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नौकरियां बढ़ाने का प्रयास है, लेकिन भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।भारतीय फार्मा शेयरों पर इसका तत्काल असर पड़ा। 26 सितंबर को निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.5 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 2.14 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, बायोकॉन, नाटको फार्मा और लॉरस लैब्स जैसे शेयरों में 3-8 प्रतिशत की गिरावट आई। लॉरस लैब्स का शेयर इंट्राडे 8.2 प्रतिशत गिरकर 823.1 रुपये पर पहुंच गया, जो 30-दिन के औसत वॉल्यूम का तीन गुना ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्शाता है। अन्य कंपनियां जैसे जायडस लाइफ, ग्लेनमार्क और आईपीसीए लैब्स भी 2-4 प्रतिशत नीचे रहीं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी बाजार पर निर्भरता वाली कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, जहां भारत से सालाना 3.6 अरब डॉलर का फार्मा निर्यात होता है।इस बीच, लॉरस लैब्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रभाव को न्यूनतम बताते हुए निवेशकों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि कंपनी का अमेरिकी बाजार में सीमित एक्सपोजर है, खासकर ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाओं के मामले में। लॉरस लैब्स की कुल राजस्व का लगभग 40 प्रतिशत एंटीरेट्रोवायरल (एआरवी) दवाओं से आता है, जो एचआईवी उपचार के लिए जेनेरिक हैं और टैरिफ से अछूती रहेंगी। कंपनी का फोकस जेनेरिक्स, एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) और सीडीएमओ (कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन) पर है, जहां अमेरिकी निर्यात कुल का मात्र 20-25 प्रतिशत है। "हमारे पास पेटेंटेड ड्रग्स का कोई बड़ा हिस्सा नहीं है, इसलिए यह टैरिफ हमारे संचालन को प्रभावित नहीं करेगा," अधिकारी ने कहा। इसके अलावा, कंपनी यूरोप और अन्य बाजारों पर निर्भर है, जो इस नीति से सुरक्षित हैं।विश्लेषकों ने भी लॉरस पर सकारात्मक राय दी है। ब्लूमबर्ग डेटा के अनुसार, 16 विश्लेषकों में से सात 'बाय', तीन 'होल्ड' और छह 'सेल' रेटिंग दे चुके हैं, जबकि औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस 5 प्रतिशत ऊपर का संकेत देता है। चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की मैत्री शेठ ने कहा, "टैरिफ मुख्य रूप से ब्रांडेड दवाओं पर लक्षित है, लेकिन कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स पर अस्पष्टता बनी हुई है। फिर भी, अमेरिका में प्लांट निर्माण वाली कंपनियां इससे बच सकती हैं।" लॉरस ने हाल ही में अमेरिकी विस्तार की योजना बनाई है, जो भविष्य में राहत देगी।कुल मिलाकर, ट्रंप का यह फैसला छोटे स्तर पर असर डालेगा, लेकिन जेनेरिक-केंद्रित भारतीय कंपनियां जैसे लॉरस लैब्स मजबूत स्थिति में हैं। कंपनी का फोकस नवाचार और विविधीकरण पर है, जो लंबे समय में लाभकारी साबित होगा। निवेशक सतर्क रहें, लेकिन घबराएं नहीं—यह अस्थायी उतार-चढ़ाव है।
Saturday, September 27, 2025
शेयर बाजार हाइलाइट्स: सेंसेक्स छठे दिन गिरा, 733 अंक नीचे बंद; निफ्टी 24,700 से नीचेStock Market Highlights: Sensex falls for 6th day, settles 733 pts lower; Nifty below 24,700
भारतीय शेयर बाजार आज फिर लाल निशान पर बंद हुआ। 26 सितंबर 2025 को बीएसई सेंसेक्स 733.22 अंक गिरकर 80,426.46 पर आ गया। यह लगातार छठा दिन था जब सेंसेक्स नीचे बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 50 भी 236.15 अंक कम होकर 24,654.70 पर बंद हुआ, जो 24,700 से नीचे है। बाजार में भारी बिकवाली हुई और कुल मार्केट वैल्यू में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।गिरावट के मुख्य कारणइस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया फैसला था। उन्होंने 1 अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड या पेटेंट वाली दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। अगर कोई कंपनी अमेरिका में दवा का प्लांट बनाएगी, तो टैरिफ नहीं लगेगा। लेकिन अभी भारत की फार्मा कंपनियां परेशान हैं। इसके अलावा, भारी ट्रकों पर 25 प्रतिशत और किचन कैबिनेट जैसे सामान पर 50 प्रतिशत ड्यूटी लगाई गई। ये कदम भारत के निर्यात को नुकसान पहुंचा सकते हैं।दूसरा कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली था। एफआईआई (फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स) ने पिछले कुछ दिनों में हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अमेरिकी बाजार में भी उतार-चढ़ाव और एच-1बी वीजा पर चिंता ने भारतीय आईटी कंपनियों को प्रभावित किया। एक्सेंचर जैसी ग्लोबल आईटी कंपनी के कमजोर नतीजों ने भी बाजार को डराया।तीसरा, घरेलू स्तर पर कमजोर कमाई के आंकड़े आए। कई कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से कम रहे। बैंकिंग, आईटी और फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।सेक्टरों की स्थितिसभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा गिरा, करीब 2-3 प्रतिशत। आईटी भी 1-2 प्रतिशत नीचे रहा। बैंक, मेटल, कंज्यूमर गुड्स, टेलीकॉम और पीएसयू बैंक सेक्टर भी 1-2 प्रतिशत कम हुए। केवल कुछ स्टॉक जैसे एलएंडटी, टाटा मोटर्स, ईचर मोटर्स, रिलायंस और आईटीसी हरे रहे।प्रमुख गेनर्स और लूजर्सनिफ्टी पर सबसे ज्यादा गिरने वाले स्टॉक थे: महिंद्रा एंड महिंद्रा (4 प्रतिशत नीचे), एटर्नल (3 प्रतिशत), इंडसइंड बैंक, सन फार्मा, टाटा स्टील। ये स्टॉक टैरिफ और कमजोर डिमांड से प्रभावित हुए। दूसरी तरफ, गेनर्स में एलएंडटी (कुछ ऊपर), टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईटीसी शामिल थे। सेंसेक्स के टॉप लूजर्स में एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, बजाज फिनसर्व, बीईएल, टाइटन, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल, एनटीपीसी, कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और पावरग्रिड थे।बाजार की शुरुआत और दिन भर का रुखबाजार की शुरुआत कमजोर रही। सेंसेक्स 81,159.68 से शुरू होकर 80,956.01 पर खुला और दिन में 80,332 तक गिरा। निफ्टी 24,832.30 से शुरू होकर 24,655 पर बंद हुआ। एशियाई बाजारों में भी गिरावट थी, जो भारतीय बाजार को प्रभावित कर रही थी।आगे क्या?विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ का असर सीमित हो सकता है, क्योंकि जेनेरिक दवाओं पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन आईटी और फार्मा पर दबाव रहेगा। निवेशक अमेरिकी फेड रिजर्व की मीटिंग और भारत-अमेरिका ट्रेड टॉक्स पर नजर रखें। छोटे निवेशक घबराएं नहीं, लंबे समय के लिए अच्छे स्टॉक चुनें। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन सतर्क रहें।
Thursday, September 25, 2025
अमेरिका ने सौर आयात पर कथित शुल्क चोरी के लिए #वारी एनर्जीज़ की जांच शुरू की।एंटी-डंपिंग जांच के बीच #वारी पर अंतरिम उपाय लागू किए गए।US probes Waaree Energies for alleged duty evasion on solar imports.Interim measures imposed on Waaree amid anti-dumping investigations.
अमेरिका ने वारी एनर्जीज़ पर सौर आयात में कथित शुल्क चोरी के आरोपों की जांच शुरू की है। एंटी-डंपिंग जांच के बीच कंपनी पर अंतरिम उपाय लागू किए गए हैं। यह मामला अमेरिकी सौर उद्योग की चिंताओं को उजागर करता है, जहां घरेलू निर्माता विदेशी आयात को अपनी बाजार हिस्सेदारी छीनने का दोषी ठहराते हैं।विस्तार से, अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) ने वारी एनर्जीज़ लिमिटेड और इसके अमेरिकी उपक्रम वारी सोलर अमेरिकास इंक. पर जांच का शुभारंभ किया है। आरोप है कि कंपनी ने चीन और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (जैसे इंडोनेशिया, लाओस) से आयातित सौर सेल्स और मॉड्यूल्स पर लगे एंटी-डंपिंग तथा काउंटरवेलिंग ड्यूटीज (एडी/सीवीडी) से बचने के लिए उत्पादों को गलत लेबलिंग किया। विशेष रूप से, चीनी मूल के सौर सेल्स को 'मेड इन इंडिया' बताकर अमेरिका में आयात किया गया, जिससे टैरिफ से बचा जा सका। सीबीपी ने एक मेमो में 'उचित संदेह' का हवाला देते हुए अंतरिम उपाय लागू किए हैं, जो आयातित माल की जांच, जब्ती या बंधक बनाने जैसे कदम शामिल कर सकते हैं।यह जांच अमेरिकन अलायंस फॉर सोलर मैन्युफैक्चरिंग ट्रेड कमिटी (एएएसएमटीसी) की शिकायत पर आधारित है, जिसमें फर्स्ट सोलर, हान्वा क्यू सेल्स यूएसए और मिशन सोलर एनर्जी जैसे घरेलू उत्पादक शामिल हैं। कमिटी के वकील टिम ब्राइटबिल ने कहा, "भारतीय सौर उत्पाद बाजार में सबसे सस्ते रहे हैं, क्योंकि वे चीनी सेल्स का उपयोग कर ड्यूटी चुकाए बिना बेचे जा रहे थे।" एएएसएमटीसी ने इस साल की शुरुआत में ही वाणिज्य विभाग से भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात पर एडी/सीवीडी टैरिफ लगाने की मांग की थी। अगस्त 2025 में यूएस इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन (आईटीसी) ने प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया कि इन देशों के आयात से अमेरिकी क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टेइक (सीएसपीवी) सेल्स और मॉड्यूल्स उद्योग को 'मटेरियल इंजरी' हो रही है। वाणिज्य विभाग ने डंपिंग मार्जिन 123% और सब्सिडी रेट 2% का अनुमान लगाया है। अंतिम निर्णय 2026 की दूसरी तिमाही तक अपेक्षित है।वारी एनर्जीज़, भारत की सबसे बड़ी सौर पैनल निर्माता कंपनी, ने 2024 में आईपीओ के बाद शेयर मूल्य दोगुना से अधिक बढ़ा लिया था। कंपनी अमेरिकी बाजार में मजबूत उपस्थिति रखती है और 2025 के अंत तक अपनी यूएस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 3.2 गीगावाट तक दोगुना करने की योजना बना रही है। हालांकि, जांच की खबर से 26 सितंबर 2025 को इसके शेयर 5% गिरकर 3,276 रुपये पर बंद हुए। कंपनी ने टिप्पणी करने से इंकार किया, लेकिन जुलाई 2025 में कहा था कि एंटी-डंपिंग जांच उसके यूएस निर्यात को प्रभावित नहीं करेगी।यह घटना वैश्विक सौर व्यापार में तनाव को दर्शाती है। अमेरिका ने वर्षों से चीन पर भारी टैरिफ लगाए हैं (271% तक), जो दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए रूट डायवर्ट हो रहे हैं। भारत जैसे देशों पर अब फोकस है, जहां सरकार सौर विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है। एडी/सीवीडी जांच से भारतीय निर्यातक प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन वारी जैसी कंपनियां स्थानीय उत्पादन बढ़ाकर जोखिम कम कर रही हैं। कुल मिलाकर, यह अमेरिकी सौर उद्योग की सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जो डेटा सेंटर, रीशोरिंग और इलेक्ट्रिफिकेशन से प्रेरित मांग को संतुलित करने का प्रयास है।
Wednesday, September 24, 2025
प्रोसस रैपिडो/#Rapido में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जिससे उसकी हिस्सेदारी 15% हो जाएगी, स्विगी/#Swiggy के 12% हिस्सेदारी से बाहर निकलने के बाद।#Prosus to invest Rs 3,000 Cr in #Rapido, increasing stake to 15%, post #Swiggy's 12% stake exit
प्रोसस, एक बड़ा निवेशक समूह, रैपिडो में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। रैपिडो एक ऑनलाइन टैक्सी और बाइक सेवा कंपनी है। इस निवेश के बाद प्रोसस की रैपिडो में हिस्सेदारी 15% हो जाएगी। पहले, स्विगी, जो एक फूड डिलीवरी कंपनी है, के पास रैपिडो में 12% हिस्सेदारी थी, लेकिन अब स्विगी ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी है। यह निवेश रैपिडो को और मजबूत करेगा, जिससे कंपनी अपनी सेवाओं को बेहतर कर सकेगी, जैसे कि अधिक शहरों में विस्तार, बेहतर तकनीक और ग्राहकों के लिए नई सुविधाएँ। प्रोसस का यह कदम दिखाता है कि वह रैपिडो के भविष्य में बहुत विश्वास रखता है। यह निवेश भारत के ऑनलाइन परिवहन क्षेत्र के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
Tuesday, September 23, 2025
#Swiggy रैपिडो में अपनी हिस्सेदारी 2,400 करोड़ में दो अलग-अलग सौदों के माध्यम से बेचने की योजना बना रही है।#Swiggy to Sell Rapido Stake.#Swiggy plans to divest its Rapido stake for 2,400 crore through two separate deals.
स्विगी रैपिडो में अपनी पूरी हिस्सेदारी 2,400 करोड़ रुपये में बेचने की योजना बना रही हैफूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी लिमिटेड ने अपनी बाइक टैक्सी कंपनी रैपिडो (रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड) में 12% हिस्सेदारी को दो अलग-अलग सौदों के माध्यम से बेचने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने 23 सितंबर 2025 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह सौदा कुल 2,399 करोड़ रुपये का है, जो रैपिडो की वैल्यूएशन को 20,330 करोड़ रुपये (लगभग 2.3 अरब डॉलर) तक पहुंचा देता है। यह वैल्यूएशन 2024 के उसके आखिरी फंडिंग राउंड के 1.1 अरब डॉलर से दोगुनी से अधिक है।पहला सौदा प्रोसस ग्रुप की डच सब्सिडियरी एमआईएच इन्वेस्टमेंट्स वन बीवी के साथ है, जो स्विगी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर (23.31% हिस्सा) हैं। स्विगी 10 इक्विटी शेयर और 1,63,990 सीरीज डी अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्रेफरेंस शेयर (सीसीपीएस) को 1,968 करोड़ रुपये में बेचेगी। यह एक संबंधित पक्ष का लेन-देन है। दूसरा सौदा वेस्टब्रिज कैपिटल एलएलसी के सेटू एआईएफ ट्रस्ट (एसईबीआई-पंजीकृत फंड) के साथ है, जिसमें 35,958 सीरीज डी सीसीपीएस को 431.5 करोड़ रुपये में हस्तांतरित किया जाएगा।यह कदम रैपिडो के फूड डिलीवरी सेगमेंट में प्रवेश के कारण उठाया गया है, जो स्विगी के कोर बिजनेस के लिए संघर्ष पैदा कर रहा था। रैपिडो ने हाल ही में 'ओनली' ऐप लॉन्च किया है, जो बैंगलोर में सक्रिय है और जीरो-कमीशन मॉडल पर काम करता है। यह जोमैटो-स्विगी डुओपॉली को चुनौती दे रहा है। जुलाई 2025 में स्विगी ने कहा था कि वह रैपिडो निवेश का पुनर्मूल्यांकन कर रही है, क्योंकि रैपिडो के फूड डिलीवरी प्लान से टकराव हो सकता है।स्विगी ने 2022 में रैपिडो के 180 मिलियन डॉलर फंडिंग राउंड का नेतृत्व किया था, जिसमें उसने लगभग 120 मिलियन डॉलर निवेश किया। अब यह सौदा 2.5 गुना रिटर्न देगा, जो तीन साल से कम समय में मिला। स्विगी के सीईओ हर्षा माजेटी ने कहा, "यह टकराव हमें अलग होने के लिए मजबूर कर रहा है।"यह फंडिंग स्विगी के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्विक कॉमर्स में ब्लिंकिट, जेप्टो और रैपिडो से तीव्र प्रतिस्पर्धा है। जून 2025 तिमाही में स्विगी का नुकसान 611 करोड़ से बढ़कर 1,197 करोड़ रुपये हो गया, हालांकि राजस्व 54% बढ़कर 4,961 करोड़ रुपये पहुंचा। नकदी भंडार 5,354 करोड़ रुपये था, जो अब 2,400 करोड़ बढ़कर 7,754 करोड़ हो जाएगा। इसके अलावा, स्विगी ने इंस्टामार्ट को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी में स्थानांतरित करने की भी मंजूरी दी, जो ग्रोथ के लिए रिस्ट्रक्चरिंग है।यह सौदा स्विगी को फोकस्ड रिसोर्सेस और मजबूत बैलेंस शीट देगा, जबकि रैपिडो अपनी मॉबिलिटी और डिलीवरी महत्वाकांक्षाओं पर जोर दे सकेगा।
Monday, September 22, 2025
#Infosys ने हानेसब्रांड्स के साथ 10 साल का आईटी अनुबंध किया, जिसमें एआई-संचालित दक्षता और आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है।#Infosys Secures 10-Year Deal.#Infosys signs a 10-year IT deal with HanesBrands, emphasizing Al-driven efficiency and modernization.
#Infosys/इंफोसिस, एक प्रमुख भारतीय आईटी कंपनी, ने हानेसब्रांड्स के साथ 10 साल का एक बड़ा अनुबंध किया है। हानेसब्रांड्स एक प्रसिद्ध अमेरिकी कंपनी है, जो कपड़े और अंडरगारमेंट्स बनाती है। इस सौदे का मुख्य उद्देश्य हानेसब्रांड्स के व्यवसाय को तकनीक के माध्यम से और अधिक कुशल और आधुनिक बनाना है। इस अनुबंध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो काम को तेज, स्मार्ट और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।इस सौदे के तहत, इंफोसिस हानेसब्रांड्स को तकनीकी समाधान प्रदान करेगा, जैसे डेटा प्रबंधन, प्रक्रिया स्वचालन और डिजिटल सेवाएं। यह कंपनी को अपने ग्राहकों के लिए बेहतर उत्पाद और सेवाएं प्रदान करने में मदद करेगा। एआई तकनीक का उपयोग करके, इंफोसिस हानेसब्रांड्स के कामकाज को और सरल बनाएगा, जिससे समय और लागत की बचत होगी। साथ ही, यह उनके व्यवसाय को और अधिक नवीन और प्रतिस्पर्धी बनाएगा।यह अनुबंध इंफोसिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह दर्शाता है कि कंपनी वैश्विक स्तर पर कितनी विश्वसनीय है। हानेसब्रांड्स जैसे बड़े ब्रांड के साथ काम करने से इंफोसिस की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी। यह सौदा दोनों कंपनियों के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि यह तकनीकी नवाचार और व्यवसाय वृद्धि को बढ़ावा देगा।इसके अलावा, यह सौदा भारत की आईटी इंडस्ट्री के लिए भी गर्व की बात है। इंफोसिस जैसे भारतीय ब्रांड वैश्विक कंपनियों के साथ मिलकर दुनिया भर में तकनीकी क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं। अगले 10 सालों में, यह अनुबंध हानेसब्रांड्स को डिजिटल युग में आगे बढ़ने में मदद करेगा और इंफोसिस को अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को और साबित करने का मौका देगा।
Sunday, September 21, 2025
#Swiggy के शेयरों में शुक्रवार को उछाल, मजबूत क्विक-कॉमर्स प्रदर्शन के कारण।#Swiggy Shares Surge on Friday, Driven by Strong Quick-Commerce Performance.
शुक्रवार को स्विगी लिमिटेड के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी गई, जो कंपनी के क्विक-कॉमर्स सेगमेंट की मजबूत वृद्धि से प्रेरित थी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर शेयरों में करीब 12 प्रतिशत की छलांग लगी, जिससे कंपनी का मूल्यांकन और मजबूत हुआ। यह उछाल क्वार्टरली रिजल्ट्स के सकारात्मक संकेतों और इंस्टामार्ट जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की 'विस्फोटक वृद्धि' पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।स्विगी, जो भारत की तेजी से बढ़ती फूड डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स मार्केट में प्रमुख खिलाड़ी है, ने हाल के महीनों में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। क्विक-कॉमर्स सेक्टर, जहां 10 मिनट के अंदर सामान डिलीवरी होती है, ने राष्ट्रीय स्तर पर सालाना बिक्री 60 अरब डॉलर को पार कर लिया है। स्विगी का इंस्टामार्ट इस सेगमेंट में लगभग 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखता है, जो प्रतिद्वंद्वी जोमैटो के ब्लिंकिट (40 प्रतिशत) से थोड़ा पीछे है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, स्विगी के क्विक-कॉमर्स ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (जीओवी) में दोगुनी वृद्धि हुई है, जबकि कुल नुकसान 2024 में 30 प्रतिशत घटकर 182 मिलियन डॉलर रह गया।यह प्रदर्शन कंपनी की रणनीतिक पहलों का नतीजा है। स्विगी ने पिछले क्वार्टर में 316 नए डार्क स्टोर्स जोड़े, जो पिछले आठ क्वार्टर्स से अधिक है। इनमें से 33 प्रतिशत 80 नए शहरों में स्थापित किए गए, जो मेट्रो और टियर-1 शहरों के अलावा छोटे बाजारों में विस्तार दर्शाता है। सीईओ श्रीहर्षा मजेटी ने कहा कि कंपनी 'सुपर एजाइल' बनी हुई है, खासकर रैपिडो जैसे नए प्रवेशियों के बीच। इसके अलावा, विज्ञापन राजस्व में 220 प्रतिशत की उछाल ने लाभप्रदता की राह प्रशस्त की है, जहां ब्रांड्स इन प्लेटफॉर्म्स पर इंपल्स बायर्स को टारगेट कर रहे हैं।हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। एंटीट्रस्ट जांच और प्रीडेटरी प्राइसिंग के आरोपों के बीच, स्विगी को जोमैटो (अब ईटरनल) से कड़ी टक्कर मिल रही है। ईटरनल के क्यू1 रिजल्ट्स ने पूरे सेक्टर को बूस्ट दिया, जहां रेवेन्यू 70 प्रतिशत बढ़ा। फिर भी, निवेशक आशावादी हैं, क्योंकि स्विगी का मूल्यांकन जोमैटो से कम है और क्यू4 एफवाई25 रिजल्ट्स में और सुधार की उम्मीद है।कुल मिलाकर, यह सर्ज क्विक-कॉमर्स की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल शॉपर्स की लहर को रेखांकित करता है। भारत में सुविधा की मांग छोटे शहरों तक फैल रही है, जो स्विगी जैसे प्लेयर्स के लिए अवसर पैदा कर रही है। लंबी अवधि में, बेहतर एक्जीक्यूशन से तेज वृद्धि और लाभप्रदता संभव है, लेकिन बाजार अस्थिरता और प्रतिस्पर्धा पर नजर रखनी होगी।
Saturday, September 20, 2025
युवा गतिशील: कैसे #NaMoYuvaRun75 नशा-मुक्त भारत की ओर दौड़ रहा है / Youth on the Move: How #NaMoYuvaRun75 is Racing Towards a Drug-Free India
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के अवसर पर शुरू हुए 'नमो युवा रन 75' अभियान ने पूरे देश को एक नई ऊर्जा से भर दिया है। यह मात्र एक मैराथन नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है, जो युवाओं को फिटनेस, नशा मुक्ति और आत्मनिर्भर भारत के संदेश के साथ जोड़ रही है। 21 सितंबर 2025 को देशभर के 75 स्थानों पर एक साथ आयोजित इस दौड़ ने लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। श्रीनगर की वादियों से लेकर उज्जैन की पावन धरती तक, हर कोने से उत्साह की लहरें उठीं।यह अभियान सेवा पखवाड़ा का हिस्सा है, जो पीएम मोदी के जन्मदिन से अगले 15 दिनों तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य 'नशा मुक्त भारत' (नशा मुक्त भारत) का सपना साकार करना है। नशे की लत ने लाखों युवाओं की जिंदगियां बर्बाद की हैं, लेकिन #NaMoYuvaRun75 युवाओं को 'नो टू ड्रग्स, यस टू फिटनेस' का मंत्र दे रहा है। दौड़ के दौरान प्रतिभागी 'फिट इंडिया' और 'स्वच्छ भारत' के नारों के साथ दौड़े, जो स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हैं। भाजपा युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) द्वारा संचालित यह कार्यक्रम पीएम की दृष्टि का प्रतीक है, जो युवाओं को सेवा, एकता और राष्ट्र निर्माण की ओर प्रेरित करता है।देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित इस इवेंट ने अभूतपूर्व भागीदारी दर्ज की। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर की सड़कें युवाओं के जोश से गूंज उठीं, जहां हजारों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में दौड़ को हरी झंडी दिखाई, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में स्थानीय नेता सक्रिय रहे। गुजरात में डीडी न्यूज के अनुसार, बड़ी संख्या में युवाओं ने व्यसन मुक्ति के संदेश के साथ दौड़ लगाई। यह दौड़ 5 किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर तक की थी, जिसमें महिलाएं, छात्र और सामान्य नागरिक शामिल हुए। सोशल मीडिया पर #NaMoYuvaRun75 ट्रेंड कर रहा है, जहां युवा अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं।इस अभियान का प्रभाव दीर्घकालिक है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, बल्कि मानसिक मजबूती भी प्रदान करता है। पीएम मोदी ने अतीत में कहा था कि युवा भारत के भविष्य हैं, और यह रन उसी दर्शन का जीवंत उदाहरण है। नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के साथ-साथ, यह पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा को भी जोड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन नशे की समस्या को 20-30 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।अंत में, #NaMoYuvaRun75 साबित करता है कि युवा शक्ति के साथ भारत नशा-मुक्त, स्वस्थ और मजबूत बनेगा। पीएम मोदी का यह विजन हर कदम पर प्रगति का प्रतीक है। जय हिंद! जय भारत!
ट्रम्प ने एच-1बी वीजा के लिए $100,000 वार्षिक शुल्क लगाने वाला कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किय / Trump Signs Executive Order Imposing $100,000 Annual H-1B Visa Fee
19 सितंबर, 2025 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश (एक्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए प्रतिवर्ष 100,000 डॉलर (लगभग 84 लाख रुपये) का नया शुल्क लगाया गया है। यह कदम अमेरिकी आप्रवासन नीति में एक बड़ा बदलाव है, जो मुख्य रूप से उच्च कुशल विदेशी श्रमिकों को लक्षित करता है। एच-1बी वीजा कार्यक्रम, जो विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों जैसे आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और शिक्षा में विदेशी पेशेवरों को तीन से छह वर्ष के लिए अमेरिका लाने की अनुमति देता है, अब कंपनियों के लिए काफी महंगा हो गया है। इस आदेश का उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों की रक्षा करना और वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग को रोकना बताया जा रहा है।एच-1बी वीजा कार्यक्रम की पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है। यह कार्यक्रम 1990 के आप्रवासन अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था, जो अमेरिकी कंपनियों को ऐसे विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त करने की अनुमति देता है जिन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न हो। प्रति वर्ष 85,000 वीजा जारी किए जाते हैं—65,000 सामान्य और 20,000 अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए। लॉटरी सिस्टम के माध्यम से चयन होता है, और वर्तमान में आवेदन शुल्क कुछ हजार डॉलर तक सीमित है। लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कार्यक्रम अमेरिकी श्रमिकों के लिए खतरा बन गया है। व्हाइट हाउस के फैक्ट शीट के अनुसार, 2025 के वित्तीय वर्ष में एक कंपनी को 5,189 एच-1बी वीजा स्वीकृत हुए, जबकि उसी दौरान 16,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की गई। इसी तरह, दूसरी कंपनी ने 1,698 वीजा प्राप्त किए लेकिन 2,400 अमेरिकी नौकरियों समाप्त कीं। ट्रंप ने कहा, "यह कार्यक्रम अमेरिकी श्रमिकों को विस्थापित कर रहा है, और हम इसे रोकेंगे।"इस आदेश के तहत, कंपनियों को प्रत्येक एच-1बी वीजा के लिए वार्षिक 100,000 डॉलर का शुल्क देना होगा, जो वीजा की अवधि (तीन वर्ष) में कुल 300,000 डॉलर तक पहुंच सकता है। वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने संवाददाताओं को बताया कि यह शुल्क "वीजा दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी खजाने में 100 अरब डॉलर से अधिक राजस्व जुटाने" के लिए है। ट्रंप ने दावा किया कि इस राशि से करों में कटौती और कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी। साथ ही, उन्होंने एक और आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत "ट्रंप गोल्ड कार्ड" नामक नया वीजा कार्यक्रम शुरू किया गया। इसमें धनी विदेशी व्यक्ति 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.4 करोड़ रुपये) देकर अमेरिकी वीजा प्राप्त कर सकते हैं, जबकि नियोक्ता 2 मिलियन डॉलर देकर प्रायोजन कर सकते हैं। एक "प्लेटिनम कार्ड" की भी योजना है, जो 5 मिलियन डॉलर में 270 दिनों की अमेरिकी यात्रा की अनुमति देगा, बिना अमेरिकी आय पर कर के।यह कदम अमेरिकी टेक उद्योग के लिए बड़ा झटका है, जो एच-1बी पर भारी निर्भर है। 2025 की पहली छमाही में अमेज़न को 12,000 से अधिक, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा को 5,000 से अधिक वीजा स्वीकृत हुए। लगभग दो-तिहाई एच-1बी नौकरियां कंप्यूटर से संबंधित हैं, और भारत व चीन से आने वाले पेशेवरों की संख्या सबसे अधिक है। भारतीय मूल की टेक कंपनियां कुल वीजों का एक-पांचवां हिस्सा प्राप्त करती हैं। द हिंदू के अनुसार, यह भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करेगा, जो पहले से ही ग्रीन कार्ड के लिए दशकों इंतजार कर रहे हैं। कंपनियां अब शुल्क वहन करने में असमर्थ हो सकती हैं, जिससे वीजा नवीकरण प्रभावित होगा।प्रतिक्रियाएं तीखी हैं। टेक लॉबी और आप्रवासन विशेषज्ञों ने प्रशासन की वैधानिक शक्तियों पर सवाल उठाए हैं। वर्तमान कानून केवल प्रोसेसिंग लागत वसूलने की अनुमति देता है, न कि इतना अधिक शुल्क। गार्जियन और रॉयटर्स के अनुसार, यह अमेरिकी नवाचार को नुकसान पहुंचा सकता है। ट्रंप समर्थक इसे "अमेरिका फर्स्ट" नीति का हिस्सा मानते हैं, जो मजदूरी दबाने और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करता है। कानूनी चुनौतियां अपेक्षित हैं, लेकिन ट्रंप ने कहा, "टेक कंपनियां खुश होंगी।"कुल मिलाकर, यह आदेश आप्रवासन बहस को नई ऊंचाई देगा। वैश्विक प्रतिभा प्रवाह बाधित हो सकता है, जबकि धनी निवेशकों के लिए रास्ता आसान।
Thursday, September 18, 2025
अदानी एंटरप्राइजेज, अदानी टोटल गैस और अन्य समूह के शेयरों में 10% तक की उछाल, क्योंकि सेबी ने हिंडनबर्ग मामले में क्लीन चिट दी।Adani Enterprises, Adani Total Gas & other group stocks jump up to 10% as it gets Sebi's clean chit in Hindenburg case
अदानी एंटरप्राइजेज, अदानी टोटल गैस और अन्य ग्रुप के शेयरों में 10% तक की तेजी आई है, क्योंकि सेबी ने हिंडनबर्ग मामले में क्लीन चिट दे दी।यह खबर 18 सितंबर 2025 को आई, जब सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों को खारिज कर दिया। हिंडनबर्ग ने जनवरी 2023 में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें अदानी ग्रुप पर स्टॉक मैनिपुलेशन, ऑफशोर टैक्स हेवन्स का गलत इस्तेमाल और शेयरों की वैल्यूएशन बढ़ाने के आरोप लगाए थे। रिपोर्ट के बाद अदानी के शेयरों में भारी गिरावट आई और ग्रुप की मार्केट वैल्यू में 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ।सेबी ने दो विस्तृत ऑर्डर जारी किए, जिनमें कहा गया कि लंबी जांच के बाद कोई उल्लंघन साबित नहीं हुआ। जांच 2018-19 से 2022-23 तक की थी। आरोप था कि अदानी ग्रुप ने तीन कंपनियों - एडिकॉर्प एंटरप्राइजेज, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स और रेहवार इंफ्रास्ट्रक्चर - को चैनल के रूप में इस्तेमाल कर फंड ट्रांसफर किए, ताकि रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के नियम तोड़े जा सकें। लेकिन सेबी ने पाया कि ये ट्रांजेक्शन वैध थे। अदानी पोर्ट्स ने एडिकॉर्प को लोन दिया, जो आगे अदानी पावर को गया। सब लोन ब्याज के साथ लौटाए गए। कोई फंड डायवर्जन या इनसाइडर ट्रेडिंग नहीं मिली।सेबी के व्होल-टाइम मेंबर कमलेश चंद्रा वर्श्नेया ने ऑर्डर में लिखा कि ये ट्रांजेक्शन रिलेटेड पार्टी के नहीं थे, इसलिए कोई पेनल्टी या कार्रवाई जरूरी नहीं। अदानी पोर्ट्स, अदानी पावर, गौतम अदानी और राजेश अदानी के खिलाफ केस बंद हो गया।अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, "सेबी ने हमारी बात साबित की कि हिंडनबर्ग के दावे बेबुनियाद थे। पारदर्शिता और ईमानदारी हमारा मूल मंत्र है।" उन्होंने निवेशकों के नुकसान पर दुख जताया और झूठ फैलाने वालों से माफी मांगी।इस फैसले के बाद 19 सितंबर को शेयर बाजार खुलते ही अदानी एंटरप्राइजेज में 8-10% की बढ़त देखी गई। अदानी टोटल गैस, अदानी ग्रीन एनर्जी, अदानी पावर जैसे स्टॉक्स भी 5-10% ऊपर चढ़े। निवेशक उत्साहित हैं, क्योंकि यह ग्रुप की विश्वसनीयता बहाल करता है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त एक्सपर्ट कमिटी ने भी पहले इन आरोपों को बकवास कहा था। कुल मिलाकर, यह अदानी ग्रुप के लिए बड़ी राहत है, जो अब बिजनेस पर फोकस कर सकेगा
Wednesday, September 17, 2025
IREDA की शेयर कीमत 18 सितंबर कोThe Indian Renewable Energy Development Agency (IREDA) share price on 18th Sept
भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास प्राधिकरण (आईआरईडीए) के शेयर की कीमत 18 सितंबर 2025 को बाजार में उछाल के साथ चर्चा में रही। एनएसई पर नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शेयर की कीमत लगभग ₹152.37 थी, जो पिछले बंद भाव ₹147.35 की तुलना में 3.41% की वृद्धि दर्शाता है। यह स्टॉक अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹240 और निम्नतम स्तर ₹137 के बीच कारोबार कर रहा है। आईआरईडीए का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹42,964 करोड़ है, जो इसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, स्टॉक में इस साल अब तक 28% की गिरावट देखी गई, जो नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बाजार सुधार को दर्शाता है।तकनीकी विश्लेषण में, स्टॉक 5-दिवसीय से 200-दिवसीय चल औसत से नीचे कारोबार कर रहा है, जो अल्पकालिक मंदी का संकेत देता है। फिर भी, आरएसआई 38.6 पर है, जो ओवरसोल्ड स्थिति की ओर इशारा करता है, और हालिया उछाल पुनर्प्राप्ति की संभावना दिखाता है। वित्तीय प्रदर्शन के लिहाज से, आईआरईडीए ने वित्त वर्ष 2025 में ₹6,742 करोड़ का राजस्व और ₹1,562 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। इसका ऋण पोर्टफोलियो ₹80,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें 72% निजी क्षेत्र की नवीकरणीय परियोजनाओं जैसे सौर, पवन, और हरित हाइड्रोजन को समर्पित है।हाल की खबरों में, आईआरईडीए ने 11 सितंबर को 7.70% सतत बांड के माध्यम से ₹453 करोड़ जुटाए, जो 2.69 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ। इसके अलावा, कंपनी ने एमएनआरई के साथ वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹8,200 करोड़ के राजस्व लक्ष्य के साथ एक प्रदर्शन समझौता किया। 22 और 26 सितंबर को निवेशक बैठकें भी निर्धारित हैं। स्टॉक की दीर्घकालिक संभावनाएं सकारात्मक हैं, विश्लेषकों ने 2025 के लिए ₹192-₹252 और 2026 तक ₹418 तक का लक्ष्य सुझाया है। निवेशकों को नवीनतम अपडेट के लिए एनएसई या मनीकंट्रोल जैसे प्लेटफॉर्म की जांच करनी चाहिए।
Tuesday, September 16, 2025
कोल इंडिया ने आंध्र प्रदेश में 209 वर्ग किमी का रेयर अर्थ ब्लॉक जीता, 34,000 करोड़ रुपये की सरकारी मिशन के तहत रेयर अर्थ तकनीक के साथ विविधीकरण किया।Coal India Secures REE Block.Coal India wins 209 sq km rare earth block in AP, diversifies with REE tech under Rs 34,000 cr govt mission.
कोल इंडिया ने आंध्र प्रदेश में 209 वर्ग किलोमीटर के रेयर अर्थ तत्व (आरईई) ब्लॉक को हासिल करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह कदम कंपनी के लिए खनन क्षेत्र में विविधीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अब तक कोयला उत्पादन पर केंद्रित थी। इस ब्लॉक को हासिल करने से कोल इंडिया रेयर अर्थ तत्वों की खोज और दोहन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी, जो उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं।भारत सरकार ने रेयर अर्थ तत्वों के खनन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 34,000 करोड़ रुपये के मिशन की घोषणा की है। इस मिशन का उद्देश्य देश को रेयर अर्थ तत्वों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करना है। कोल इंडिया की यह पहल सरकार के इस मिशन के साथ संरेखित है, जो रणनीतिक खनिजों पर निर्भरता को कम करने और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित है।रेयर अर्थ तत्व, जैसे लैंथेनम, सेरियम, और नियोडिमियम, आधुनिक तकनीकों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये तत्व इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टरबाइनों, और स्मार्टफोन्स जैसे उपकरणों में उपयोग होते हैं। कोल इंडिया इस क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निवेश कर रही है। इस ब्लॉक के हासिल होने से न केवल कंपनी का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि यह भारत की आर्थिक और सामरिक स्थिति को भी मजबूत करेगा। इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, साथ ही यह क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देगा। कोल इंडिया की यह पहल न केवल कंपनी के लिए, बल्कि भारत के रणनीतिक खनिज क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
Monday, September 15, 2025
एलआईसी को झारखंड में वित्त वर्ष 22 के लिए 92.5 करोड़ रुपये का जीएसटी डिमांड नोटिस मिला।LIC Gets 92.5 Cr GST DemandLIC faces 92.5 Cr GST demand for FY22 in Jharkhand. Includes GST, interest, and penalty; no major financial impact.
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को झारखंड राज्य में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 92.5 करोड़ रुपये का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) डिमांड नोटिस प्राप्त हुआ है। इस नोटिस में जीएसटी, ब्याज और जुर्माना शामिल है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस डिमांड का उसके वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह नोटिस झारखंड के जीएसटी अधिकारियों द्वारा जारी किया गया है, और इसमें कथित तौर पर कुछ कर-संबंधी अनुपालनों में कमी के आधार पर मांग उठाई गई है।एलआईसी, जो भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है, ने इस मांग के संबंध में स्पष्ट किया है कि वह इस मामले की समीक्षा कर रही है और उचित कानूनी कदम उठाएगी। कंपनी का मानना है कि इस डिमांड का समाधान मौजूदा नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत संभव है। एलआईसी ने अपने निवेशकों और हितधारकों को आश्वस्त किया है कि इस नोटिस से उसकी वित्तीय स्थिरता पर कोई गंभीर असर नहीं होगा, क्योंकि कंपनी के पास मजबूत वित्तीय आधार और पर्याप्त तरलता है।यह डिमांड ऐसे समय में आई है, जब एलआईसी पहले से ही अपने कारोबार को और मजबूत करने के लिए डिजिटल परिवर्तन और ग्राहक-केंद्रित योजनाओं पर ध्यान दे रही है। कंपनी ने हाल के वर्षों में अपनी परिचालन दक्षता में सुधार किया है और बाजार में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ किया है। इस नोटिस के बावजूद, एलआईसी का कहना है कि वह अपने ग्राहकों और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।एलआईसी ने यह भी कहा कि वह जीएसटी अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है और इस मसले को जल्द से जल्द हल करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। इस तरह के नोटिस बीमा और वित्तीय क्षेत्र में समय-समय पर सामने आते रहते हैं, और एलआईसी इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा मान रही है। कंपनी का दावा है कि इस डिमांड का उसके दीर्घकालिक विकास और लाभप्रदता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
Sunday, September 14, 2025
राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस हर साल 15 सितंबर को भारत के महान इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के सम्मान में मनाया जाता है।National Engineers' Day is celebrated every year on September 15 to honor the birth anniversary of Sir Mokshagundam Visvesvaraya, one of India's greatest engineers
राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान इंजीनियर और भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के उपलक्ष्य में समर्पित है। सर विश्वेश्वरैया, जिन्हें आमतौर पर सर एम.वी. के नाम से जाना जाता है, ने अपने असाधारण योगदान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियों के माध्यम से भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दिन को मनाने का उद्देश्य न केवल उनकी उपलब्धियों को याद करना है, बल्कि इंजीनियरिंग समुदाय को प्रेरित करना और उनके योगदान को देश के विकास में महत्वपूर्ण मानना है।सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर, 1861 को कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले के मुददेनहल्ली गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृहनगर में पूरी की और बाद में बैंगलोर के सेंट्रल कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की, जहां उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी शिक्षा और समर्पण ने उन्हें भारत के सबसे प्रमुख इंजीनियरों में से एक बनाया।सर एम.वी. का सबसे उल्लेखनीय योगदान कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध का निर्माण है, जो कर्नाटक के मांड्या जिले में स्थित है। इस बांध ने न केवल सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि यह उस समय की इंजीनियरिंग की उत्कृष्टता का प्रतीक भी बना। उनके द्वारा डिजाइन की गई स्वचालित फ्लडगेट प्रणाली, जिसे 'विश्वेश्वरैया गेट' के नाम से जाना जाता है, एक क्रांतिकारी नवाचार था। इस प्रणाली ने बांधों के संचालन को और अधिक कुशल और सुरक्षित बनाया, जिसका उपयोग आज भी कई जल परियोजनाओं में किया जाता है।इसके अलावा, सर विश्वेश्वरैया ने हैदराबाद में मूसी नदी पर बाढ़ नियंत्रण प्रणाली, पुणे में खडकवासला बांध की मरम्मत, और ओडिशा में बाढ़ प्रबंधन जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया। उनके कार्यों ने न केवल भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया, बल्कि लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में भी मदद की। उनकी दूरदर्शिता और तकनीकी कौशल ने उन्हें 'आधुनिक भारत के इंजीनियरिंग के जनक' का दर्जा दिलाया।सर विश्वेश्वरैया केवल एक इंजीनियर ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट प्रशासक और दूरदर्शी नेता भी थे। उन्होंने मैसूर रियासत के दीवान के रूप में कार्य किया और इस दौरान शिक्षा, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास में कई सुधार किए। उनके प्रयासों से मैसूर में औद्योगीकरण को बढ़ावा मिला और कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना हुई।राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस के अवसर पर, विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, इंजीनियरिंग संगठनों और सरकारी निकायों द्वारा सेमिनार, कार्यशालाएं और प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं। यह दिन इंजीनियरों को उनकी कड़ी मेहनत और नवाचार के लिए सम्मानित करने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, यह युवा पीढ़ी को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। सर विश्वेश्वरैया का जीवन और कार्य आज भी हर इंजीनियर के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें यह सिखाता है कि समर्पण, नवाचार और कड़ी मेहनत से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।इस प्रकार, राष्ट्रीय इंजीनियर्स दिवस न केवल सर एम.वी. की विरासत को जीवित रखता है, बल्कि यह देश के विकास में इंजीनियरिंग के महत्व को भी रेखांकित करता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक का उपयोग नहीं है, बल्कि यह समाज को बेहतर बनाने का एक साधन है।
Saturday, September 13, 2025
पीएम का पूर्वोत्तर दौरा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है / PM's Northeast Tour Marks Historic Milestone for Region
पीएम का पूर्वोत्तर दौरा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 13 से 15 सितंबर 2025 तक चला पूर्वोत्तर भारत का दो दिवसीय दौरा न केवल विकास की नई ऊंचाइयों का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्र के लंबे समय से चली आ रही अलगाव की भावना को भी समाप्त करने का माध्यम सिद्ध हुआ। इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने मिजोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में कुल 71,850 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। यह दौरा पूर्वोत्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ, जहां कनेक्टिविटी, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक एकीकरण पर विशेष जोर दिया गया। पीएम मोदी ने अपने भाषणों में बार-बार जोर दिया कि पूर्वोत्तर अब 'फ्रंटियर' नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा का 'ग्रोथ इंजन' बन चुका है। इस दौरे ने न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में क्रांति लाई, बल्कि राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक सद्भाव को भी मजबूत किया। आइए, इस दौरे की पूरी जानकारी विस्तार से समझें।दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमिप्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'विकसित भारत 2047' के विजन का हिस्सा था। पूर्वोत्तर भारत, जो लंबे समय से भौगोलिक अलगाव, उग्रवाद और अविकास की समस्या से जूझ रहा था, अब केंद्र सरकार की प्राथमिकता बन चुका है। 2014 से अब तक मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर में 12 से अधिक शांति समझौते किए हैं, जिनमें बोरो (2020), ब्रू-रेआंग (2020), कार्बी आंगलॉन्ग (2021), त्रिपुरा मोथा (2024) और उल्फा (2023) शामिल हैं। इन समझौतों ने क्षेत्र में शांति की नींव रखी है।इस दौरे से पहले, पूर्वोत्तर में रेलवे बजट को पांच गुना बढ़ाया गया है। 2014-2025 तक कुल 62,477 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही 10,440 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा, "पूर्वोत्तर के लोग स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में हमेशा आगे रहे हैं। आज हम उन्हें मुख्यधारा में ला रहे हैं।" यह दौरा मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के बाद पीएम का पहला दौरा था, जो क्षेत्र में विश्वास बहाली का संकेत था। कुल मिलाकर, यह दौरा पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया का गेटवे बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम था।मिजोरम में ऐतिहासिक रेलवे उद्घाटन: कनेक्टिविटी की नई क्रांतिदौरे का पहला पड़ाव मिजोरम की राजधानी आइजोल था, जहां 13 सितंबर को पीएम मोदी ने 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया। यह मिजोरम की आजादी के बाद पहली प्रमुख रेल कनेक्टिविटी थी, जो राज्य को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। बैराबी (असम के हैलाकांडी जिले के पास) से सैरांग (आइजोल के पास) तक बनी यह लाइन एक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जो पहाड़ी इलाकों की चुनौतियों को पार करती हुई बनी है। इस परियोजना की लागत 8,071 करोड़ रुपये आई, और यह पूर्वोत्तर में आइजोल को गुवाहाटी, अगरतला और ईटानगर के बाद चौथा रेल-जुड़ा राजधानी शहर बनाती है।पीएम मोदी ने आइजोल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "यह रेल लाइन मिजोरम को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। इससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।" उन्होंने तीन नई एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई: आइजोल-दिल्ली राजधानी, आइजोल-गुवाहाटी और आइजोल-कोलकाता। इसके अलावा, 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की अन्य परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (मिजोरम को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने वाला) और सैरांग-ह्मावंगबुचुआ रेल लाइन शामिल हैं। स्थानीय निवासियों और छात्रों ने इसकी सराहना की, कहा कि इससे कनेक्टिविटी में सुधार होगा और आर्थिक अवसर बढ़ेंगे।मिजोरम में 87% आबादी ईसाई और 93-94% आदिवासी है। पीएम मोदी ने यहां भाजपा की 'एंटी-माइनॉरिटी' वाली छवि को तोड़ा, जब उन्होंने मिजो समाज के बलिदान, सेवा, साहस और करुणा के मूल्यों की प्रशंसा की। नेशनल बांस मिशन से हजारों नौकरियां पैदा हुईं, पीएम-किसान योजना से 1.2 लाख किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिल रहे हैं, और आयुष्मान भारत से 2.5 लाख लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा मिली। यह दौरा पूर्वोत्तर के अलगाव को समाप्त करने का प्रतीक था।मणिपुर में शांति और विकास का संदेश: 2023 हिंसा के बाद पहला दौरामिजोरम से सीधे मणिपुर पहुंचे पीएम मोदी ने इंफाल के ऐतिहासिक कांगला किले में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यहां उन्होंने 1,200 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया, और कुल 8,500 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात दी। मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 2023 में भड़की हिंसा के बाद फरवरी 2024 से राष्ट्रपति शासन है। यह पीएम का पहला दौरा था, जो सुरक्षा और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था।पीएम ने कहा, "मैं आपके साथ खड़ा हूं, नई सुबह दूर नहीं।" उन्होंने पूर्वोत्तर में ग्रामीण सड़कों, हाईवे, मोबाइल कनेक्टिविटी, बिजली, पाइप्ड वाटर और एलपीजी कनेक्शन के विस्तार का जिक्र किया। मणिपुर को रेल, सड़क और हवाई अड्डा परियोजनाओं से जोड़ा जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी, और बड़ी संख्या में लोग सभा में पहुंचे। हालांकि, कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए, लेकिन पीएम ने शांति और विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति से पूर्वोत्तर को नुकसान हुआ, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे विकास का इंजन बना दिया। यह दौरा मणिपुर में विश्वास बहाली का प्रयास था, जहां 250 से अधिक मौतें और 60,000 विस्थापन हो चुके हैं।असम और अन्य राज्यों में विकास की बाढ़: 71,850 करोड़ की सौगातदौरे का अगला चरण असम था, जहां पीएम मोदी ने भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया। असम को रिफाइनरी, सड़कें और पर्यटन परियोजनाएं मिलीं। कुल मिलाकर, पांच राज्यों में 71,850 करोड़ की परियोजनाएं लॉन्च हुईं, जिनमें पूर्वोत्तर विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NEIDS) और पीएम-डेवाइन (प्रधानमंत्री विकास पहल फॉर नॉर्थ ईस्ट) शामिल हैं। ये योजनाएं सामाजिक विकास, युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका सृजन पर केंद्रित हैं।पश्चिम बंगाल और बिहार में भी कार्यक्रम हुए, जहां बिहार को सबसे बड़ा पावर प्लांट मिला। पीएम ने कहा, "पूर्वोत्तर अब ASEAN का गेटवे बनेगा।" रेलवे में नई ट्रेनें, हाईवे और एयरपोर्ट्स से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। सियांग अपर मल्टी-पर्पस प्रोजेक्ट और सेला टनल जैसी परियोजनाएं क्षेत्र को मजबूत करेंगी।ऐतिहासिक महत्व और प्रभाव: पूर्वोत्तर का नया युगयह दौरा पूर्वोत्तर के लिए ऐतिहासिक था क्योंकि मोदी सरकार ने 11 वर्षों में पूर्वोत्तर के दौरे मनमोहन सिंह के 10 वर्षों के 8 दौरे की तुलना में 76 दौरे किए। मणिपुर में मोदी के 8 दौरे हुए, जबकि सिंह के 3। पूर्वोत्तर अब GDP में 2.3% योगदान दे रहा है, लेकिन क्षमता बहुत अधिक है। इस दौरे ने उग्रवाद कम किया, पर्यटन बढ़ाया और आर्थिक एकीकरण को मजबूत किया।हालांकि, कुछ आलोचनाएं हैं कि यह 'टोकनिज्म' है, लेकिन स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। नेपाल की घटनाओं से प्रभावित क्षेत्र में स्थिरता लाने का प्रयास भी था। कुल मिलाकर, यह दौरा पूर्वोत्तर को मुख्यधारा में लाने का मील का पत्थर साबित हुआ।निष्कर्ष: विकास की नई सुबहपीएम मोदी का पूर्वोत्तर दौरा न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का उत्सव था, बल्कि एकता और प्रगति का संदेश भी। इससे क्षेत्र में रोजगार, पर्यटन और व्यापार को बल मिलेगा। जैसा कि पीएम ने कहा, "जो पहले उपेक्षित थे, वे अब आगे हैं।" यह दौरा भारत की विकास यात्रा में एक चमकदार अध्याय जोड़ता है, जो पूर्वोत्तर को वैश्विक पटल पर चमकाने का वादा करता है।
Friday, September 12, 2025
कैश बनाम फ्यूचर्स बनाम ऑप्शंस / Cash vs Futures vs Options
वित्तीय बाजारों में निवेश के तीन प्रमुख तरीके हैं: कैश मार्केट (नकद बाजार), फ्यूचर्स (भविष्य अनुबंध) और ऑप्शंस (विकल्प अनुबंध)। ये सभी अंतर्निहित संपत्तियों जैसे स्टॉक, कमोडिटी, करेंसी या इंडेक्स पर आधारित होते हैं, लेकिन इनकी संरचना, जोखिम, लाभ और उपयोग अलग-अलग हैं। कैश मार्केट सबसे सरल और पारंपरिक है, जहां तत्काल खरीद-बिक्री होती है। वहीं, फ्यूचर्स और ऑप्शंस डेरिवेटिव उत्पाद हैं, जो भविष्य की कीमतों पर सट्टा लगाने या जोखिम हेज करने के लिए उपयोगी हैं।कैश मार्केट में निवेशक सीधे संपत्ति खरीदते हैं और तुरंत स्वामित्व प्राप्त करते हैं। यह लंबी अवधि के निवेश के लिए आदर्श है, लेकिन पूंजी की आवश्यकता अधिक होती है। फ्यूचर्स अनुबंध में दोनों पक्ष बाध्य होते हैं कि वे भविष्य की निश्चित तारीख पर निश्चित मूल्य पर संपत्ति खरीदें या बेचें। यह लीवरेज प्रदान करता है, यानी कम पूंजी से बड़ा व्यापार, लेकिन जोखिम भी अधिक है। ऑप्शंस में खरीदार को केवल अधिकार मिलता है (बाध्यता नहीं), इसलिए जोखिम सीमित रहता है, लेकिन प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है।भारतीय बाजार में, एनएसई (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) और बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) पर ये सभी ट्रेड होते हैं। 2025 तक, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ा है, खासकर रिटेल निवेशकों में। यह लेख सरल भाषा में इनकी तुलना, कार्यप्रणाली, लाभ-जोखिम और उदाहरण देगा, ताकि शुरुआती निवेशक आसानी से समझ सकें। निवेश से पहले हमेशा जोखिम मूल्यांकन करें और सलाह लें।
कैश मार्केट: मूल बातें (लगभग 400 शब्द)कैश मार्केट, जिसे स्पॉट मार्केट या नकद बाजार भी कहते हैं, वह स्थान है जहां संपत्ति की खरीद-बिक्री तत्काल होती है। यहां कोई भविष्य का अनुबंध नहीं होता; सौदा होने पर ही भुगतान और हस्तांतरण होता है। भारत में, स्टॉक मार्केट का कैश सेगमेंट मुख्य रूप से इक्विटी शेयरों के लिए है, लेकिन कमोडिटी या करेंसी में भी लागू होता है।कार्यप्रणाली: जब आप एक स्टॉक खरीदते हैं, तो ट्रेड डे के बाद T+1 (अगले दिन) सेटलमेंट होता है। उदाहरण के लिए, यदि आप रिलायंस शेयर ₹2500 में खरीदते हैं, तो आपको पूरी राशि (₹2500 x लॉट साइज) चुकानी पड़ती है। कोई मार्जिन नहीं, पूर्ण भुगतान। ट्रेडिंग घंटे सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 तक। लाभ-हानि बाजार मूल्य के उतार-चढ़ाव पर निर्भर।लाभ:तत्काल स्वामित्व: आप संपत्ति के मालिक बन जाते हैं, डिविडेंड या वोटिंग राइट्स मिलते हैं।
कम जटिलता: कोई समाप्ति तिथि या लीवरेज नहीं, इसलिए शुरुआती के लिए आसान।
लंबी अवधि निवेश: कंपाउंडिंग का फायदा, जैसे म्यूचुअल फंड या डायरेक्ट स्टॉक होल्डिंग।
कम ब्रोकरेज: फ्यूचर्स/ऑप्शंस की तुलना में कम शुल्क।
जोखिम:पूंजी की अधिक आवश्यकता: छोटे निवेशक बड़े लॉट नहीं खरीद पाते।
बाजार उतार-चढ़ाव: शेयर गिरने पर नुकसान, लेकिन ऊपर जाने पर लाभ।
लिक्विडिटी रिस्क: कुछ स्टॉक कम ट्रेड होते हैं।
उदाहरण: मान लीजिए आप टाटा मोटर्स का शेयर ₹500 में 100 यूनिट खरीदते हैं (कुल ₹50,000)। यदि कीमत ₹600 हो जाती है, तो बेचकर ₹10,000 लाभ। यदि गिरकर ₹400, तो ₹10,000 नुकसान। कोई अतिरिक्त दायित्व नहीं।कैश मार्केट स्थिर निवेश के लिए बेस्ट है, लेकिन स्पेकुलेशन के लिए सीमित। 2025 में, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे ग्रो या जेरोधा ने इसे आसान बनाया है।
फ्यूचर्स: मूल बातें (लगभग 500 शब्द)फ्यूचर्स एक डेरिवेटिव अनुबंध है, जो दो पक्षों के बीच समझौता है कि वे भविष्य की निश्चित तारीख (समाप्ति) पर निश्चित मूल्य (फ्यूचर्स प्राइस) पर संपत्ति खरीदेंगे या बेचेंगे। यह अनिवार्य है; दोनों पक्ष बाध्य हैं। भारत में, फ्यूचर्स स्टॉक, इंडेक्स (निफ्टी, बैंक निफ्टी), कमोडिटी (सोना, तेल) पर उपलब्ध हैं। लॉट साइज फिक्स्ड होता है, जैसे निफ्टी फ्यूचर्स में 25 यूनिट।कार्यप्रणाली: ट्रेडिंग कैश की तरह होती है, लेकिन सेटलमेंट मासिक (अंतिम गुरुवार)। मार्क-टू-मार्केट (MTM) डेली होता है, यानी रोजाना लाभ-हानि अकाउंट में एडजस्ट। मार्जिन केवल 10-20% लगता है (लीवरेज), लेकिन एक्सपोजर मार्जिन भी। यदि नुकसान, अतिरिक्त मार्जिन जमा करें, वरना पोजीशन स्क्वेयर ऑफ।लाभ:लीवरेज: कम पूंजी से बड़ा एक्सपोजर, जैसे ₹1 लाख मार्जिन से ₹10 लाख का ट्रेड।
हेजिंग: किसान फसल कीमत लॉक कर सकते हैं, या निवेशक पोर्टफोलियो प्रोटेक्ट।
सट्टेबाजी: बाजार दिशा पर दांव, उच्च रिटर्न संभावना।
लिक्विडिटी: उच्च वॉल्यूम, आसान एंट्री-एक्जिट।
जोखिम:असीमित नुकसान: बाजार उल्टा गया तो बड़ा लॉस, जैसे लीवरेज से 10 गुना नुकसान।
मार्जिन कॉल: अचानक मार्जिन बढ़ सकता है।
समाप्ति जोखिम: एक्सपायरी पर फोर्स्ड सेटलमेंट।
वोलैटिलिटी: 2025 में, महंगाई ने फ्यूचर्स को प्रभावित किया।
उदाहरण: निफ्टी फ्यूचर्स ₹20,000 पर लॉट (25 यूनिट) खरीदते हैं, मार्जिन ₹50,000। यदि एक्सपायरी पर ₹20,500, तो लाभ ₹12,500 (500 x 25)। यदि ₹19,500, तो ₹12,500 नुकसान। हेजिंग में, यदि आपके पास निफ्टी स्टॉक हैं, फ्यूचर्स बेचकर गिरावट से बचाव।फ्यूचर्स अनुभवी ट्रेडर्स के लिए, उच्च रिस्क-रिवार्ड। SEBI नियमों से सुरक्षित, लेकिन 90% रिटेल ट्रेडर्स घाटा उठाते हैं।
3 sources
ऑप्शंस: मूल बातें (लगभग 500 शब्द)ऑप्शंस भी डेरिवेटिव है, लेकिन खरीदार को केवल अधिकार मिलता है (बाध्यता नहीं) कि वह भविष्य में निश्चित मूल्य (स्ट्राइक प्राइस) पर संपत्ति खरीदे (कॉल ऑप्शन) या बेचे (पुट ऑप्शन)। विक्रेता को प्रीमियम मिलता है, लेकिन बाध्य होता है। प्रकार: यूरोपियन (केवल एक्सपायरी पर एक्सरसाइज) और अमेरिकन (कभी भी)। भारत में इंडेक्स ऑप्शंस यूरोपियन हैं।कार्यप्रणाली: प्रीमियम (ऑप्शन वैल्यू) चुकाकर खरीदें। ITM (इन द मनी), ATM (अट द मनी), OTM (आउट ऑफ द मनी) के आधार पर प्रीमियम बदलता। एक्सपायरी पर, यदि फायदेमंद तो एक्सरसाइज, वरना व्यर्थ। ग्रीक्स (डेल्टा, गामा, थीटा) मूल्य प्रभावित करते।लाभ:सीमित जोखिम: खरीदार का अधिकतम नुकसान प्रीमियम तक।
लचीलापन: हेजिंग, इनकम जेनरेशन (प्रीमियम सेलिंग) या लीवरेज।
उच्च लाभ: कम पूंजी से बड़ा रिटर्न, जैसे OTM कॉल में।
रणनीतियां: स्ट्रैडल, स्ट्रैंगल, बुल स्प्रेड आदि।
जोखिम:समय क्षय: एक्सपायरी नजदीक प्रीमियम घटता (थीटा)।
विक्रेता का असीमित जोखिम: कॉल बेचने पर ऊपर जाने पर बड़ा लॉस।
वोलैटिलिटी: IV (इम्प्लाइड वोलेटिलिटी) प्रभावित।
कॉम्प्लेक्सिटी: ग्रीक्स समझना जरूरी।
उदाहरण: निफ्टी ₹20,000 पर, ₹20,100 स्ट्राइक कॉल ऑप्शन ₹50 प्रीमियम पर खरीदें (कुल ₹1250, लॉट 25)। यदि एक्सपायरी पर ₹20,500, लाभ ₹10,000 (400 x 25 - प्रीमियम)। यदि ₹19,500, नुकसान केवल प्रीमियम ₹1250। पुट में, गिरावट पर लाभ।ऑप्शंस रचनात्मक ट्रेडर्स के लिए, लेकिन 80% ऑप्शंस एक्सपायरी पर व्यर्थ होते हैं।
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मुख्य अंतरों की तुलना (लगभग 200 शब्द)नीचे टेबल में सरल तुलना:विशेषता
कैश मार्केट
फ्यूचर्स
ऑप्शंस
परिभाषा
तत्काल खरीद-बिक्री।
भविष्य अनुबंध, बाध्यकारी।
अधिकार, गैर-बाध्यकारी।
निपटान
T+1 तत्काल।
मासिक एक्सपायरी, MTM।
एक्सपायरी या पहले।
पूंजी
पूर्ण भुगतान।
मार्जिन (10-20%)।
प्रीमियम (खरीदार), मार्जिन (विक्रेता)।
जोखिम
बाजार मूल्य तक सीमित।
असीमित।
खरीदार: प्रीमियम तक; विक्रेता: असीमित।
लाभ
स्वामित्व, डिविडेंड।
लीवरेज, हेजिंग।
लचीलापन, सीमित जोखिम।
उपयोग
लॉन्ग-टर्म निवेश।
सट्टा/हेज।
रणनीतियां।
Thursday, September 11, 2025
Infosys/इन्फोसिस ने ₹18,000 करोड़ के बायबैक की योजना बनाईइन्फोसिस ने 10 करोड़ शेयरों के लिए ₹1,800 प्रति शेयर की दर से बायबैक को मंजूरी दी, जो कुल चुकता पूंजी का 2.41% है।Infosys Plans ₹18,000 Cr BuybackInfosys approves ₹1,800/share buyback for 10 crore shares, covering 2.41% of paid-up capital.
इन्फोसिस, भारत की अग्रणी आईटी कंपनियों में से एक, ने ₹18,000 करोड़ के शेयर बायबैक योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत कंपनी ने ₹1,800 प्रति शेयर की दर से 10 करोड़ शेयरों को वापस खरीदने की मंजूरी दी है, जो कंपनी की कुल चुकता पूंजी का 2.41% हिस्सा है। यह कदम निवेशकों के लिए मूल्य सृजन और कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।बायबैक का उद्देश्य कंपनी के अतिरिक्त नकदी भंडार का उपयोग करना और शेयरधारकों को लाभ पहुंचाना है। इन्फोसिस की मजबूत बैलेंस शीट और लगातार बढ़ते मुनाफे ने इस बड़े पैमाने पर बायबैक को संभव बनाया है। ₹1,800 प्रति शेयर की कीमत बाजार मूल्य से प्रीमियम पर है, जो निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकती है। यह कदम शेयर की कीमत को समर्थन देने और प्रति शेयर आय (EPS) को बढ़ाने में मदद करेगा, क्योंकि बायबैक के बाद बकाया शेयरों की संख्या कम हो जाएगी।बायबैक से कंपनी की पूंजी संरचना को अनुकूलित करने और शेयरधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन की उम्मीद है। यह निवेशकों के बीच कंपनी के प्रति विश्वास को दर्शाता है, जो यह संकेत देता है कि प्रबंधन को लगता है कि शेयर का वर्तमान मूल्यांकन इसके वास्तविक मूल्य से कम है। साथ ही, यह कदम बाजार में सकारात्मक संदेश भेजता है, जिससे शेयर की मांग बढ़ सकती है।हालांकि, बायबैक के दीर्घकालिक प्रभावों का विश्लेषण आवश्यक है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नकदी का उपयोग भविष्य के निवेश या अधिग्रहण के अवसरों को सीमित कर सकता है। फिर भी, इन्फोसिस की मजबूत नकदी स्थिति और परिचालन दक्षता को देखते हुए, यह निर्णय रणनीतिक रूप से सोचा-समझा प्रतीत होता है। कुल मिलाकर, यह बायबैक निवेशकों और बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
Wednesday, September 10, 2025
जुपिटर वैगन्स की सहायक कंपनी को रेलवे बोर्ड से 9,000 एलएचबी एक्सल्स के लिए एलओए प्राप्त हुआ है। यह ऑर्डर 113 करोड़ रुपये मूल्य का है।Jupiter Wagons' subsidiary received LOA from Railway Board for 9,000 LHB Axles. The order, valued at Rs. 113 crore.
जुपिटर वैगन्स लिमिटेड, जो देश की एक बड़ी वैगन और रेलवे उपकरण निर्माण कंपनी है, ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की सहायक इकाई को रेलवे बोर्ड से एक बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ है। इस ऑर्डर के तहत 9,000 एलएचबी एक्सल्स (LHB Axles) की आपूर्ति की जाएगी। इस अनुबंध का कुल मूल्य लगभग 113 करोड़ रुपये है। यह खबर कंपनी और इसके निवेशकों के लिए बहुत ही उत्साहजनक है क्योंकि इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और भविष्य में और भी बड़े अवसर मिल सकते हैं।
एलएचबी कोच भारतीय रेलवे के लिए आधुनिक और सुरक्षित माना जाता है। इन कोचों में इस्तेमाल होने वाले एक्सल, ट्रेन की मजबूती और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में रेलवे बोर्ड का यह ऑर्डर दर्शाता है कि जुपिटर वैगन्स गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मुहैया कराने में सक्षम है और रेलवे उसके काम पर भरोसा करता है।
यह ऑर्डर न केवल कंपनी के लिए लाभकारी रहेगा, बल्कि देश में मेक इन इंडिया अभियान को भी प्रोत्साहन देगा। बड़ी मात्रा में उत्पादन से स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे और तकनीकी क्षमता में इज़ाफा होगा। साथ ही, इस तरह के अनुबंध विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने में भी सहायक सिद्ध होते हैं।
इस ऑर्डर को समय पर और सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद कंपनी को भविष्य में रेलवे और अन्य औद्योगिक इकाइयों से और भी बड़े अनुबंध मिलने की उम्मीद है। इससे कंपनी की बाज़ार में साख काफी बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, रेलवे बोर्ड से जुपिटर वैगन्स की सहायक कंपनी को मिला यह 9,000 एलएचबी एक्सल्स का 113 करोड़ रुपये.
नेपाल में GenZ का विरोध प्रदर्शन/GenZ protest in Nepal
नेपाल में सितंबर 2025 में 'Gen Z protest' एक व्यापक युवा आंदोलन था, जिसे मुख्य रूप से 1996 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं ने शुरू किया था, जिन्हें जनरेशन जेड (Gen Z) के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन ने नेपाल की राजनीति, सामाजिक व्यवस्था, और सरकार की नीतियों को सख्त चुनौती दी। इस आंदोलन के प्रमुख कारण और घटनाक्रम निम्नलिखित हैं:
प्रदर्शन के कारण
सोशल मीडिया प्रतिबंध
सरकार ने 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब आदि को बंद कर दिया था क्योंकि वे निर्धारित समय पर स्थानीय पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे। यह प्रतिबंध युवाओं की अभिव्यक्ति और जुड़ाव के मुख्य माध्यम को बंद कर देने जैसा था, जिससे युवा क्रोधित और निराश हो गए। सोशल मीडिया प्रतिबंध ने उनके आवाज़ उठाने के मंच को छीन लिया, जिससे आंदोलन और तेज हो गया.
भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी
नेपाल में लंबे समय से फैले भ्रष्टाचार और अभिजात वर्ग के संरक्षण की बात Gen Z युवाओं के आक्रोष की मुख्य वजह थी। वे पुराने राजनीतिक नेताओं और उनके परिवारों की विलासिता और भ्रष्टाचार की आलोचना कर रहे थे, जिन्हें "Nepo Kids" यानी 'नेपोटिज्म वाले बच्चे' कहा गया। ये नेता और उनके बच्चे आम जनता से बड़े आर्थिक और सामाजिक लाभ उठाते रहे, जबकि युवाओं को रोजगार, शिक्षा, और अवसरों की कमी का सामना करना पड़ा.
युवाओं की बेरोज़गारी और सामाजिक असमानता
नेपाल में युवाओं की बेरोज़गारी बढ़ रही है। आर्थिक असमानता और अवसरों की कमी ने युवा वर्ग के बीच बेचैनी और गुस्सा बढ़ा दिया। युवा वर्ग महसूस कर रहा था कि सरकार उनकी जरूरतों और भविष्योन्मुखी नीतियों में कोई ध्यान नहीं दे रही है.
सत्ता पर निरंतर हावी राजनीतिक व्यवस्था
नेपाल में 2008 से स्थापित गणराज्य के बाद भी राजनीतिक व्यवस्था में व्यापक अस्थिरता और निरंतर सत्ता संघर्ष जारी रहा। Gen Z ने राजनीतिक भ्रष्टाचार और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ अपनी मांगों को तेज किया, जिसमें जवाबदेही, न्याय, और पारदर्शिता की गुंजाइश चाही गई.
प्रदर्शन की घटनाएं और प्रभाव
युवाओं ने बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध जताया, जिन्होंने पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किया, जिससे हिंसात्मक झड़पें हुई। पुलिस ने प्रतिबंधित प्रदर्शन को रोकने के लिए गोली चलाई जिसमें 19 से अधिक युवाओं की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हुए.
प्रदर्शनकारी संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, और कई राजनीतिक नेताओं के घरों पर आक्रमण करके आग लगा दी। प्रदर्शन के दौरान कई पूर्व प्रधानमंत्रियों और प्रभावशाली नेताओं के आवास क्षतिग्रस्त हुए.
बढ़ते दबाव के चलते प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया, जिससे नेपाल की राजनीतिक स्थिति और भी अनिश्चित हो गई.
सरकार ने कर्फ्यू लगाया और सुरक्षा बलों की मदद से हिंसा पर काबू पाने की कोशिश की। सोशल मीडिया प्रतिबंध भी वापस लिया गया, लेकिन युवाओं की बुनियादी मांगें जारी रहीं.
निष्कर्ष
नेपाल का Gen Z आंदोलन एक युवा विद्रोह है जिसने भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता, और अभिजात वर्ग के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। सोशल मीडिया प्रतिबंध ने इस विद्रोह को भड़काया, लेकिन इसकी जड़ें व्यापक राजनीतिक और आर्थिक असंतोष में हैं। यह आंदोलन नेपाल की युवा पीढ़ी की बढ़ती राजनीतिक चेतना और सामाजिक बदलाव की मांग को दर्शाता है, जो पारंपरिक सत्ता संरचनाओं को चुनौती दे रहा है.
यह आन्दोलन नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है, जिसने देश के नेतृत्व और नीतियों को पुनः सोचने पर मजबूर किया है। युवाओं की यह आवाज़ भ्रष्टाचार, असमानता, और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को लेकर गहरी चिंता और बदलाव की आकांक्षा व्यक्त करती है।
यह विस्तार से बताया गया है कि Gen Z प्रदर्शन किस कारण और किस प्रकार हुआ और इसका व्यापक प्रभाव नेपाल की राजनीति और समाज पर पड़ा।
Tuesday, September 9, 2025
भारत में सोने की कीमतें बढ़कर 10 ग्राम पर ₹1,12,660 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं।Gold prices jumped reaching a record high of ₹1,12,660 per 10 grams in India.
भारत में सोने की कीमतें हाल ही में ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जहां 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,12,660 प्रति 10 ग्राम तक रिकॉर्ड किया गया है । पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और घरेलू मांग के चलते सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है ।
इस समय 22 कैरेट सोने का रेट भी ₹1,10,606 प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है, जबकि 18 कैरेट के लिए यह ₹90,497 प्रति 10 ग्राम है । खास festivals, निवेशक रुचि, और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारणों से सोना सुरक्षित निवेश माना जा रहा है ।
2025 में अब तक सोने के भाव में ₹24,000 से अधिक की वृद्धि देखी जा चुकी है, जिससे बहुत से लोग इसकी खरीदारी को लेकर सतर्क हुए हैं । विशेषज्ञों की राय है कि ऐसे ऊँचे दामों के चलते मांग में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन निवेश के लिए सोना अब भी भारत में लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, और कच्चे तेल की महंगाई हैं । इसके अलावा वैश्विक राजनीतिक अनिश्चितता, निवेशकों की सुरक्षा के प्रति बढ़ती रुचि, और त्योहारों के मौसम में मांग में वृद्धि भी अहम् रोल निभाते हैं । बैंकों के ब्याज दरों में कटौती और आर्थिक मंदी के डर के चलते भी लोग सोने में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं । इन वजहों से भारत में सोने की कीमतें रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं
Monday, September 8, 2025
पंजाब बाढ़ - सेना ने बाढ़ राहत कार्यों में तेज़ी लाईPunjab Flood- Army intensifies flood relief efforts
पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ ने राज्य के लगभग 1900 गाँवों को प्रभावित किया है और 43 से अधिक लोगों की जान चली गई है। इस आपदा में लगभग 4 लाख एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे किसान और ग्रामीण जनता काफी प्रभावित हुई है। भारी बारिश, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से आया अतिरिक्त पानी, और विभिन्न बाँधों से पानी छोड़े जाने के कारण, पंजाब में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जो कई दशकों में सबसे खराब है।
सेना की राहत और बचाव कार्य
भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन राहत’ नामक अभियान के तहत राहत और पुनर्स्थापना कार्य तेज़ कर दिए हैं। सेना की पश्चिमी कमान ने अब तक 82 HADR मिशन किए हैं, जिसमें 59 आर्मी कॉलम और 17 इंजीनियर टास्क फोर्स तैनात की गई हैं। सेना के जवानों ने 6,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है और 13,000 से अधिक लोगों को चिकित्सा सहायता दी है। हेलीकॉप्टरों का उपयोग करते हुए, ज़रूरी दवाइयां, पानी, और 48 टन राशन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचाया गया है।
राहत कार्यों का विस्तृत विवरण
सेना प्रशासन ने स्थानीय संगठनों जैसे NDRF और SDRF के साथ मिलकर लोगों के लिए भोजन, पानी, और मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाई। सैनिकों ने रात-दिन काम करके बाँधों को मजबूत किया, टूटे पुलों की मरम्मत की, और प्रमुख सड़कों की बहाली की। प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था को बहाल करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई।
चुनौतियाँ और सरकार का सहयोग
कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आजीविका पर बुरी तरह असर पड़ा है। राज्य सरकार ने केंद्र से तुरंत राहत और वित्तीय सहायता की माँग की है। जिले के प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लगातार जागरूक कर रहे हैं। एपेक्स प्रशासन बाढ़ नियंत्रण और जल स्तर निगरानी केंद्र बनाए गए हैं, ताकि बाढ़ की स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
इस बाढ़ और राहत कार्यों में सेना की तत्परता, संगठन और समर्पण ने हज़ारों लोगों की जान बचाने और हालात सामान्य करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
Sunday, September 7, 2025
Swiggy का शेयर मूल्य आज सुबह 09:20 बजे 4%+ बढ़कर 457+ हो गया।Swiggy's share price increased by 4%+ to 457+ at 09:20 AM today
Swiggy के शेयर मूल्य में 3.83% की वृद्धि और 455.85 तक पहुंचने का मुख्य कारण प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों द्वारा “Buy” रेटिंग देना और कंपनी के भविष्य की विकास संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण है। Nomura जैसी वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी ने Swiggy पर कवरेज शुरू करते हुए इसका टारगेट प्राइस ₹550 रखा, जिससे निवेशकों में भरोसा और उम्मीद जगी है।
Swiggy अपने फूड डिलीवरी व्यापार में लगातार लाभिता की ओर बढ़ रहा है और क्विक कॉमर्स सेक्टर में भी मार्जिन सुधार देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी की लागत पर अनुशासन, प्रतिस्पर्धा में कमी, और नए प्रोडक्ट इनोवेशन के चलते उसकी यूनिट इकॉनॉमिक्स बेहतर हो रही है। इसके अलावा, लगभग 22 विश्लेषकों ने Swiggy को “Buy” रेटिंग दी है, जिससे मार्केट में सकारात्मक माहौल बन रहा है।
GST के कारण उपभोक्ताओं की डिस्पोजेबल इनकम भी बढ़ी है, जिससे ऑर्डर वॉल्यूम और प्लेटफार्म एंगेजमेंट में इजाफा हो रहा है। साथ ही, क्विक कॉमर्स बिजनेस में मुनाफे की संभावना और कंपनी का पर्याप्त फंडिंग होना निवेशकों के लिए आकर्षण का विषय है। इन सब कारणों की वजह से आज शेयर मूल्य में उल्लेखनीय तेजी देखी गई।
बजाज इंडस्ट्रीज साम्राज्य/Bajaj industries empire
बजाज इंडस्ट्रीज साम्राज्य भारत का एक प्रमुख औद्योगिक समूह है जिसकी स्थापना प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी जमनालाल बजाज ने 1926 में की थी। समूह की शुरुआत चीनी और कपड़ा उद्योगों से हुई थी, लेकिन समय के साथ यह ऑटोमोबाइल, वित्त, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील, बिजली और बीमा जैसे विविध क्षेत्रों में फैला। आज बजाज समूह में 40 से अधिक कंपनियां हैं।
बजाज समूह की सर्वाधिक प्रसिद्ध कंपनी बजाज ऑटो है, जो दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया और तिपहिया वाहन निर्माताओं में से एक है। बजाज ऑटो की स्थापना 1945 में कमलनयन बजाज के नेतृत्व में हुई थी, जिसने पूरे देश में बजाज का नाम घर-घर तक पहुंचाया। 1970 के दशक में लॉन्च हुआ बजाज चेतक स्कूटर एक सामाजिक-आर्थिक प्रतीक बन गया। इसके अलावा समूह में बजाज फिनसर्व (वित्तीय सेवाएं, बीमा और ऋण), बजाज इलेक्ट्रिकल्स (घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और लाइटिंग), बजाज हिंदुस्तान शुगर (एशिया की सबसे बड़ी गन्ना प्रोसेसिंग कंपनी) और मुकुंद लिमिटेड (स्टील उत्पादन) शामिल हैं।
बजाज समूह नवाचार, गुणवत्ता एवं सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देता है। 100,000 से अधिक कर्मचारियों के साथ, इसकी कंपनियां न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। समूह की सामाजिक नीतियों एवं परोपकारिता ने इसे भारतीय औद्योगिक जगत में विशिष्ट स्थान दिलाया है
Saturday, September 6, 2025
900 टन सोने के उच्च स्तर पर, पिछले 4 दिनों में भंडार में अतिरिक्त 27 टन सोना जोड़ा गया है।HIGH OF 900 TONS OF GOLD ADDED ADDITIONAL 27 TONS OF GOLD IN RESERVES JUST PAST 4 DAYS
हाल ही में सोने के भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अब सोने का कुल स्तर 900 टन तक पहुंच गया है, जो कि इस समय का एक उच्चतम स्तर माना जा रहा है। खास बात यह है कि केवल पिछले चार दिनों में ही अतिरिक्त 27 टन सोना भंडार में जोड़ा गया है। यह वृद्धि न केवल आकड़ों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के लिहाज़ से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
सोने को हमेशा से सुरक्षित निवेश और मूल्य संरक्षण का सबसे भरोसेमंद साधन माना जाता है। जब भी वैश्विक या राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, तो सोने की मांग अपने आप बढ़ जाती है। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है। भंडार में इतनी बड़ी मात्रा में सोने की वृद्धि यह दर्शाती है कि वर्तमान परिस्थिति में सोने पर विश्वास और भी मजबूत हुआ है।
900 टन का स्तर यह संकेत देता है कि देश के भंडार पहले से अधिक सुरक्षित हैं और वित्तीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में यह बड़ा कदम है। आने वाले समय में यह अतिरिक्त सोना न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर करने में मदद करेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।
Thursday, September 4, 2025
नेपाल ने इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स, फेसबुक और अन्य 23 सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया है।Nepal bans Instagram, YouTube, X, Facebook, and 23 other social media platforms.
नेपाल सरकार ने हाल ही में इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (पूर्व ट्विटर), फेसबुक और अन्य 23 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध उन प्लेटफॉर्म्स पर लगाया गया है जिन्होंने नेपाल के संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में खुद को निर्धारित सात दिनों की समय सीमा में रजिस्टर नहीं कराया था। सरकार ने कंपनियों को 28 अगस्त से सात दिन की डेडलाइन दी थी, जिसके समाप्त होते ही यह फैसला लिया गया। इस आदेश के बाद नेपाल टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी को इन ऐप्स को ब्लॉक करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
सरकार का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश के बाद हुआ, जिसमें कहा गया था कि देश में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नियमित करने हेतु कानून बनाना जरूरी है। टिकटॉक, वाइबर, निम्बज जैसे कुछ प्लेटफॉर्म्स ने पहले ही रजिस्ट्रेशन कर लिया है, इसलिए वे नेपाल में इस्तेमाल होते रहेंगे। प्रतिबंधित ऐप्स में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स, वॉट्सऐप, रेडिट, लिंक्डइन, स्नैपचैट, डिस्कॉर्ड, पिंटरेस्ट, सिग्नल, थ्रेड्स, वीचैट, टम्बलर सहित कई नाम शामिल हैं.
सरकार का कहना है कि यह कदम अपने नागरिकों की सुरक्षा, साइबर अपराध रोकने, और कंटेंट की निगरानी व नियंत्रण के लिए उठाया गया है। वहीं, आलोचकों के अनुसार, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने और असहमति की आवाज दबाने का प्रयास भी हो सकता है
Wednesday, September 3, 2025
नई जीएसटी संरचना, जिसमें केवल दो स्लैब, 5% और 18% होंगे, 22 सितंबर से लागू होगी।The new GST structure with just two slabs, 5% & 18% will come into effect from September 22.
नई जीएसटी संरचना, जिसमें केवल दो स्लैब 5% और 18% होंगे, 22 सितंबर 2025 से लागू होगी। यह सुधार, जिसे 56वें जीएसटी परिषद की बैठक में मंजूरी दी गई, 12% और 28% स्लैब को समाप्त करता है, जिससे सामान्य उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि यह नई संरचना नवरात्रि के पहले दिन से प्रभावी होगी, जिसका उद्देश्य आम आदमी, किसानों, और मध्यम वर्ग के लिए कर बोझ को कम करना है। 5% स्लैब में शामिल वस्तुएं: इस स्लैब में दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं, जैसे हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, टूथब्रश, साबुन, शैंपू, साइकिल, टेबलवेयर, किचनवेयर, पैकेज्ड फूड, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण, और अनब्रांडेड आयुर्वेदिक उत्पाद। इसके अतिरिक्त, मैन-मेड फाइबर और यार्न, जो पहले 18% और 12% स्लैब में थे, अब 5% में स्थानांतरित हो गए हैं। इलेक्ट्रिक वाहन भी 5% कर दर पर बने रहेंगे।18% स्लैब में शामिल वस्तुएं: इस स्लैब में छोटी कारें (350 सीसी तक), बसें, ट्रक, एम्बुलेंस, ऑटो पार्ट्स, डिशवॉशिंग मशीन, टीवी, और मोटरबाइक (350 सीसी तक) शामिल हैं। पहले 28% स्लैब में आने वाले एयर कंडीशनर और अन्य उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं अब 18% में होंगी। 40% स्लैब (सिन और लग्जरी वस्तुएं): नया 40% स्लैब तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट, बीड़ी, एरेटेड वाटर, कार्बोनेटेड और कैफीन युक्त पेय, 350 सीसी से अधिक की मोटरसाइकिल, यॉट, और हेलीकॉप्टर जैसी लग्जरी वस्तुओं पर लागू होगा। तंबाकू उत्पादों पर 28% जीएसटी और मुआवजा उपकर तब तक लागू रहेगा जब तक ऋण चुकता नहीं हो जाता।शून्य कर दर (0%): यूएचटी दूध, पनीर, सभी भारतीय ब्रेड, प्राकृतिक शहद (अनब्रांडेड), और जीवन रक्षक कैंसर दवाओं पर कोई कर नहीं लगेगा। यह सुधार कर प्रणाली को सरल बनाएगा, अनुपालन को आसान करेगा, और उपभोग को बढ़ावा देगा, जिससे अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
Scams/Frauds- Voice Phishing, SMS Phishing, QR Code scam, Fake Loan/Cashback/Job offerघोटाले/धोखाधड़ी - वॉयस फिशिंग, एसएमएस फिशिंग, क्यूआर कोड घोटाला, नकली ऋण/कैशबैक/नौकरी का प्रस्ताव
वॉयस फिशिंग (विशिंग) क्या है?: वॉयस फिशिंग में धोखेबाज फोन कॉल के जरिए व्यक्तिगत जानकारी जैसे बैंक खाता विवरण या पासवर्ड चुराने की कोशिश करते हैं।
कैसे काम करता है?: धोखेबाज बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या तकनीकी सहायता प्रदाता बनकर कॉल करते हैं और तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं।
जोखिम: कॉलर अक्सर डराने या लालच देने की रणनीति अपनाते हैं, जिससे लोग अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर देते हैं।
बचाव: अनजान नंबरों से कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी न दें और कॉलर की पहचान सत्यापित करें।
एसएमएस फिशिंग (स्मिशिंग) क्या है?: यह एक धोखाधड़ी है जिसमें धोखेबाज टेक्स्ट मैसेज के जरिए निजी जानकारी चुराते हैं।
कैसे काम करता है?: आपको लिंक या नंबर पर क्लिक करने के लिए लुभावने ऑफर या चेतावनी भेजे जाते हैं, जो फर्जी वेबसाइट्स की ओर ले जाते हैं।
जोखिम: इन लिंक्स पर क्लिक करने से डिवाइस में मैलवेयर आ सकता है या बैंक खाते की जानकारी चोरी हो सकती है।
बचाव: अनजान लिंक्स पर क्लिक न करें और संदिग्ध मैसेज की जांच करें।
क्यूआर कोड घोटाला क्या है?: धोखेबाज फर्जी क्यूआर कोड के जरिए पैसे या डेटा चुराते हैं।
कैसे काम करता है?: ये कोड भुगतान या ऑफर के बहाने स्कैन करने को कहते हैं, जो फर्जी साइट्स या ऐप्स की ओर ले जाते हैं।
जोखिम: स्कैन करने से बैंक खाते खाली हो सकते हैं या व्यक्तिगत जानकारी चोरी हो सकती है।
बचाव: केवल विश्वसनीय स्रोतों के क्यूआर कोड स्कैन करें।
नकली ऋण/कैशबैक/नौकरी का प्रस्ताव क्या है?: यह लुभावने ऑफर के जरिए लोगों को ठगने का तरीका है।
कैसे काम करता है?: धोखेबाज कम ब्याज पर ऋण, कैशबैक या नौकरी का वादा करते हैं, लेकिन अग्रिम शुल्क मांगते हैं।
जोखिम: लोग पैसे या जानकारी दे देते हैं और बदले में कुछ नहीं मिलता।
बचाव: ऑफर की सत्यता जांचें और अग्रिम भुगतान से बचें।
Tuesday, September 2, 2025
ज़ेरोधा/Zerodha की तकनीकी समस्याएँ/Technical glitches इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीतियों को कैसे प्रभावित करती हैंHow Zerodha’s Technical Issues Affect Intraday Trading Strategies
ज़ेरोधा, भारत का सबसे बड़ा ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म, अपनी उन्नत तकनीक के लिए जाना जाता है, लेकिन समय-समय पर तकनीकी समस्याएँ इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए चुनौतियाँ पैदा करती हैं। ये समस्याएँ, जैसे ऑर्डर प्लेसमेंट में देरी, डेटा फीड रुकना, या लॉगिन विफलता, ट्रेडिंग रणनीतियों को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
इंट्राडे ट्रेडिंग में समय और सटीकता महत्वपूर्ण हैं। जब ज़ेरोधा का काइट प्लेटफॉर्म रुकता है या कीमतें अपडेट नहीं होतीं, ट्रेडर्स स्टॉप-लॉस या टारगेट ऑर्डर समय पर निष्पादित नहीं कर पाते, जिससे बड़े नुकसान हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, 2021 में एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण ट्रेडर्स को लाखों का नुकसान हुआ, क्योंकि स्टॉक की कीमतें तेजी से बदल गईं, लेकिन ऑर्डर प्रोसेस नहीं हुए।
तकनीकी विश्लेषण पर निर्भर ट्रेडर्स, जो RSI, MACD, या बोलिंगर बैंड जैसे इंडिकेटर्स का उपयोग करते हैं, डेटा फीड बाधित होने पर सही निर्णय नहीं ले पाते। यह विशेष रूप से अस्थिर बाजारों में जोखिम बढ़ाता है, जहाँ ज़ेरोधा मार्जिन बढ़ा देता है, जिससे ट्रेडिंग रणनीतियाँ और जटिल हो जाती हैं।
ऐसी समस्याएँ ट्रेडर्स के आत्मविश्वास को कम करती हैं, जिससे वे अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने या अन्य प्लेटफॉर्म्स की ओर जाने को मजबूर होते हैं। ज़ेरोधा ने इन मुद्दों के लिए पारदर्शी प्रकटीकरण और रूट कॉज़ एनालिसिस (RCA) प्रकाशित किए हैं, लेकिन बार-बार होने वाली गड़बड़ियाँ मध्यम वर्ग के ट्रेडर्स को निराश करती हैं, जो छोटे पूंजी के साथ त्वरित मुनाफे पर निर्भर रहते हैं।
ज़ेरोधा को ऐसी समस्याओं को कम करने के लिए सिस्टम स्थिरता पर और निवेश करना चाहिए ताकि ट्रेडर्स अपनी रणनीतियों को बिना रुकावट लागू कर सकें। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे वैकल्पिक ब्रोकरेज या बैकअप योजनाएँ तैयार रखें।
Monday, September 1, 2025
भारतीय शेयर बाजार में तेजी: सेंसेक्स, निफ्टी ने लगातार दूसरे दिन बढ़त हासिल कीIndian Stock Market Rallies: Sensex, Nifty Gain for Second Day
भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे दिन तेजी दर्ज की, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत प्रदर्शन किया। 1 सितंबर, 2025 को सेंसेक्स 554.84 अंक (0.70%) उछलकर 80,364.49 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 198.20 अंक (0.81%) की बढ़त के साथ 24,625.05 पर कारोबार समाप्त किया। यह तेजी मजबूत आर्थिक आंकड़ों और कम अस्थिरता के कारण देखी गई। भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की, जो रिजर्व बैंक के 6.5% के अनुमान से अधिक थी। इसके अलावा, एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई अगस्त में 59.3 पर पहुंचा, जो जुलाई के 59.1 से बेहतर है, और यह औद्योगिक क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है।ऑटो, आईटी और मेटल जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और ट्रेंट सेंसेक्स के शीर्ष लाभार्थी रहे, जबकि सन फार्मा और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। चीनी शेयरों ने भी बाजार को मिठास प्रदान की, क्योंकि कमोडिटी की कीमतों में सुधार और मांग में वृद्धि ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। ग्लोबल संकेत भी सकारात्मक रहे, क्योंकि अमेरिकी बाजारों में तकनीकी क्षेत्र और एआई निवेश में तेजी देखी गई। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि निफ्टी के लिए 24,700 एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर है, और इसके नीचे 24,300-24,350 पर समर्थन है। निवेशकों को सतर्क रहने और चुनिंदा स्टॉक चयन पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
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