Ola Electric/ओला इलेक्ट्रिक की तमिलनाडु के कृष्णागिरी में बनी गीगाफैक्ट्री अब पूरी तरह शुरू हो गई है, जैसा कि सीईओ भाविश अग्रवाल ने अगस्त 2025 में बताया। यह भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र में ओला को अग्रणी बनाता है। यह फैक्ट्री 2,000 एकड़ के ईवी हब का हिस्सा है और भारत का पहला स्वदेशी लिथियम-आयन सेल, 4680 भारत सेल, बनाने लगी है। यह सेल ओला के स्कूटर और मोटरसाइकिल में इस तिमाही से इस्तेमाल होगा। फैक्ट्री अभी 5 जीडब्ल्यूएच क्षमता पर काम कर रही है, लेकिन इसे 100 जीडब्ल्यूएच तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इससे चीन और दक्षिण कोरिया से बैटरी आयात कम होगा और ईवी बनाने की लागत 40-50% कम होगी, जिससे ग्राहकों को सस्ते वाहन मिलेंगे।इस गीगाफैक्ट्री में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हुआ है। यह एक आधुनिक फैक्ट्री है, जहां 95% कर्मचारी महिलाएं हैं, जो ऑटोमोबाइल उद्योग में खास है। यह भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत है, जो स्थानीय ईवी पार्ट्स बनाने को बढ़ावा देती है। अग्रवाल ने कहा कि अपने सेल बनाने से कंपनी का मुनाफा बढ़ेगा और बाजार में स्थिति मजबूत होगी। फैक्ट्री में सप्लायर नेटवर्क भी है, जो ओला की फ्यूचर फैक्ट्री के साथ काम करता है, जहां हर साल 10 लाख दोपहिया वाहन बनते हैं।हालांकि, ओला ने पहले के 100 जीडब्ल्यूएच के लक्ष्य को घटाकर 2026 तक 20 जीडब्ल्यूएच कर दिया है, जिसके लिए उसकी आलोचना हुई। कंपनी बैटरी बनाने और ईवी ढांचे पर ध्यान दे रही है, ताकि भारत को वैश्विक ईवी केंद्र बनाया जाए। हाल के 5,500 करोड़ रुपये के आईपीओ से कंपनी की वृद्धि की योजना मजबूत हुई है, लेकिन बिक्री के बाद की सेवा और उत्पादन लक्ष्य जैसे चुनौतियां बाकी हैं।
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