विश्व ऋण 324 ट्रिलियन डॉलर है, जैसा कि इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) ने Q1 2025 में रिपोर्ट किया।
यह ऋण दुनिया किसी एक इकाई को नहीं, बल्कि एक जटिल नेटवर्क को देती है, जिसमें घरेलू धारक, विदेशी निवेशक, वित्तीय संस्थान, व्यक्ति, केंद्रीय बैंक और अंतर्राष्ट्रीय संगठन शामिल हैं।ऋण का ब्रेकडाउन: सरकारी ऋण (लगभग 100 ट्रिलियन), कॉर्पोरेट (164 ट्रिलियन), घरेलू (59 ट्रिलियन) और वित्तीय क्षेत्र।
मुख्य लेनदार: निजी निवेशक (पेंशन फंड, बीमा कंपनियां, संस्थागत फंड) जो वैश्विक सरकारी ऋण का लगभग 80% रखते हैं।
घरेलू स्तर पर, देश अपने नागरिकों, बैंकों और सरकारी एजेंसियों को ऋण देते हैं। उदाहरणस्वरूप, अमेरिका के 36 ट्रिलियन डॉलर राष्ट्रीय ऋण का 75% घरेलू है: निजी निवेशक (42%), अंतर्सरकारी एजेंसियां जैसे सोशल सिक्योरिटी (20%), फेडरल रिजर्व (13%)।
विदेशी धारक: जापान (1.1 ट्रिलियन), चीन (0.75 ट्रिलियन), यूके (0.69 ट्रिलियन) जैसे देश अमेरिकी ऋण रखते हैं।
वैश्विक स्तर पर, सरकारी ऋण घरेलू केंद्रीय बैंकों, विदेशी केंद्रीय बैंकों, सरकारों और निजी क्षेत्र को दिया जाता है।
एशिया-ओशिनिया 24% सार्वजनिक ऋण रखता है, लैटिन अमेरिका 5%, अफ्रीका 2%।
संक्षेप में, दुनिया खुद को ही यह पैसा देती है—ऋण लेनदारों की संपत्ति है। ब्याज भुगतान (लगभग 3.2 ट्रिलियन सालाना) अमीरों को लाभ पहुंचाते हैं, लेकिन विकासशील देशों में डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ता है।
यह प्रणाली आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देती है, पर असंतुलन से संकट पैदा कर सकती है।
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